पूर्वी घाट की अराकू घाटी में स्थित पाइनरी ईको-टूरिज्म केंद्र में पर्यटकों के लिए पॉटरी वर्कशॉप, कैंपिंग, एडवेंचर राइड्स और मौसमी बगीचों जैसी नई सुविधाएं शुरू की जा रही हैं। आंध्र प्रदेश वन विभाग की इस पहल का उद्देश्य प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए रोजगार और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है। वर्ष 2025-26 के दौरान यहां 1.79 लाख पर्यटक पहुंचे, जिससे लगभग 1.06 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वर्तमान में यह परियोजना स्थानीय समुदाय के दर्जनों परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित कर रही है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : पूर्वी घाट की खूबसूरत वादियों में स्थित अराकू पाइनरी ईको-टूरिज्म केंद्र ने पर्यटकों के लिए नई सुविधाएं शुरू करने की तैयारी की है। यहां अब पॉटरी वर्कशॉप, कैंपिंग, एडवेंचर राइड्स और मौसमी बगीचों जैसे आकर्षण विकसित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य प्रकृति संरक्षण के साथ स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाना है।
विशाखापत्तनम से लगभग 130 किलोमीटर दूर अंजोडा गांव के पास 27 एकड़ में फैला यह केंद्र आंध्र प्रदेश वन विभाग की पहल है। इसका संचालन शांतिनगर गांव की वन संरक्षण समिति (VSS) करती है। यहां 1970 के दशक में विकसित किए गए चीड़ के बागान को ईको-टूरिज्म केंद्र के रूप में तैयार किया गया है। अराकू पाइनरी में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025-26 में यहां 1.79 लाख पर्यटक पहुंचे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 80 प्रतिशत अधिक है।
इस दौरान केंद्र ने 1.06 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। पिछले छह महीनों में ही 65 हजार से अधिक पर्यटक यहां आए हैं। अराकू पाइनरी की ईको-टूरिज्म पहल के प्रबंधक एम. शेखर ने बताया कि पिछले छह महीनों में पर्यटकों की संख्या 65 हजार के पार पहुंच गई है।
अक्टूबर में प्रतिदिन 5,000 पर्यटकों के आने की उम्मीद है। पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए चीड़ के पेड़ों के बीच पॉटरी व्हील लगाया जा रहा है। अक्टूबर के मध्य से 35 कैंपिंग टेंट उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा लकड़ी के डेक, पेड़ों पर बने प्लेटफॉर्म, मौसमी बगीचे और स्ट्रॉबेरी पैच भी विकसित किए जा रहे हैं।
अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से दो ऑल-टेरेन व्हीकल (ATV) के जरिए एडवेंचर राइड्स शुरू करने की योजना है। पर्यटकों के ठहरने की सुविधा बढ़ाने के लिए मिट्टी के घर बनाने की भी तैयारी है। यहां आने वाले पर्यटक घाटी के मनोरम दृश्यों के साथ चीड़ के जंगलों में सैर, धिमसा जनजातीय नृत्य, अलाव और पारंपरिक आदिवासी व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।
यह स्थान प्री-वेडिंग फोटोशूट और फिल्म शूटिंग के लिए भी लोकप्रिय हो रहा है। इस परियोजना से स्थानीय समुदाय के 49 परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। केंद्र में वन संरक्षण समिति के 15 सदस्य काम करते हैं, जबकि 26 सदस्यीय धिमसा सांस्कृतिक दल को भी रोजगार मिलता है।
इसके अतिरिक्त स्थानीय दुकानों के माध्यम से आठ अन्य लोगों की आजीविका जुड़ी है। इस तरह गांव के 56 परिवारों को विभिन्न रूपों में लाभ मिल रहा है।
अराकू पाइनरी को समुदाय आधारित ईको-टूरिज्म के ऐसे मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वन संरक्षण और स्थानीय आर्थिक सशक्तीकरण को साथ लेकर चलने का प्रयास किया गया है। पर्यटन सीजन में नई सुविधाओं के विस्तार से अराकू घाटी में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ आदिवासी समुदाय की आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
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