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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > कैलिफोर्निया के समुद्री जंगल बचाएगा 24 भुजाओं वाला ‘सनफ्लावर सी स्टार’
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कैलिफोर्निया के समुद्री जंगल बचाएगा 24 भुजाओं वाला ‘सनफ्लावर सी स्टार’

Environment Pulse
Last updated: October 14, 2026 4:15 pm
Environment Pulse
Published: October 14, 2026
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कैलिफोर्निया के नष्ट हो रहे केल्प वनों को पुनर्जीवित करने के लिए वैज्ञानिकों ने मॉन्टेरी खाड़ी में प्रयोगशाला में तैयार किए गए 24 भुजाओं वाले दुर्लभ ‘सनफ्लावर सी स्टार’ को समुद्र में छोड़ा है। यह जीव बैंगनी समुद्री अर्चिन की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण रखकर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बहाल करने में मदद करेगा।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : अमेरिका के कैलिफोर्निया तट पर तेजी से नष्ट हो रहे समुद्री जंगलों को बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अनोखी पहल शुरू की है। समुद्री जीव वैज्ञानिकों ने मॉन्टेरी खाड़ी में प्रयोगशाला में तैयार किए गए दुर्लभ ‘सनफ्लावर सी स्टार’ (Pycnopodia helianthoides) को समुद्र तल पर विशेष पिंजरों में छोड़ा है। इस परियोजना का उद्देश्य बैंगनी समुद्री अर्चिन की बढ़ती आबादी पर प्राकृतिक नियंत्रण स्थापित करना और नष्ट हो रहे केल्प वनों को फिर से विकसित होने का अवसर देना है।

सनफ्लावर सी स्टार समुद्र में पाया जाने वाला एक बड़ा तारामछलीनुमा जीव है, जिसकी 24 तक भुजाएं हो सकती हैं। कभी अलास्का से लेकर बाजा कैलिफोर्निया तक प्रशांत महासागर में व्यापक रूप से पाया जाने वाला यह जीव अब गंभीर संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल है। सनफ्लावर स्टार लेबोरेटरी की सह-संस्थापक एश्ले किड के अनुसार, इस प्रजाति की आबादी को फिर से बढ़ाना समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्ष 2013 के आसपास समुद्र में बढ़ती गर्मी के साथ सनफ्लावर सी स्टार वेस्टिंग सिंड्रोम नामक बीमारी का प्रसार तेज हुआ। इस बीमारी के कारण बड़ी संख्या में समुद्री तारामछलियां प्रभावित हुईं और उनके शरीर के ऊतक नष्ट होने लगे। रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर में इस प्रजाति की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी समाप्त हो गई। इसके बाद समुद्री अर्चिन की संख्या तेजी से बढ़ी, क्योंकि उनका प्रमुख प्राकृतिक शिकारी काफी हद तक गायब हो गया था।

बैंगनी समुद्री अर्चिन समुद्र तल पर फैलकर केल्प पौधों के आधार और तनों को खा जाते हैं। इससे घने समुद्री वन धीरे-धीरे बंजर क्षेत्रों में बदलने लगे, जिन्हें वैज्ञानिक ‘अर्चिन डेजर्ट’ कहते हैं। केल्प समुद्र में उगने वाले बड़े भूरे शैवाल हैं, जो पानी के भीतर जंगल जैसी संरचनाएं बनाते हैं। ये हजारों समुद्री प्रजातियों को भोजन और आश्रय उपलब्ध कराते हैं। साथ ही, मत्स्य पालन और तटीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले दशक में कैलिफोर्निया के लगभग 95 प्रतिशत केल्प वन नष्ट हो चुके हैं। अनुकूल परिस्थितियों में कुछ केल्प प्रजातियां प्रतिदिन लगभग दो फुट तक बढ़ सकती हैं और उनकी लंबाई दस मंजिला इमारत से भी अधिक हो सकती है।

सनफ्लावर सी स्टार समुद्री अर्चिन का प्रमुख शिकारी है। एक स्वस्थ जीव प्रतिदिन तीन से चार अर्चिन खा सकता है। इसका प्रभाव केवल शिकार करने तक सीमित नहीं रहता। इसकी मौजूदगी और गंध से अर्चिन दूर भागने या छिपने लगते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्र में केल्प को नुकसान पहुंचाने वाली उनकी गतिविधि कम हो सकती है। वैज्ञानिक इस प्रभाव को ‘हेलो ऑफ फियर’ यानी भय का दायरा कहते हैं।

इससे युवा केल्प को दोबारा उगने और समुद्री जंगलों को पुनर्जीवित होने का अवसर मिल सकता है। सनफ्लावर स्टार लेबोरेटरी के शोधकर्ता समुद्र तल पर विशेष खुले पिंजरों में प्रयोगशाला में तैयार समुद्री तारामछलियों को रखकर उनकी गतिविधियों और अर्चिन के व्यवहार का अध्ययन कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह समझना है कि छोड़े गए जीव समुद्री वातावरण में कैसे व्यवहार करते हैं और क्या वे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के पुनरुद्धार में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

परियोजना के सह-संस्थापक रेवेन बैंक के अनुसार, सनफ्लावर सी स्टार की वापसी कैलिफोर्निया के संकटग्रस्त केल्प वनों को बचाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि प्रयोग सफल होते हैं, तो वैज्ञानिक आने वाले वर्षों में मॉन्टेरी खाड़ी में इस प्रजाति को स्थायी रूप से फिर से स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।

इसके साथ ही, प्रशांत तट पर समुद्री अर्चिन की संख्या नियंत्रित करने, केल्प के नए पौधे लगाने और बीमारी के प्रति प्रतिरोधी समुद्री तारामछलियों की पहचान करने जैसे प्रयास भी किए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस परियोजना की सफलता समुद्री खाद्य शृंखला का संतुलन बहाल करने में मदद कर सकती है। हालांकि, केल्प वनों की व्यापक बहाली के लिए समुद्र के तापमान, बीमारी और अन्य पर्यावरणीय दबावों से निपटना भी जरूरी होगा।

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