वर्ष 2025 में भी वायुमंडल में प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) की सांद्रता लगातार बढ़ती रही और यह नए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई। कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस और वैज्ञानिक आकलन के अनुसार 2025 में वैश्विक औसत CO₂ सांद्रता बढ़कर लगभग 425.3 से 425.6 ppm तक पहुंच गई, जो 2024 की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। हवाई के मौना लोआ जैसे केंद्रों पर 2025 के मध्य में CO₂ का स्तर 430 ppm से ऊपर दर्ज किया गया। अगस्त 2026 तक के आंकड़ों में भी इस वृद्धि के रुकने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। मानवीय उत्सर्जन के साथ-साथ जंगलों की आग और सूखे के कारण प्राकृतिक कार्बन सिंक की क्षमता कम होना इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। वायुमंडल में गर्मी को रोकने वाली प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता वर्ष 2025 में भी बढ़ती रही और नए रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंच गई। वैज्ञानिक निगरानी नेटवर्क के शुरुआती आकलन संकेत देते हैं कि कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) के स्तर में अब तक कोई व्यापक गिरावट नहीं आई है।
इससे जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालिक जोखिमों को लेकर चिंता बनी हुई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ग्लोबल एटमॉस्फियर वॉच नेटवर्क के अनुसार, 2024 के लिए उपलब्ध नवीनतम पूर्ण और समेकित वैश्विक आंकड़ों में CO₂ की औसत सांद्रता 423.9 पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm), मीथेन की 1,942 पार्ट्स प्रति बिलियन (ppb) और नाइट्रस ऑक्साइड की 338.0 ppb रही थी।
ये आधुनिक वैज्ञानिक रिकॉर्ड में अब तक दर्ज सबसे ऊंचे स्तर थे और औद्योगिक युग से पहले की तुलना में काफी अधिक हैं। 2025 के शुरुआती स्वतंत्र विश्लेषणों में भी वृद्धि जारी रहने के संकेत मिले हैं।
कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के उपग्रह आधारित विश्लेषण के मुताबिक, 2025 में वैश्विक औसत कॉलम-एवरेज्ड CO₂ सांद्रता करीब 425.3 ppm रही।
यह 2024 की तुलना में लगभग 2.6 ± 0.3 ppm की वृद्धि है। हालांकि यह वृद्धि पिछले वर्ष दर्ज 3.5 से 3.6 ppm की रिकॉर्ड छलांग से कम है, लेकिन वायुमंडलीय CO₂ की दीर्घकालिक बढ़ती प्रवृत्ति बनी हुई है।
‘इंडिकेटर्स ऑफ ग्लोबल क्लाइमेट चेंज 2025’ के वैज्ञानिक आकलन में 2025 के लिए वैश्विक सतही औसत सांद्रता लगभग 425.6 ppm CO₂, 1,936 ppb मीथेन और 339.4 ppb नाइट्रस ऑक्साइड आंकी गई है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन गैसों की दीर्घकालिक वृद्धि मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन से जुड़ी है। WMO की मार्च 2026 में जारी स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2025 रिपोर्ट ने भी पुष्टि की कि 2025 में तीनों प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता में वृद्धि जारी रही। संगठन ने हालांकि स्पष्ट किया कि 2024 अभी भी वह नवीनतम वर्ष है जिसके लिए वैश्विक स्तर पर पूरी तरह समेकित अवलोकन उपलब्ध हैं।
2024 में CO₂ का स्तर कम से कम 20 लाख वर्षों में नहीं देखे गए स्तर तक पहुंच गया था, जबकि मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की सांद्रता कम से कम 8 लाख वर्षों में अभूतपूर्व रही।
स्थानीय निगरानी केंद्रों के आंकड़े भी वातावरण में CO₂ की बढ़ती मात्रा की ओर इशारा करते हैं। हवाई स्थित मौना लोआ जैसे प्रमुख निगरानी केंद्रों पर 2025 के मध्य में मौसमी CO₂ स्तर 430 ppm से ऊपर दर्ज किए गए। 2026 में भी वैश्विक मासिक औसत में बढ़ोतरी जारी रहने के संकेत मिले हैं। अगस्त 2026 तक उपलब्ध आकलनों के मुताबिक, WMO की अगली ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन, जिसमें 2025 के पूरे वैश्विक अवलोकनों को शामिल किया जाएगा, अक्टूबर 2026 के आसपास आने की उम्मीद है।
इसके बाद वर्ष 2025 की ग्रीनहाउस गैस सांद्रता का अधिक सटीक और आधिकारिक वैश्विक आकलन सामने आएगा। ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते स्तर के पीछे केवल उत्सर्जन में वृद्धि ही चिंता का कारण नहीं है।
भूमि और महासागर जैसे प्राकृतिक कार्बन सिंक भी बढ़ते तापमान, सूखे और जंगलों की आग के कारण दबाव में हैं। इससे वातावरण से कार्बन को अवशोषित करने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है और वायुमंडलीय CO₂ की वृद्धि और तेज हो सकती है।
2025 वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड में दर्ज तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा। वर्ष की शुरुआत और अंत में ला नीना के अस्थायी ठंडे प्रभाव के बावजूद वैश्विक तापमान बेहद ऊंचे स्तर पर बना रहा। वैज्ञानिकों का कहना है कि CO₂ का वातावरण में लंबे समय तक बने रहना विशेष रूप से चिंताजनक है। मौजूदा सांद्रता भविष्य में दशकों से लेकर सदियों तक अतिरिक्त गर्मी और चरम मौसम की घटनाओं के जोखिम को प्रभावित कर सकती है।
अगस्त 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों में वायुमंडलीय ग्रीनहाउस गैसों की समग्र बढ़ती दिशा में किसी स्पष्ट उलटफेर के संकेत नहीं हैं। ऐसे में COP30 के बाद वैश्विक जलवायु प्रयासों पर उत्सर्जन में तेज और टिकाऊ कटौती की दिशा में कार्रवाई बढ़ाने का दबाव और बढ़ गया है।
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