भारत ने वर्ष 2030 के लक्ष्य को पांच साल से अधिक पहले ही पार करते हुए अपनी कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों से हासिल कर लिया है। 31 जुलाई 2026 तक देश की गैर-जीवाश्म क्षमता बढ़कर 300.50 गीगावाट (कुल क्षमता का 54% से अधिक) हो गई है, जिसमें सौर ऊर्जा (164.59 गीगावाट), पवन ऊर्जा (58.14 गीगावाट) और जलविद्युत (57.24 गीगावाट) प्रमुख हैं। हालांकि, क्षमता बढ़ने के बावजूद वास्तविक उत्पादन में कोयले की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है और ग्रिड संतुलन के लिए भंडारण क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। भारत ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक कर ली है।
खास बात यह है कि यह लक्ष्य वर्ष 2030 तक हासिल किया जाना था, लेकिन भारत ने इसे निर्धारित समय से पांच साल से अधिक पहले ही पूरा कर लिया।
जून 2025 तक देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में सौर, पवन, बड़ी जलविद्युत, बायो-पावर और परमाणु ऊर्जा जैसे गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई थी। इसके साथ ही भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) में तय सशर्त लक्ष्य को समय से काफी पहले हासिल कर लिया।
31 जुलाई 2026 तक देश की गैर-जीवाश्म आधारित स्थापित क्षमता बढ़कर 300.50 गीगावाट पहुंच गई, जो करीब 552 गीगावाट की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक है। इसमें सौर ऊर्जा सबसे बड़ा योगदान दे रही है।
देश की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 164.59 गीगावाट है। इसके बाद पवन ऊर्जा की क्षमता 58.14 गीगावाट और जलविद्युत क्षमता 57.24 गीगावाट है। इसके अलावा बायो-पावर और परमाणु ऊर्जा भी स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में योगदान दे रहे हैं। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस उपलब्धि को भारत के ऊर्जा बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि देश अब 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने के व्यापक लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने एक साल में गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की। इसमें सौर ऊर्जा का तेजी से विस्तार प्रमुख रहा। ट्रांसमिशन शुल्क में छूट और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली प्रोत्साहन योजनाओं जैसी नीतियों ने भी स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार स्थापित क्षमता और वास्तविक बिजली उत्पादन में अंतर अभी भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। गैर-जीवाश्म स्रोतों की स्थापित क्षमता तेजी से बढ़ने के बावजूद बिजली उत्पादन में कोयले की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है, खासकर बेसलोड मांग को पूरा करने में।
नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को प्रभावी ढंग से ग्रिड में शामिल करने के लिए सरकार बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क, ग्रिड ढांचे और ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत करने पर जोर दे रही है। बैटरी स्टोरेज और बेहतर ट्रांसमिशन प्रणाली से सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता को संतुलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य समय से पहले हासिल होना भारत के तेज ऊर्जा संक्रमण का संकेत है। यह उपलब्धि जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता के साथ-साथ देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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