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जैव-विविधता

जलवायु परिवर्तन से पौधों पर पड़ता है क्षेत्रीय प्रभाव, संरक्षण के लिए अलग-अलग रणनीतियां जरूरी: अध्ययन

Environment Pulse
Last updated: October 28, 2026 5:16 pm
Environment Pulse
Published: October 28, 2026
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अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय अर्बाना-शैंपेन के शोधकर्ताओं द्वारा ‘Ecography’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन का असर एक ही प्रजाति के पौधों पर अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में भिन्न हो सकता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पौधों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर के बजाय क्षेत्रीय आंकड़ों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अलग-अलग रणनीतियां अपनाना अधिक प्रभावी होगा। अमेरिका के 48 राज्यों और सात जलवायु अनुकूलन क्षेत्रों की 384 प्रजातियों पर किए गए इस शोध में पाया गया कि दक्षिण-पश्चिम अमेरिका के पौधे जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं जबकि मध्य-पश्चिम के उसी प्रजाति के पौधे कम संवेदनशील होते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, पौधों की इस क्षेत्र-विशिष्ट संवेदनशीलता को समझने से सीमित संरक्षण संसाधनों को सही जगह पहुँचाने और उन प्रजातियों की पहचान करने में मदद मिलेगी जिनका आकलन अभी तक नहीं हुआ है। 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : जलवायु परिवर्तन का असर एक ही प्रजाति के पौधों पर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है। अमेरिका में संवहनी पौधों पर किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि किसी पौधे की जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता उसके भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार बदलती है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, पौधों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों के बजाय क्षेत्रीय आंकड़ों पर ध्यान देना अधिक प्रभावी हो सकता है। यह अध्ययन शोध पत्रिका Ecography में प्रकाशित हुआ है। इसका नेतृत्व अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय अर्बाना-शैंपेन की इंटीग्रेटिव बायोलॉजी स्कूल की पीएचडी शोधार्थी वेइकिंग क्यू ने किया। जेसन ब्रीड ने भी शोध में सह-नेतृत्व की भूमिका निभाई।

शोधकर्ताओं ने अमेरिका के 48 राज्यों में पौधों के भौगोलिक वितरण और उनकी जलवायु सहनशीलता से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में सात जलवायु अनुकूलन क्षेत्रों में पाई जाने वाली 384 पौधों की प्रजातियों और सभी 48 राज्यों में मौजूद 22 प्रजातियों को शामिल किया गया।

अध्ययन के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम अमेरिका में पाई जाने वाली कोई पौध प्रजाति जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती है, जबकि उसी प्रजाति के पौधे मध्य-पश्चिम क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम संवेदनशील हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि एक ही क्षेत्र के भीतर किसी प्रजाति की जलवायु संवेदनशीलता में समानता अधिक होती है, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में इसमें अंतर देखने को मिलता है।

शोध में यह भी सामने आया कि अधिक भौगोलिक विविधता वाले क्षेत्रों या हिमनदों के ऐतिहासिक प्रभाव वाले इलाकों में व्यापक क्षेत्र में फैली पौध प्रजातियां जलवायु परिवर्तन के प्रति अपेक्षाकृत कम संवेदनशील हो सकती हैं। ऊंचाई और अक्षांश में विविधता के कारण कुछ पौधों को बदलते तापमान के बीच अनुकूल परिस्थितियां मिल सकती हैं। शोधकर्ताओं ने पौधों की जलवायु संवेदनशीलता के अपने आकलन की तुलना मौजूदा संरक्षण रैंकिंग से भी की।

दोनों के परिणामों में काफी समानता मिली। हालांकि, नई पद्धति से उन प्रजातियों के बारे में भी जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है, जिनकी संरक्षण स्थिति का आकलन अभी तक नहीं किया गया है। शोधार्थी वेइकिंग क्यू के अनुसार, सभी क्षेत्रों में एक जैसी संरक्षण रणनीति प्रभावी नहीं हो सकती। पौधों की क्षेत्र-विशिष्ट संवेदनशीलता को समझने से संरक्षण के सीमित संसाधनों को उन क्षेत्रों और प्रजातियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, जहां उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने इस शोध को समर्थन दिया। इसके निष्कर्ष जलवायु परिवर्तन के दौर में जैव विविधता की रक्षा के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संरक्षण योजनाएं बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

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