नई दिल्ली में आयोजित इस मंच की सह-अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और जर्मनी के मंत्री कार्स्टन श्नाइडर ने की, जिसकी थीम ‘Together for More Resilience’ थी।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए देशों को एकीकृत और सहयोगात्मक समाधान अपनाने होंगे।
उन्होंने भारत-जर्मनी पर्यावरण सहयोग को मजबूत बनाने के लिए ज्ञान के आधार को व्यापक करने, व्यावहारिक समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने और संस्थागत क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यादव ने नई दिल्ली में आयोजित चौथे भारत-जर्मनी पर्यावरण मंच (IGEF) के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने जर्मनी के पर्यावरण, जलवायु संरक्षण, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा मंत्री कार्स्टन श्नाइडर के साथ मंच की सह-अध्यक्षता की।
इस वर्ष मंच की थीम ‘Together for More Resilience’ रखी गई है। यादव ने कहा कि पर्यावरणीय स्थिरता को आर्थिक विकास से अलग करके नहीं देखा जा सकता। भारत का विकास अनुभव दर्शाता है कि पर्यावरणीय लक्ष्यों और आर्थिक प्रगति को साथ लेकर आगे बढ़ना संभव है।
उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) से जुड़े कई लक्ष्यों को निर्धारित समय से पहले हासिल कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने संसाधन दक्षता और सर्कुलर इकोनॉमी की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सर्कुलर अर्थव्यवस्था वर्ष 2050 तक 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का बाजार मूल्य और करीब एक करोड़ रोजगार पैदा करने की क्षमता रखती है।
उन्होंने कहा कि भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान रिसोर्स एफिशिएंसी एंड सर्कुलर इकोनॉमी इंडस्ट्री कोएलिशन की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल रही है। यादव ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस्पात, सीमेंट और रसायन जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों को कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए नई तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, संसाधन दक्षता, उपयुक्त नीतियों और उत्पादन प्रक्रियाओं में बदलाव की जरूरत होगी।
उन्होंने भारत-जर्मनी मंच से जलवायु, जैव विविधता और संसाधन दक्षता से जुड़े प्रमाण-आधारित निर्णयों तथा व्यावहारिक और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। जर्मनी के मंत्री कार्स्टन श्नाइडर ने भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की सराहना की। उन्होंने कहा कि देशभर में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा का विस्तार भारत को दुनिया के अन्य क्षेत्रों के लिए एक उदाहरण बनाता है।
उन्होंने भारत को भविष्य की संभावनाओं वाला देश बताते हुए युवा आबादी में मौजूद नवाचार और प्रगति की भावना की भी प्रशंसा की। श्नाइडर ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच संबंधों की नींव मजबूत है और दोनों देश इस वर्ष राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सतत विकास आर्थिक वृद्धि के साथ आगे बढ़े।
जलवायु अनुकूलन और आर्द्रभूमि संरक्षण में सहयोग बढ़ाने के निर्णय का स्वागत करते हुए उन्होंने संयुक्त परियोजनाओं और ज्ञान के आदान-प्रदान पर जोर दिया। मंच के इतर भूपेंद्र यादव और कार्स्टन श्नाइडर के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। दोनों मंत्रियों ने पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर संयुक्त घोषणा-पत्र (JDI) पर हस्ताक्षर भी किए।
यादव ने कहा कि यह घोषणा-पत्र आर्द्रभूमियों से जुड़े वैज्ञानिक ज्ञान को मजबूत करने, बेहतर प्रबंधन पद्धतियों को साझा करने, पुनर्स्थापना के उपाय विकसित करने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मंच उपलब्ध कराएगा। मंत्री ने भारत-जर्मन बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया और हरित बदलाव के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा दक्षता, सतत विनिर्माण और संबंधित तकनीकों को सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताया। भारत-जर्मनी पर्यावरण मंच में दोनों देशों के नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, विशेषज्ञों, थिंक टैंक और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
चर्चा में कम-कार्बन उद्योग, आर्द्रभूमि-माउंटेन-वन जैव विविधता, संसाधन दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी तथा सतत वित्त, हरित कौशल और निवेश जुटाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मंच से पहले जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और सर्कुलर इकोनॉमी पर गठित तीन संयुक्त कार्य समूहों की बैठकें भी हुईं, जिनमें अब तक हुई प्रगति और भविष्य में सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की गई।
भारत और जर्मनी के बढ़ते आर्थिक एवं औद्योगिक संबंधों के बीच पर्यावरणीय तकनीक और हरित अर्थव्यवस्था में सहयोग को गहरा करने के लिहाज से यह मंच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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