केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना और उत्तर प्रदेश की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत कानपुर शहर ई-मोबिलिटी का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। योजना के पहले चरण में कानपुर नगर को 12 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग साइट्स आवंटित की गई हैं, जिससे शहर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। इसके साथ ही, ई-बसों के संचालन और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से कानपुर में वायु प्रदूषण को कम करने और हरित परिवहन को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। उत्तर प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (PM e-DRIVE) योजना में महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में उभर रहा है।
योजना का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना और घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से शुरू की गई इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी।
योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के साथ ई-बस, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक तथा सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पहले चरण में योजना के लिए करीब 10,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाया गया। इससे पहले लागू इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम (EMPS)-2024 को भी पीएम ई-ड्राइव में समाहित किया गया है।
पीएम ई-ड्राइव योजना और उत्तर प्रदेश की इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफैक्चरिंग एंड मोबिलिटी पॉलिसी-2022 के तहत सार्वजनिक ईवी चार्जिंग नेटवर्क के पहले चरण में कानपुर नगर को 12 चार्जिंग साइट आवंटित की गई हैं।
यह प्रमुख शहरों के बीच कानपुर की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी को दर्शाता है। इनमें चार साइट श्रेणी-ए के तहत सरकारी या केंद्रीय सरकारी परिसरों में प्रस्तावित हैं, जबकि आठ श्रेणी-बी की साइटें रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और अन्य अधिक यातायात वाले सरकारी नियंत्रण वाले स्थानों पर विकसित की जानी हैं। वहीं कानपुर देहात के लिए दो चार्जिंग साइट स्वीकृत की गई हैं।
पूरे उत्तर प्रदेश में पहले चरण के तहत 238 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाने की योजना है, जिन पर कुल 714 चार्जर लगाए जाने हैं। इनका फोकस प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर रहेगा। कई स्थानों के लिए सरकारी भूमि का इस्तेमाल करते हुए दीर्घकालिक संचालन मॉडल अपनाया जा रहा है।
कानपुर में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन का आधार पहले से मजबूत हो रहा है। शहर में करीब 100 ई-बसों वाला इलेक्ट्रिक बस डिपो संचालित है। किफायती किराए वाली ये बसें सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के साथ शहरी वायु प्रदूषण को कम करने में भी योगदान दे रही हैं।
कानपुर की सड़कों पर इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मौजूदगी भी लगातार बढ़ी है। ई-रिक्शा समेत इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता इस्तेमाल पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कानपुर जैसे घनी आबादी और औद्योगिक गतिविधियों वाले शहर के लिए ईवी संक्रमण का महत्व केवल परिवहन तक सीमित नहीं है।
आईआईटी कानपुर के 2022 के स्रोत-आकलन अध्ययन में वाहनों को शहर में PM2.5 प्रदूषण के करीब 20 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन के लगभग 85 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार बताया गया था। ऐसे में पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने से परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने और शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। कानपुर में चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग भी बढ़ रहा है।
टाटा पावर ईवी चार्जिंग सॉल्यूशंस और कानपुर नगर निगम के बीच रणनीतिक स्थानों पर अतिरिक्त चार्जिंग पॉइंट विकसित करने की पहल से शहर के ईवी इकोसिस्टम को और गति मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार स्वीकृत कई साइटों पर बुनियादी कार्य आगे बढ़ रहा है। केंद्र की योजना में निर्माताओं को ई-वाउचर और प्रतिपूर्ति के माध्यम से प्रोत्साहन दिया जाता है।
देशभर में इस योजना के तहत 23 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को समर्थन मिलना इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। कानपुर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और सड़कों पर बढ़ती इलेक्ट्रिक वाहनों की मौजूदगी को उत्तर प्रदेश के व्यापक ईवी विजन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, चार्जिंग नेटवर्क और हरित परिवहन को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का प्रमुख केंद्र बनाने पर जोर दे रही है। औद्योगिक आधार, बड़ा शहरी परिवहन नेटवर्क और तेजी से विकसित हो रहे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण कानपुर इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पीएम ई-ड्राइव के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन मिलने से शहर में स्वच्छ परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कानपुर का बढ़ता ईवी नेटवर्क यह संकेत देता है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब केवल भविष्य की अवधारणा नहीं रह गई है। सार्वजनिक परिवहन, निजी वाहनों और चार्जिंग सुविधाओं में समानांतर विस्तार के साथ शहर उत्तर प्रदेश के हरित और टिकाऊ शहरी परिवहन मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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