आर्कटिक के उत्तरी इलाकों में स्थायी रूप से जमी जमीन (पर्माफ्रॉस्ट) के तेजी से पिघलने के कारण सड़कों, भवनों, रेलवे और पाइपलाइनों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान का खतरा पैदा हो गया है। एक हालिया आकलन के अनुसार, 2050 तक पूरे आर्कटिक क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को लगभग 261 अरब डॉलर (और उच्च उत्सर्जन में 276 अरब डॉलर तक) का आर्थिक नुकसान हो सकता है। रूस (विशेषकर साइबेरिया) पर इसका सबसे बड़ा असर पड़ने की आशंका है, जहाँ 115 से 169 अरब डॉलर तक के नुकसान का अनुमान है। पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से जमीन की भार वहन क्षमता कम हो जाती है और वह धंसने लगती है, जिससे इमारतों में दरारें और सड़कों-पाइपलाइनों को नुकसान पहुँच रहा है। वैज्ञानिकों ने इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए ऊंची नींव, थर्मोसाइफन और अनुकूलन उपायों में निवेश बढ़ाने तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेजी से कटौती करने की सलाह दी है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: आर्कटिक के उत्तरी इलाकों में पर्माफ्रॉस्ट यानी स्थायी रूप से जमी जमीन के तेजी से पिघलने से सड़क, भवन, रेलवे, रनवे और पाइपलाइन जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं को भारी नुकसान का खतरा बढ़ रहा है।
हालिया शोधों के अनुसार, मध्य शताब्दी तक इस नुकसान की आर्थिक कीमत सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। 2026 के एक आकलन में अनुमान लगाया गया है कि पूरे आर्कटिक क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से 2050 तक बुनियादी ढांचे को करीब 261 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
खासतौर पर साइबेरिया में सोवियत दौर की बहुमंजिला इमारतों के पुनर्निर्माण की ऊंची लागत से आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है। अलास्का में 2025 के एक अध्ययन के मुताबिक, 2050 से 2060 के दशक तक पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से भवनों और सड़कों को 37 से 51 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने उपग्रह तस्वीरों और डीप-लर्निंग तकनीक की मदद से पहले के अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक जोखिमग्रस्त बुनियादी ढांचे की पहचान की है। व्यापक पैन-आर्कटिक विश्लेषण के अनुसार, मध्यम उत्सर्जन परिदृश्य में मध्य शताब्दी तक पर्माफ्रॉस्ट क्षेत्रों की करीब 29 प्रतिशत सड़कें, 23 प्रतिशत रेलवे और 11 प्रतिशत इमारतें गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
इनकी अनुमानित प्रतिस्थापन लागत करीब 182 अरब डॉलर है। उच्च उत्सर्जन परिदृश्य में यह नुकसान बढ़कर लगभग 276 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रूस पर इसका सबसे बड़ा आर्थिक असर पड़ने की आशंका है।
अनुमान के मुताबिक, देश को 115 से 169 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है, क्योंकि उसके उत्तरी हिस्सों में बड़ी संख्या में शहर, पाइपलाइन और परिवहन नेटवर्क जमी हुई जमीन पर निर्मित हैं। पर्माफ्रॉस्ट में मौजूद बर्फ पिघलने पर जमीन की भार वहन क्षमता कम हो जाती है और वह असमान रूप से धंसने लगती है।
इससे इमारतों में दरारें और झुकाव, सड़कों पर असमान सतह, रनवे को नुकसान तथा पाइपलाइनों पर दबाव जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
रूस के नोरिल्स्क और अलास्का के कई इलाकों में इस तरह की समस्याएं पहले से सामने आ रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि नुकसान को सीमित करने के लिए ऊंची नींव, जमीन को ठंडा रखने वाले थर्मोसाइफन, बेहतर निगरानी और अन्य अनुकूलन उपायों में निवेश बढ़ाना जरूरी होगा। साथ ही, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेज कटौती के बिना पर्माफ्रॉस्ट से जुड़ी आर्थिक लागत लगातार बढ़ सकती है।
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