By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ अव्वल, जल शक्ति अभियान के JSJB चरण 3.0 में देश में हासिल किया पहला स्थान
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ अव्वल, जल शक्ति अभियान के JSJB चरण 3.0 में देश में हासिल किया पहला स्थान
AI Image
जल

जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ अव्वल, जल शक्ति अभियान के JSJB चरण 3.0 में देश में हासिल किया पहला स्थान

Environment Pulse
Last updated: September 10, 2026 1:55 pm
Environment Pulse
Published: September 10, 2026
Share
AI Image
SHARE

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। राज्य ने वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के लिए 79,775 संरचनाएं पंजीकृत कीं, जिनमें से 77,719 का निर्माण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू किए गए कोरिया जिले के ‘5 प्रतिशत मॉडल’ और सामुदायिक भागीदारी (जैसे जल सखियों और पंचायतों की सक्रियता) ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। इन प्रयासों के परिणामस्वूप राज्य में जल-संकट वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। जल संरक्षण के क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी की मिसाल पेश करते हुए छत्तीसगढ़ ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। ‘कैच द रेन’ अभियान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में संचालित इस पहल में राज्य ने स्थानीय वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

JSJB Phase 3.0 के तहत छत्तीसगढ़ में 79,775 जल संरक्षण संरचनाएं पंजीकृत की गईं, जिनमें से 77,719 संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं। इस उपलब्धि के साथ राज्य ने पहले दो चरणों में हासिल किए गए दूसरे स्थान के प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए इस बार राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त किया।

पहले चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4.05 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गई थीं। वहीं JSJB 2.0 के दौरान 24 लाख से अधिक संरचनाएं पंजीकृत की गईं, जिनमें 23 लाख से अधिक का निर्माण पूरा हुआ। राज्य के पांच जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।

सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के जल संरक्षण प्रयासों में शीर्ष 10 जिलों में शामिल रहे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में राज्य के सामुदायिक भागीदारी आधारित मॉडल को प्रस्तुत किया। उन्होंने जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम के बजाय जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इस अभियान में किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों और जल मित्रों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है। राज्य में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाए गए नवाचारों ने जल संरक्षण को ग्रामीण समुदायों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में विकसित किया गया ‘5 प्रतिशत मॉडल’ इस अभियान की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।

इसके तहत किसान स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के लिए अलग रखते हैं। इस मॉडल का उद्देश्य बारिश के पानी को तेजी से बहकर निकल जाने से रोकना, उसे स्थानीय स्तर पर जमीन में पहुंचाना और भूजल भंडार को पुनर्भरित करना है। कम लागत और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार की गई ऐसी संरचनाओं को राज्य के विभिन्न हिस्सों में जल सुरक्षा मजबूत करने के प्रभावी उपाय के तौर पर देखा जा रहा है।

राज्य सरकार के अनुसार जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। छत्तीसगढ़ में जल-संकट वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। वहीं पांच गंभीर श्रेणी वाले ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने की उम्मीद जताई गई है। इन प्रयासों में वर्षा जल के बहाव को कम करना, स्थानीय स्तर पर जल के रिसाव और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना तथा जल भंडारण क्षमता विकसित करना प्रमुख लक्ष्य हैं।

मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि देश के अन्य राज्य भी अपने-अपने भूगोल, वर्षा पैटर्न, भूजल स्थिति और स्थानीय जरूरतों के आधार पर अलग-अलग ‘कैच द रेन’ कार्ययोजनाएं तैयार करें। उन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तरीय जल पुरस्कार शुरू करने, जल संरक्षण संरचनाओं की बेहतर मैपिंग और जियो-टैगिंग तथा नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

‘जल संचय जन भागीदारी’ पहल व्यापक जल शक्ति अभियान के तहत संचालित की जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य समुदायों को जल संरक्षण का स्वामित्व देना और कृत्रिम भूजल पुनर्भरण तथा जल भंडारण संरचनाओं के निर्माण के जरिए जल सुरक्षा को मजबूत करना है। कृषि और ग्रामीण परिवारों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में विकेंद्रीकृत और स्थानीय समाधान पर जोर इस अभियान की प्रमुख विशेषता है।

JSJB के विभिन्न चरणों में लगातार मजबूत प्रदर्शन के बाद छत्तीसगढ़ का मॉडल अब सामुदायिक भागीदारी आधारित विकेंद्रीकृत जल संरक्षण के राष्ट्रीय उदाहरण के रूप में उभर रहा है। राज्य का अनुभव यह दर्शाता है कि स्थानीय समुदायों, किसानों और पंचायतों को जल संरक्षण से सीधे जोड़कर वर्षा जल और भूजल दोनों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।

Also Read: घासभूमियों को ‘बंजर भूमि’ की श्रेणी से बाहर करने की मांग, कार्बन और जैव विविधता क्रेडिट से आर्थिक मूल्यांकन पर जोर

You Might Also Like

Climate Change: Farmers Are Already Dealing With Too Much On Their Plates
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में वर्षा का पानी जमा करने की अनूठी पहल
भीषण सूखे से रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा डेन्यूब नदी का जलस्तर, पानी में डूबे द्वितीय विश्व युद्ध के नाज़ी युद्धपोत आए बाहर
आईआईटी-गुवाहाटी ने पानी से हाइड्रोजन बनाने के लिए सस्ता कैटेलिस्ट विकसित किया
COP31 की तैयारियां तेज, अंताल्या सम्मेलन में स्वच्छ ऊर्जा से लेकर जलवायु वित्त तक होंगे प्रमुख मुद्दे
TAGGED:5 Percent Modelcatch the rainChhattisgarhGroundwater RechargeJal Sanchay Jan BhagidariWater conservationWater Security
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
फ्यूचर ग्रीनसस्टेनिबिलिटी

भारत की हरित विरासत: इको-विलेज और सतत भविष्य की राह

Environment Pulse
Environment Pulse
September 11, 2026
अमूर फाल्कन की 6,000 किमी की वापसी उड़ान शुरू, मणिपुर के जंगलों की ओर बढ़े प्रवासी पक्षी
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडस्ट्री में अपनी योग्यता के झंडे गाड़ेंगे हमारे छात्र : इं. पंकज अग्रवाल
गोमती, यमुना और हिंडन के पुनर्जीवन की दिशा में यूपी ने बढ़ाया कदम
Lucknow Zoo: A Model of Eco-Friendly Care for Its Animal Residents

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?