विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन के अनुसार, वर्ष 2025 में वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का औसत वैश्विक संकेंद्रण बढ़कर 426.8 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) यानी औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर का 153 प्रतिशत हो गया है, और इसके साथ ही मीथेन व नाइट्रस ऑक्साइड भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। WMO ने चेतावनी दी है कि जीवाश्म ईंधन के जलने, वनों की आग और अल नीनो जैसी घटनाओं के कारण बढ़ रहा यह ग्रीनहाउस गैसों का संकेंद्रण दशकों से लेकर सदियों तक जलवायु को प्रभावित करेगा, जिससे लू, चक्रवात और भारी बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाएं अधिक तीव्र होंगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उत्सर्जित CO₂ का आधा हिस्सा वायुमंडल में बना रहता है और 1,000 वर्ष से अधिक जीवनकाल वाली सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF₆) जैसी गैसें भी चिंता का विषय हैं, जिन्हें तुर्किये के अंताल्या में होने वाले आगामी COP31 जलवायु सम्मेलन से पहले कड़े वैश्विक कदमों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और अन्य प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों का स्तर वर्ष 2025 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि इन गैसों के बढ़ते संकेंद्रण से दीर्घकालिक वैश्विक तापमान वृद्धि का खतरा और गंभीर हो गया है।
इसका प्रभाव दशकों से लेकर सदियों तक बना रह सकता है। WMO की ताजा ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन के अनुसार, 2025 में वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का औसत वैश्विक संकेंद्रण 426.8 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) दर्ज किया गया, जो औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर का 153 प्रतिशत है।
मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड का संकेंद्रण भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। WMO की उप महासचिव को बैरेट ने कहा कि CO₂ का प्रत्येक अतिरिक्त अंश वातावरण में अधिक गर्मी रोकता है। इससे लू, उष्णकटिबंधीय चक्रवात और भारी बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाएं अधिक तीव्र हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्ष रिकॉर्ड में सबसे गर्म रहे हैं और यह रुझान आगे भी जारी रहने की आशंका है।
बुलेटिन के मुताबिक, 1960 के दशक से कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने की वार्षिक दर तीन गुना हो गई है। वर्ष 2011 से 2020 के दौरान इसमें औसतन 2.4 ppm प्रति वर्ष की वृद्धि हुई। वर्ष 2023-24 में 3.5 ppm की असाधारण वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें अल नीनो, सूखे, वनस्पतियों के शुष्क होने और जंगलों में आग की घटनाओं की भूमिका रही। वैज्ञानिकों के अनुसार, 2024 से 2025 के बीच CO₂ के संकेंद्रण में 2.8 ppm की वृद्धि हुई। जीवाश्म ईंधन का जलना इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण बना हुआ है।
उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड का लगभग आधा हिस्सा वायुमंडल में रह जाता है, जबकि शेष को भूमि के पारिस्थितिकी तंत्र और महासागर अवशोषित करते हैं। WMO ने बिजली उत्पादन और वितरण में इस्तेमाल होने वाली सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF₆) गैस को लेकर भी चिंता जताई है। इसका वायुमंडलीय जीवनकाल एक हजार वर्ष से अधिक है और 100 वर्षों की अवधि में इसकी वैश्विक तापवृद्धि क्षमता CO₂ की तुलना में लगभग 24,300 गुना है। एजेंसी ने चेताया कि ऊर्जा व्यवस्था को स्वच्छ बनाने के प्रयासों के साथ ग्रीनहाउस गैसों और अन्य जलवायु-प्रभावकारी तत्वों की निगरानी भी जरूरी है।
यह रिपोर्ट नवंबर में तुर्किये के अंताल्या में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP31 से पहले जारी की गई है, जहां जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्रवाई में बदलने पर चर्चा होगी।
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