वैज्ञानिकों के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जीनोमिक और जीवाश्म अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि दुनिया के एकमात्र वास्तविक रूप से उड़ने वाले स्तनधारी चमगादड़ों की उत्पत्ति संभवतः करीब 6.5 करोड़ वर्ष पहले यूरोप में हुई थी। 23 सितंबर 2026 को प्रतिष्ठित पत्रिका ‘Nature’ में प्रकाशित इस शोध को 64 देशों के 137 वैज्ञानिकों के ‘Bat1K consortium’ द्वारा किया गया है। इसमें चमगादड़ों की 103 प्रजातियों के उच्च गुणवत्ता वाले जीनोम का विश्लेषण किया गया।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : दुनिया में वास्तविक रूप से संचालित उड़ान भरने में सक्षम एकमात्र स्तनधारी चमगादड़ों की उत्पत्ति संभवतः करीब 6.5 करोड़ वर्ष पहले यूरोप में हुई थी। एक बड़े जीनोमिक और जीवाश्म अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है।
शोध 23 सितंबर 2026 को वैज्ञानिक पत्रिका Nature में प्रकाशित हुआ। अंतरराष्ट्रीय Bat1K consortium के तहत 64 देशों के 137 वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों की 103 प्रजातियों के उच्च गुणवत्ता वाले जीनोम का विश्लेषण किया, जिनमें सभी 21 जीवित बैट परिवार शामिल हैं। इनमें 42 नए क्रोमोसोम-स्तरीय जीनोम भी शामिल थे। वैज्ञानिकों ने इन आंकड़ों की तुलना 44 जीवाश्म चमगादड़ों की शारीरिक संरचना संबंधी जानकारी से की।
अध्ययन के अनुसार, यूरोप में चमगादड़ों की उत्पत्ति की संभावना 99 प्रतिशत से अधिक है। यह विकास लेट पैलियोसीन काल में हुआ, यानी उस सामूहिक विलुप्ति के कुछ समय बाद जिसमें गैर-पक्षी डायनासोर समाप्त हो गए थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक शुरुआती चमगादड़ यूरोप से अफ्रीका पहुंचे और दोनों क्षेत्र इनके विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बने। बाद में अलग-अलग वंश एशिया, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक फैल गए।
अध्ययन से यह भी संकेत मिलता है कि चमगादड़ों में सक्रिय उड़ान और स्वरयंत्र आधारित प्रतिध्वनि-निर्धारण (echolocation) उनके विकास के शुरुआती दौर में ही विकसित हो गए थे। जीवाश्म चमगादड़ Vielasia की स्थिति इस बात का समर्थन करती है कि आधुनिक चमगादड़ों के विविध समूहों में विभाजन से पहले ही इकोलोकेशन मौजूद था।
शोधकर्ताओं ने प्राचीन चमगादड़ के जीनोम के कुछ हिस्सों का पुनर्निर्माण भी किया। इससे उड़ान, उन्नत बायोसोनार, असाधारण लंबी आयु और रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसी विशेषताओं के आनुवंशिक विकास को समझने में मदद मिल सकती है। आज चमगादड़ दुनिया की जीवित स्तनधारी प्रजातियों में पांचवें से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महाद्वीपों पर पाए जाते हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह नया विकासवादी ढांचा चमगादड़ों के जीव विज्ञान, संरक्षण और उनकी अनूठी आनुवंशिक विशेषताओं पर भविष्य के शोध के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा।
Also Read: उत्तराखंड में वासुंधरा ताल पर पहली ग्लेशियल झील चेतावनी प्रणाली स्थापित

