By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: यूरोप में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग पर संकट, कई देशों में बंद हो रहे संयंत्र
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > कचरा-प्रबंधन > रीसाइकलिंग > यूरोप में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग पर संकट, कई देशों में बंद हो रहे संयंत्र
AI Image
कचरा-प्रबंधनरीसाइकलिंग

यूरोप में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग पर संकट, कई देशों में बंद हो रहे संयंत्र

Environment Pulse
Last updated: November 7, 2026 7:15 pm
Environment Pulse
Published: November 7, 2026
Share
AI Image
SHARE

सस्ते नए प्लास्टिक, महंगी ऊर्जा और कमजोर मांग के कारण यूरोप का प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग गंभीर संकट से गुजर रहा है, जिससे 2023 से 2025 के अंत तक करीब 10 लाख टन रीसाइक्लिंग क्षमता घटने का अनुमान है। प्लांट बंद होने की रफ्तार 50% तक बढ़ गई है, जिससे यूरोप के सर्कुलर इकोनॉमी लक्ष्यों को बड़ा झटका लगा है। उद्योग संघ ने यूरोपीय संघ से प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेप और कड़े नियमों की मांग की है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : यूरोप का प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग आर्थिक दबाव और बाजार में नए प्लास्टिक की लगातार कम कीमतों के कारण गंभीर संकट से गुजर रहा है। लागत बढ़ने और पुनर्चक्रित प्लास्टिक की मांग कमजोर पड़ने से कई देशों में रीसाइक्लिंग संयंत्र बंद हो रहे हैं। उद्योग संगठन प्लास्टिक्स रिसाइक्लर्स यूरोप (PRE) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात में यूरोप का रीसाइक्लिंग क्षेत्र बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है। संगठन के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के अंत तक लगभग 10 लाख टन स्थापित रीसाइक्लिंग क्षमता समाप्त होने की आशंका है।

यूरोप में फिलहाल करीब 850 रीसाइक्लिंग इकाइयां संचालित हैं, जिनकी कुल वार्षिक क्षमता लगभग 1.32 करोड़ टन है। यह उद्योग सालाना 9 अरब यूरो से अधिक का कारोबार करता है। हालांकि, 2025 के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, संयंत्रों के बंद होने की रफ्तार पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत बढ़ गई है। पॉलीओलिफिन फिल्म और PET प्लास्टिक के पुनर्चक्रण से जुड़ी इकाइयां सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं।

ब्रिटेन की बिफा, जर्मनी और फ्रांस में वेओलिया तथा नीदरलैंड की ब्लू साइकिल जैसी कंपनियों ने अपनी कुछ रीसाइक्लिंग इकाइयां बंद कर दी हैं। वहीं, कई अन्य कंपनियां भी गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही हैं।

इस संकट की प्रमुख वजह पुनर्चक्रित प्लास्टिक और नए यानी वर्जिन प्लास्टिक की कीमतों के बीच बढ़ता अंतर है। कच्चे तेल की अपेक्षाकृत कम कीमतों तथा एशिया और मध्य पूर्व में प्लास्टिक उत्पादन की अतिरिक्त क्षमता के कारण नया प्लास्टिक सस्ता उपलब्ध हो रहा है। ऐसे में पुनर्चक्रित प्लास्टिक बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहा है।

इसके अलावा यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतें, पैकेजिंग और निर्माण क्षेत्र से कमजोर मांग तथा कम कीमत पर आयात किए जा रहे पुनर्चक्रित प्लास्टिक ने स्थानीय कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई मामलों में रीसाइक्लिंग से तैयार प्लास्टिक की उत्पादन लागत नए प्लास्टिक से अधिक पड़ रही है, जिससे संयंत्रों का संचालन आर्थिक रूप से कठिन हो गया है।

PRE के अध्यक्ष टोन एमांस ने यूरोपीय संघ की संस्थाओं से उद्योग को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। इनमें प्लास्टिक आयात पर प्रभावी नियंत्रण, बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा लागत में कमी और पैकेजिंग एवं पैकेजिंग वेस्ट रेगुलेशन (PPWR) के तहत पुनर्चक्रित सामग्री के अनिवार्य इस्तेमाल से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन शामिल है।

संगठन का कहना है कि यदि समय रहते नीतिगत हस्तक्षेप नहीं किया गया तो यूरोप अपने सर्कुलर इकोनॉमी लक्ष्यों को हासिल करने में पीछे रह सकता है। इससे रीसाइक्लिंग तकनीक में हुए निवेश और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

बाजार में अनिश्चितता का असर केमिकल रीसाइक्लिंग परियोजनाओं पर भी पड़ा है। मांग और प्रतिस्पर्धा को लेकर स्पष्टता नहीं होने के कारण कई परियोजनाएं टाल दी गई हैं या रद्द कर दी गई हैं। कुछ कंपनियां अब भी निवेश कर रही हैं, लेकिन नई क्षमता के जुड़ने की तुलना में पुरानी इकाइयों के बंद होने की रफ्तार अधिक बनी हुई है।

बेल्जियम की रीसाइक्लिंग कंपनी फ्रॉम्टो की वित्तीय परेशानियां भी उद्योग पर बढ़ते दबाव को दर्शाती हैं। 2026 के उत्तरार्ध तक भी इस क्षेत्र में आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, नए प्लास्टिक की कीमतों में संभावित वृद्धि और पुनर्चक्रित सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाली मजबूत सरकारी नीतियां इस उद्योग को राहत दे सकती हैं। फिलहाल यूरोप का रीसाइक्लिंग क्षेत्र रोजगार, निवेश और पर्यावरणीय लक्ष्यों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसका असर यूरोप की प्लास्टिक कचरे को दोबारा उपयोगी संसाधन में बदलने की महत्वाकांक्षी योजना पर भी पड़ सकता है।

Also Read: सूखे की मार से देश में कृषि आयात बढ़ने का खतरा, खाद्य तेल, मक्का और सोयामील की मांग बढ़ी

You Might Also Like

लखनऊ में वायु प्रदूषण की हो सकेगी त्वरित निगरानी, पुराना कचरा हटेगा
African Nations Step Up Investment in the Circular Economy
बेंगलुरु की झीलों में कचरे का कहर – डार्टर पक्षियों की मौत का सिलसिला जारी
खराब मोबाइल-चार्जर स्कूलों में होंगे जमा, बनेंगे ई-कचरा संग्रह केंद्र
UP’s First Zero-Dump City: The Lucknow Model
TAGGED:Circular economyEuropean CrisisPlastic RecyclingRecycling Plant ClosuresVirgin Plastic
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: इलेक्ट्रिक वाहन बनेंगे घरों के लिए पावर बैंक, पीक आवर्स में कम होगा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता – Envi

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
कचरा-प्रबंधन

अस्पताल के कचरे के निपटान में बड़ी लापरवाही, UP और राजस्थान समेत 17 राज्यों-UTs को CPCB का अल्टीमेटम

Environment Pulse
Environment Pulse
August 10, 2026
उत्तराखंड में वासुंधरा ताल पर पहली ग्लेशियल झील चेतावनी प्रणाली स्थापित
UP Supplementary Budget allocates ₹1.475 crore for Groundwater Awareness
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में आयोजित हुए ‘ट्री वॉक’ और ‘बर्ड वॉक’ कार्यक्रम
3.30 करोड़ बच्चों को आज से पिलाई जाएगी पोलियारोधी दवा

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?