By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: अल नीनो से भारत में गर्म सर्दी का खतरा, गेहूं की फसल पर पड़ सकता है असर
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जमीन > अल नीनो से भारत में गर्म सर्दी का खतरा, गेहूं की फसल पर पड़ सकता है असर
AI Image
जमीनजल

अल नीनो से भारत में गर्म सर्दी का खतरा, गेहूं की फसल पर पड़ सकता है असर

Environment Pulse
Last updated: October 9, 2026 12:44 pm
Environment Pulse
Published: October 9, 2026
Share
AI Image
SHARE

प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति मजबूत होने के कारण इस बार भारत में सामान्य से अधिक गर्म सर्दी और शीतलहर के दिनों में कमी आने की आशंका जताई गई है, जिसका सीधा असर देश की आगामी गेहूं की फसल पर पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, सर्दियों में तापमान सामान्य से ऊपर रहने और फरवरी-मार्च में अधिक गर्मी होने से गेहूं के पकने की अवधि घट सकती है और पैदावार कम हो सकती है। पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में इस संभावित संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिससे निपटने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने राज्यों को आकस्मिक योजनाओं और जलवायु-अनुकूल बीजों को अपनाने की सलाह दी है। 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क: प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति मजबूत होने के साथ भारत में इस बार सामान्य से अधिक गर्म सर्दी पड़ने की आशंका जताई गई है। जलवायु अनुमानों के अनुसार, सर्दियों में शीतलहर के दिनों में कमी आ सकती है, जिससे देश की आगामी गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, प्रशांत महासागर के प्रमुख क्षेत्रों में समुद्र की सतह का तापमान दिसंबर तक औसत से लगभग 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है।

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय केंद्रों के मॉडलों पर आधारित इस अनुमान ने संभावित रूप से अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो को लेकर चिंता बढ़ाई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका प्रभाव शीतलहर की तीव्रता और आवृत्ति पर पड़ सकता है, जिससे सर्दियों का औसत तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। भारत की प्रमुख रबी फसल गेहूं के लिए ठंडा मौसम जरूरी होता है।

खासकर फसल की बढ़वार और दाने भरने के चरण में तापमान की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। फरवरी और मार्च में तापमान अधिक रहने से फसल के पकने की अवधि घट सकती है, पैदावार कम हो सकती है और कटाई के आसपास गर्मी से नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डी.एस. पई ने कहा कि शीतलहर वाले दिनों की तीव्रता और संख्या कम रहने की आशंका है तथा सर्दियों का समग्र तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।

कृषि विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। वर्ष 2026 के कमजोर मानसून के बाद जलाशयों में पानी का स्तर कम रहने से कई क्षेत्रों में सिंचाई के लिए उपलब्ध अतिरिक्त जल भंडार भी सीमित हो सकता है।

इससे गर्म मौसम का जोखिम और बढ़ने की आशंका है। कुछ अनुमानों में हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी कम होने की संभावना भी जताई गई है, जिसका असर सेब की फसल पर पड़ सकता है। संभावित जोखिमों को देखते हुए राज्यों को आकस्मिक योजनाएं तैयार करने, पानी का कुशल उपयोग बढ़ाने और जलवायु के अनुकूल बीज किस्मों को अपनाने की सलाह दी जा रही है।

बुवाई के मौसम में किसानों को फसल प्रबंधन संबंधी उपायों के लिए तैयार रहने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो की आशंकाओं के बीच सरकार ने 2026-27 के लिए खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्यों में भी संशोधन किया है। हालांकि, कृषि पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वर्ष 2027 की शुरुआत तक अल नीनो की स्थिति किस तरह विकसित होती है।

वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती बदलते मौसम के बीच खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय की रक्षा करना है।

Also Read: अर्जेंटीना के पेटागोनिया तट पर दर्जनों व्हेल शावकों की मौत, वैज्ञानिक कारणों की जांच में जुटे

You Might Also Like

गंगा का जलस्तर बढ़ा, वाराणसी में नावों पर लगी रोक; घाटों की रौनक पर बाढ़ का साया
हाथियों के रास्ते पर खनन का पहरा, हसदेव अरण्य में संरक्षण पर सवाल
Warming Is Flipping Frogs’ Sex, and It Could Push Them Toward Extinction
गंगा के बाढ़ क्षेत्र से ‘निर्माण-मुक्त क्षेत्र’ की शर्त हटाने पर NGT ने केंद्र को भेजा नोटिस
आर्कटिक में पिघलता पर्माफ्रॉस्ट बना आर्थिक संकट, 2050 तक बुनियादी ढांचे को अरबों डॉलर का नुकसान
TAGGED:Agricultural Risk Management in IndiaEl Nino Impact on Indian WinterFood Security and Weather ForecastRabi Crop Season and Climate ChangeWheat Crop Vulnerability and Yield ReductionWinter Temperature Anomalies
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: भारत ने 2035 के लिए तय किए महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य, 60% बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
सस्टेनिबिलिटी

India’s Green Mission for 2047: The Roadmap to a Sustainable Century

Environment Pulse
Environment Pulse
October 2, 2026
दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण की आर्थिक कीमत GDP के 10% के बराबर: UNEP Report
हिमालयी बाढ़ के पीछे पर्माफ्रॉस्ट अस्थिरता से जुड़ा जलवायु परिवर्तन: वैज्ञानिक अध्ययन
दुनिया के 70% मीठे पानी की खपत सिंचाई में, केवल 20% कृषि भूमि से मिलता है 40% खाद्य उत्पादन
How India’s Scientists Are Fighting Floods – Not Just With Boats, But With Satellites, Sensors And Soil

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?