By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: जंगलों के ‘सोप्रानो’ गिब्बन के गीतों पर शोध, इंसानी शोर से प्रभावित हो रही सुबह की पुकार
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > जंगलों के ‘सोप्रानो’ गिब्बन के गीतों पर शोध, इंसानी शोर से प्रभावित हो रही सुबह की पुकार
AI Image
जैव-विविधता

जंगलों के ‘सोप्रानो’ गिब्बन के गीतों पर शोध, इंसानी शोर से प्रभावित हो रही सुबह की पुकार

Environment Pulse
Last updated: September 15, 2026 5:05 pm
Environment Pulse
Published: September 15, 2026
Share
AI Image
SHARE

मलेशिया में वैज्ञानिक संकटग्रस्त ‘सफेद हाथ वाले गिब्बन’ (प्राइमेट्स) के मधुर गीतों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि सड़क यातायात और मानवजनित शोर उनकी सुबह की पुकारों को कैसे प्रभावित कर रहा है। शोध से पता चला है कि व्यस्त राजमार्गों के पास रहने वाले गिब्बन कम आवाज निकालते हैं, जिससे उनके सामाजिक संवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ता है। IUCN द्वारा इन्हें संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। वैज्ञानिक इनकी आबादी के आकलन के लिए बायोअकॉस्टिक्स (जैव-ध्वनि विज्ञान) तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क: मलेशिया में वैज्ञानिक संकटग्रस्त सफेद हाथ वाले गिब्बन के जटिल और मधुर गीतों का अध्ययन कर रहे हैं। शोध का उद्देश्य यह समझना है कि सड़क यातायात और मानव गतिविधियों से पैदा होने वाला शोर इन प्राइमेट्स की सुबह की सामूहिक पुकार को किस तरह प्रभावित कर रहा है और इसका उनके अस्तित्व पर क्या असर पड़ सकता है।

सफेद हाथ वाला गिब्बन (Hylobates lar) अपनी तेज, मधुर और शुद्ध स्वर वाली आवाज के लिए जाना जाता है। इसकी पुकार घने वर्षावनों की छतरी के बीच आधे मील से अधिक दूरी तक सुनी जा सकती है। कई बार नर और मादा गिब्बन मिलकर समन्वित युगल गीत गाते हैं।

ये गीत क्षेत्र की रक्षा, जोड़ी के बीच संबंध मजबूत करने और जंगल में दूर-दूर तक संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके ऊंचे और नियंत्रित स्वरों के कारण वैज्ञानिक इन्हें अक्सर जंगल का ‘सोप्रानो’ कहते हैं।

Universiti Sains Malaysia के अंतिम वर्ष के पीएचडी शोधार्थी बेंजामिन गेलिया के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में यातायात और अन्य मानवजनित शोर के प्रभावों का विश्लेषण किया गया। 2023 और 2024 के दौरान तीन अलग-अलग स्थानों पर गिब्बन के सुबह के गीत रिकॉर्ड किए गए।

इनमें एक व्यस्त राजमार्ग के पास, दूसरा लोकप्रिय हाइकिंग ट्रेल के किनारे और तीसरा अपेक्षाकृत शांत समुद्र तटीय क्षेत्र था। अभी तक सहकर्मी समीक्षा से नहीं गुजड़े अध्ययन के परिणामों में शोर और गिब्बन के गायन के बीच स्पष्ट संबंध सामने आया। राजमार्ग के सबसे करीब रहने वाले मम्बांग और वालिनोंग समूह ने केवल 36 प्रतिशत रिकॉर्डिंग में आवाज निकाली।

इसके मुकाबले हाइकिंग ट्रेल वाले समूह ने 84.6 प्रतिशत और समुद्र तट के शांत इलाके वाले समूह ने 71.4 प्रतिशत रिकॉर्डिंग में गीत गाए। एक ही स्थान पर भी पृष्ठभूमि का शोर बढ़ने के साथ गिब्बन के आवाज निकालने की संभावना कम होती गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, गिब्बन के गीत केवल जंगल की पृष्ठभूमि में सुनाई देने वाली आवाज नहीं हैं।

इनमें संवाद, क्षेत्रीय सीमाओं की रक्षा और सामाजिक संबंध बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण कार्य जुड़े हैं। ऐसे में लगातार बढ़ता सड़क, आवासीय और विकास संबंधी शोर इन गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने सफेद हाथ वाले गिब्बन को संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। पिछले 45 वर्षों में इसकी आबादी में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का अनुमान है। आवासों का विनाश, शिकार और पालतू जानवरों के अवैध व्यापार के लिए पकड़ना इसकी संख्या घटने के प्रमुख कारण हैं। मलेशिया में जैव-ध्वनि विज्ञान यानी बायोअकॉस्टिक्स पर शोध भी तेजी से बढ़ रहा है।

वैज्ञानिक अब स्वचालित रिकॉर्डरों के जरिए सुबह के जंगलों में होने वाली गिब्बन की पुकार रिकॉर्ड कर उनकी आबादी और महत्वपूर्ण आवासों का गैर-हस्तक्षेपकारी तरीके से आकलन कर रहे हैं। यह तकनीक उन गिब्बनों का भी पता लगाने में मदद करती है जो घने जंगल की ऊंची छतरी में छिपे रहते हैं।

मलेशिया के जंगलों पर विकास का दबाव लगातार बढ़ने के बीच वैज्ञानिकों का मानना है कि इन ‘वन सोप्रानो’ की ध्वनि-परिस्थितिकी को समझना इनके संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

जंगलों में शोर को नियंत्रित करना और संवेदनशील आवासों की बेहतर सुरक्षा इन अनोखे और संकटग्रस्त प्राइमेट्स के भविष्य के लिए अहम साबित हो सकती है।

Also Read: उपग्रहों ने खोजे अमेरिका में मीथेन के बड़े उत्सर्जन केंद्र, तेजी से बढ़ते वैश्विक तापमान पर बढ़ी चिंता

You Might Also Like

संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों से पिछड़ा भूमि संरक्षण: मंगोलिया में चेतावनी
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मिली नई रफ्तार, पूर्वांचल और मध्यांचल बने निवेश के नए केंद्र
Funds of ₹1 Crore Approved to Promote Eco-Tourism in U.P. 
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में आयोजित हुए ‘ट्री वॉक’ और ‘बर्ड वॉक’ कार्यक्रम
रोजमर्रा की छोटी आदतों से घटाएं अपना कार्बन फुटप्रिंट
TAGGED:Endangered PrimatesMalaysia RainforestsNoise PollutionWhite-Handed GibbonWildlife Acoustics
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: जलवायु अनुकूल और हरित बुनियादी ढांचे के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की बांग्लादेश की अपील – Environment Puls

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
फ़ोटो- PIB
News

नई दिल्ली में ‘टाइगर लैंडस्केप्स’ पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

Environment Pulse
Environment Pulse
September 3, 2026
Natural Disasters Spark Renewed Scrutiny of Hill Station Construction in India
देशभर के जलाशयों में पानी का भंडारण घटा, दक्षिण भारत में सबसे बड़ी गिरावट
भारत में गिद्धों की रिकवरी बेहद धीमी, दो दशक बाद भी संख्या में सुधार का इंतजार
अस्पताल के कचरे के निपटान में बड़ी लापरवाही, UP और राजस्थान समेत 17 राज्यों-UTs को CPCB का अल्टीमेटम

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?