बर्डलाइफ इंटरनेशनल की ‘स्टेट ऑफ़ द वर्ल्ड्स बर्ड्स’ रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग हर नौ में से एक प्रवासी पक्षी प्रजाति (11 प्रतिशत) पर विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है। इनमें से 45 प्रतिशत प्रजातियों की आबादी घट रही है और समुद्री पक्षी तथा तटीय आर्द्रभूमियों पर निर्भर पक्षी सबसे अधिक प्रभावित हैं। कृषि का विस्तार, जलवायु परिवर्तन, आवासों का नष्ट होना और अवैध शिकार इस संकट के प्रमुख कारण हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : दुनिया की लगभग हर नौ में से एक प्रवासी पक्षी प्रजाति अब विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही है। बर्डलाइफ इंटरनेशनल की नवीनतम State of the World’s Birds रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में पाई जाने वाली करीब 1,843 प्रवासी पक्षी प्रजातियों में से 11 प्रतिशत ऐसी हैं, जो वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए IUCN रेड लिस्ट के मानदंडों को पूरा करती हैं।
केन्या में आयोजित ग्लोबल फ्लाईवेज समिट में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, संकटग्रस्त प्रवासी पक्षियों में 32 प्रजातियां अति गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered), 57 संकटग्रस्त (Endangered) और 111 संवेदनशील (Vulnerable) श्रेणी में हैं। इसके अलावा 111 प्रजातियों को निकट संकटग्रस्त (Near Threatened) माना गया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 45 प्रतिशत प्रवासी पक्षी प्रजातियों की आबादी घट रही है, जबकि केवल 14 प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की जा रही है और 30 प्रतिशत की आबादी अपेक्षाकृत स्थिर है। समुद्री पक्षी और तटीय आर्द्रभूमियों पर निर्भर पक्षी सबसे अधिक प्रभावित समूहों में शामिल हैं।
आर्कटिक टर्न, टर्टल डव और कुक्कू जैसी परिचित प्रजातियों में भी गिरावट की चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। रिपोर्ट में स्लेंडर-बिल्ड कर्ल्यू के 2025 में आधिकारिक तौर पर विलुप्त घोषित किए जाने को भी प्रमुख घटना बताया गया है। यह हाल की सदियों में मुख्यभूमि यूरेशिया और अफ्रीका में दर्ज पहली पुष्ट वैश्विक पक्षी विलुप्ति बताई गई है। पिछले 150 वर्षों में सात प्रवासी पक्षी प्रजातियों के विलुप्त होने की पुष्टि या आशंका जताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, संकट के प्रमुख कारण मुख्यतः मानवीय गतिविधियों से जुड़े हैं। इनमें कृषि का अत्यधिक विस्तार और गहनता, बाहरी आक्रामक प्रजातियां, जलवायु परिवर्तन, अस्थिर शिकार और पक्षियों को पकड़ना, आवासों का नष्ट होना एवं प्रवासी मार्गों में उनका विखंडन तथा प्रदूषण शामिल हैं। प्रवासी पक्षी अपने जीवनचक्र के दौरान प्रजनन, ठहराव और सर्दियों के प्रवास के लिए अलग-अलग महाद्वीपों में फैले अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर निर्भर रहते हैं।
इनमें से किसी एक कड़ी के कमजोर होने से पूरी प्रवासी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। हालांकि रिपोर्ट में संरक्षण के कुछ सकारात्मक उदाहरण भी सामने आए हैं। मिस्र के गिद्ध (Egyptian vulture) सहित कुछ प्रजातियों के लिए कई देशों के समन्वित प्रयासों ने आबादी में गिरावट को रोकने में मदद की है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रवासी मार्गों पर मौजूद सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों और खतरों को एक साथ संबोधित करने वाली रणनीतियां अधिक प्रभावी साबित हो सकती हैं।
बर्डलाइफ इंटरनेशनल ने प्रवासी पक्षियों के प्रमुख आवासों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने और उनकी संख्या में गिरावट के मूल कारणों से निपटने पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में और प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा सके।
Also Read: नीलगिरी के एकल प्रजाति वाले वनों से ब्राजील की जेकीटिन्होन्या घाटी में भूजल स्तर में 4.5 मीटर गिरावट

