केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दुनिया की पहली एकीकृत वायु प्रदूषण विश्लेषण प्रयोगशाला ‘AATAL’ (इंटीग्रेटेड एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड एरोसोल टॉक्सिसिटी एनालिसिस लेबोरेटरी) का उद्घाटन किया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आईआईटीएम (IITM) की दिल्ली शाखा में स्थापित यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला न केवल प्रदूषण के स्तर (AQI) को मापेगी, बल्कि उसके वास्तविक स्रोतों, रासायनिक संरचना और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का भी सटीक विश्लेषण करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन मौसम’ के तहत बनी यह सुविधा वाहनों के धुएं, पराली, औद्योगिक गतिविधियों और धूल जैसे स्रोतों की पहचान करने के साथ-साथ AIRWISE प्रणाली के जरिए अगले 72 से 96 घंटों का पूर्वानुमान भी उपलब्ध कराएगी, जिससे प्रशासनिक एजेंसियों को प्रभावी और लक्षित कदम उठाने में मदद मिलेगी।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने दुनिया की अपनी तरह की पहली एकीकृत वायु प्रदूषण विश्लेषण सुविधा का उद्घाटन किया। ‘इंटीग्रेटेड एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड एरोसोल टॉक्सिसिटी एनालिसिस लेबोरेटरी’ (AATAL) नामक यह प्रयोगशाला प्रदूषण के स्तर का आकलन करने के साथ ही उसके वास्तविक स्रोतों की पहचान भी कर सकेगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस सुविधा के माध्यम से अब केवल वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों तक सीमित रहने के बजाय यह पता लगाया जा सकेगा कि दिल्ली की हवा में कौन-कौन से प्रदूषक मौजूद हैं, वे कहां से आ रहे हैं और उनका स्वास्थ्य पर क्या संभावित प्रभाव पड़ सकता है।
इससे प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर समय रहते प्रभावी कदम उठाने में मदद मिलेगी। आईआईटीएम की दिल्ली शाखा में स्थापित इस प्रयोगशाला का उद्घाटन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार, आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव और भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. महापात्र की उपस्थिति में हुआ। यह सुविधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित ‘मिशन मौसम’ के तहत विकसित की गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में भारत ने वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और प्रदूषण विश्लेषण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। नई प्रयोगशाला इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे प्रदूषण की मात्रा के साथ उसकी संरचना और विभिन्न स्रोतों के योगदान का भी आकलन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पहले प्रदूषण पर चर्चा मुख्य रूप से इस बात तक सीमित रहती थी कि उसका स्तर 100 है या 200। अब वैज्ञानिक तरीके से यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रदूषण किन तत्वों से मिलकर बना है और उसमें विभिन्न स्रोतों की कितनी हिस्सेदारी है।
प्रयोगशाला वाहनों से निकलने वाले धुएं, औद्योगिक गतिविधियों, पराली और अन्य जैविक पदार्थों के जलने, निर्माण कार्यों, सड़कों की धूल तथा आसपास के क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषकों के योगदान की पहचान करने में सक्षम होगी। इससे संबंधित एजेंसियां यह निर्धारित कर सकेंगी कि किसी विशेष समय में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कौन-से स्रोत प्रमुख हैं और किन क्षेत्रों में नियंत्रण के उपाय अधिक प्रभावी हो सकते हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि प्रयोगशाला के स्क्रीन पर उस समय दिल्ली के वायु प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान लगभग 25 प्रतिशत दिखाया गया, जबकि प्रदूषण का समग्र स्तर करीब 180 दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि इस तरह की वास्तविक समय की जानकारी से प्रदूषण के खिलाफ सामान्य उपायों के बजाय उसके प्रमुख स्रोतों को लक्षित कर कार्रवाई की जा सकेगी।
AATAL में वायुमंडलीय गैसों और एरोसोल की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने के लिए उन्नत उपकरण लगाए गए हैं। इनके माध्यम से PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों, धातुओं, विषैले तत्वों और अन्य प्रदूषकों की पहचान की जा सकेगी। इससे यह समझने में भी मदद मिलेगी कि वायुमंडल में विभिन्न प्रदूषक किस प्रकार आपस में प्रतिक्रिया करते हैं और उनकी संरचना स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कैसे प्रभावित कर सकती है। यह प्रयोगशाला आईआईटीएम की AIRWISE प्रणाली से भी जुड़ी है।
AIRWISE यानी एयर क्वालिटी वार्निंग एंड इंटीग्रेटेड डिसीजन सपोर्ट सिस्टम फॉर एमिशन्स, वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान, वास्तविक माप और प्रदूषण के स्रोतों से संबंधित जानकारी को एकीकृत करती है। इसके जरिए अगले 72 घंटों के लिए 400 मीटर के उच्च स्थानिक रिजॉल्यूशन पर वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। इससे दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण के संभावित स्तर और उसके प्रमुख स्रोतों का आकलन संभव होगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह एकीकृत प्रणाली वास्तविक समय की जानकारी के साथ आगामी चार दिनों के लिए पूर्वानुमान उपलब्ध कराने में मदद करेगी, जिससे प्रशासन बदलती परिस्थितियों के अनुरूप पहले से तैयारी कर सकेगा। मिशन मौसम एयर क्वालिटी एंड अर्ली वार्निंग सिस्टम (MAQWS) के परियोजना निदेशक डॉ. सचिन घुडे ने कहा कि यह सुविधा दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण प्रबंधन को मजबूत करेगी।
इसके माध्यम से पराली जलाने, वाहनों के उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों और सड़क की धूल सहित प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की पहचान कर संबंधित एजेंसियां लक्षित कदम उठा सकेंगी। साथ ही, उठाए गए उपायों की प्रभावशीलता का आकलन भी किया जा सकेगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वायु प्रदूषण जैसी जटिल समस्या का समाधान किसी एक विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों और आपदा प्रबंधन से जुड़े संस्थानों के बीच समन्वय जरूरी है। उन्होंने इसे सरकार के समग्र दृष्टिकोण का उदाहरण बताया, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रशासनिक निर्णयों और जमीनी कार्रवाई से जोड़ा जा रहा है।
नई प्रयोगशाला से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और अन्य संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान करने, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में हस्तक्षेप तय करने तथा ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत उपायों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। AATAL की स्थापना से दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की निगरानी को अधिक वैज्ञानिक और सटीक बनाने की दिशा में नई पहल हुई है। वास्तविक समय के आंकड़ों, प्रदूषकों की रासायनिक जांच, स्रोतों के विश्लेषण और पूर्वानुमान को एक साथ जोड़ने वाली यह सुविधा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े फैसलों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी।
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