भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को तेजी से अपनाने से आर्थिक उत्पादन और रोजगार के क्षेत्र में भारी वृद्धि की संभावना है। ICCT की रिपोर्ट के अनुसार, 2040 तक भारत में ईवी से जुड़ा आर्थिक उत्पादन 620.5 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है तथा मजबूत नीतिगत समर्थन और घरेलू बैटरी विनिर्माण से 2 करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को तेजी से अपनाने से न केवल परिवहन क्षेत्र में बदलाव आने की उम्मीद है, बल्कि इससे विनिर्माण, आर्थिक उत्पादन और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ा वार्षिक आर्थिक उत्पादन 2024 के 12.8 अरब डॉलर से बढ़कर 2040 तक 620.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
यह अनुमान ‘विकसित भारत’ परिदृश्य के अनुरूप है। रिपोर्ट में भारत के लिए 2040 तक ईवी बदलाव के तीन संभावित परिदृश्यों का आकलन किया गया है। ‘बिजनेस ऐज यूजुअल’ परिदृश्य में आर्थिक उत्पादन 172.1 अरब डॉलर, जबकि ‘इंडस्ट्री कमिटमेंट’ परिदृश्य में 506.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
विकसित भारत परिदृश्य में तेज विद्युतीकरण और मजबूत नीतिगत समर्थन को आधार बनाया गया है। रोजगार के मोर्चे पर भी ईवी क्षेत्र बड़ी संभावनाएं दिखा रहा है। विकसित भारत परिदृश्य में ईवी विनिर्माण से प्रत्यक्ष रोजगार 2024 के करीब 90,000 से बढ़कर 2040 तक 43 लाख हो सकते हैं। यदि बैटरी का पूर्ण घरेलू विनिर्माण सुनिश्चित होता है, तो प्रत्यक्ष रोजगार 72 लाख तक पहुंच सकता है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, व्यापार, वित्त और विभिन्न सेवा क्षेत्रों में करीब 1.73 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
इस तरह ईवी से जुड़े कुल रोजगार 2 करोड़ से अधिक हो सकते हैं। रिपोर्ट ने बैटरी विनिर्माण को इस बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक बताया है। 50 प्रतिशत बैटरी स्थानीयकरण की स्थिति में 2040 तक प्रत्यक्ष ईवी रोजगार करीब 58 लाख और 100 प्रतिशत स्थानीयकरण के साथ 72 लाख तक पहुंच सकता है। घरेलू बैटरी उत्पादन बढ़ने से भारत में ईवी आपूर्ति श्रृंखला का अधिक मूल्य भी देश के भीतर रह सकेगा। ‘विकसित भारत’ परिदृश्य में बैटरी की मांग 2024 के लगभग 12 गीगावॉट-घंटे से बढ़कर 2032 तक 312 GWh और 2040 तक 480 GWh होने का अनुमान है।
वर्तमान में भारत में करीब 1.4 GWh की घरेलू बैटरी-सेल विनिर्माण क्षमता है, जबकि घोषित परियोजनाओं के पूरा होने पर यह क्षमता लगभग 128 GWh तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को घरेलू बैटरी उत्पादन के लक्ष्य को पूरा करने और बढ़ती ईवी मांग का लाभ उठाने के लिए उत्पादन क्षमता में और बड़े विस्तार की आवश्यकता होगी।

