By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: पर्यावरण अपराधों पर वैश्विक कार्रवाई की तैयारी, संयुक्त राष्ट्र के तहत पहले अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल पर शुरू होगी बातचीत
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जंगल > पर्यावरण अपराधों पर वैश्विक कार्रवाई की तैयारी, संयुक्त राष्ट्र के तहत पहले अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल पर शुरू होगी बातचीत
AI Image
जंगल

पर्यावरण अपराधों पर वैश्विक कार्रवाई की तैयारी, संयुक्त राष्ट्र के तहत पहले अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल पर शुरू होगी बातचीत

Environment Pulse
Last updated: October 30, 2026 7:42 pm
Environment Pulse
Published: October 30, 2026
Share
AI Image
SHARE

संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सम्मेलन (UNTOC) की 13वीं बैठक में सदस्य देशों ने वन्यजीवों की तस्करी, अवैध वनों की कटाई और कचरे की गैरकानूनी तस्करी जैसे पर्यावरण अपराधों से निपटने के लिए दुनिया के पहले अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का मसौदा तैयार करने पर सहमति जताई है। ब्राजील के नेतृत्व में 12 देशों द्वारा पेश इस प्रस्ताव को 112 में से 83 देशों का समर्थन मिला (हालांकि अमेरिका और जापान ने इसका विरोध किया)। अगले दो वर्षों में विकसित होने वाले इस प्रोटोकॉल का उद्देश्य पर्यावरण अपराधों की जांच, अभियोजन और अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग को मजबूत करना है, क्योंकि एफएटीएफ (FATF) के अनुसार इन अपराधों का वैश्विक कारोबार सालाना 281 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : वन्यजीवों की तस्करी, अवैध वनों की कटाई और कचरे की गैरकानूनी तस्करी जैसे पर्यावरण अपराधों पर लगाम लगाने के लिए दुनिया के देशों ने पहला बड़ा कदम उठाया है। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने पर्यावरण अपराधों से निपटने के लिए दुनिया के पहले अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति जताई है। अगले दो वर्षों में इस प्रोटोकॉल को विकसित करने के लिए बातचीत होगी। यह निर्णय 23 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सम्मेलन (UNTOC) की 13वीं द्विवार्षिक बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद लिया गया।

इसका उद्देश्य पर्यावरण अपराधों की जांच, अभियोजन और न्यायिक कार्रवाई को आसान बनाना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी सहयोग मजबूत करना है। ब्राजील के नेतृत्व में लैटिन अमेरिका के आठ और अफ्रीका के चार देशों सहित कुल 12 देशों ने यह प्रस्ताव पेश किया था। मतदान में शामिल 112 देशों में से 83 ने इसके समर्थन में और 12 ने विरोध में मतदान किया, जबकि 27 देश मतदान से अनुपस्थित रहे। विरोध करने वाले देशों में अमेरिका और जापान भी शामिल थे।

वन्यजीव संरक्षण सोसायटी की पर्यावरण अपराध नीति विशेषज्ञ एलिस पास्कुआलाटो ने इसे पर्यावरण अपराधों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का ऐतिहासिक क्षण बताया। वहीं, ब्रिटेन स्थित संस्था बॉर्न फ्री के नीति प्रमुख मार्क जोन्स ने कहा कि यह निर्णय दर्शाता है कि सरकारें पर्यावरण अपराधों के व्यापक प्रभाव और उनकी आपस में जुड़ी प्रकृति को गंभीरता से समझ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र का मौजूदा UNTOC समझौता वर्ष 2003 में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए स्थापित किया गया था।

इसके तहत मानव तस्करी, प्रवासियों की तस्करी और अवैध हथियारों के उत्पादन एवं व्यापार पर पहले से प्रोटोकॉल मौजूद हैं। प्रस्तावित नया प्रोटोकॉल पर्यावरण अपराधों को भी इसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग के दायरे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के अनुसार, पर्यावरण अपराधों का वैश्विक कारोबार सालाना 281 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इनमें से कई अपराध अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों द्वारा संचालित किए जाते हैं।

प्रस्ताव में कहा गया है कि पर्यावरण अपराधों का प्रभाव केवल प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, सतत विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, आजीविका और प्राकृतिक आवासों पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, विभिन्न देशों में पर्यावरण अपराधों की कानूनी परिभाषाएं और उनके लिए निर्धारित दंड अलग-अलग हैं। कई मामलों में एक देश में अपराध मानी जाने वाली गतिविधि दूसरे देश में उसी रूप में अपराध की श्रेणी में नहीं आती।

प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय समझौते से इन कानूनी विसंगतियों को दूर करने, संदिग्धों के प्रत्यर्पण और अभियोजन में सहयोग बढ़ाने तथा पर्यावरणीय संसाधनों का दोहन करने वाले आपराधिक नेटवर्क पर कार्रवाई को प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्रोटोकॉल के मसौदे पर अगली UNTOC बैठक में दो वर्ष बाद चर्चा की जाएगी।

Also Read: जलवायु कार्रवाई के लिए ‘वन साइज फिट्स ऑल’ दृष्टिकोण नहीं चलेगा: भूपेंद्र यादव

You Might Also Like

भारत में विदेशी प्रजातियों की बढ़ती आमद के बीच प्राइमेट्स के कल्याण और स्वास्थ्य जोखिमों पर चिंता
यूपी में वृक्षारोपण का बना बड़ा रिकार्ड, एक दिन में रोपे गए 35.27 करोड़ से ज्यादा पौधे 
अमूर फाल्कन की 6,000 किमी की वापसी उड़ान शुरू, मणिपुर के जंगलों की ओर बढ़े प्रवासी पक्षी
सिंगापुर में धुंध का असर: ग्रां प्री के दौरान बाहरी मनोरंजन गतिविधियों पर लग सकती हैं पाबंदियां
गुजरात में मैंग्रोव संरक्षण के लिए Mangrove GIS पोर्टल लॉन्च, वैज्ञानिक निगरानी को मिलेगा बढ़ावा
TAGGED:Environmental Crime ProtocolFATFGlobal Environmental ActionIllegal DeforestationInternational Legal CooperationUNTOCWildlife Trafficking
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: प्रदूषण की बढ़ती घटनाओं के बीच Yorkshire Water को मिली सबसे खराब पर्यावरणीय रेटिंग – Environment Pulse

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
गतिविधियांजंगल

भारत में विदेशी प्रजातियों की बढ़ती आमद के बीच प्राइमेट्स के कल्याण और स्वास्थ्य जोखिमों पर चिंता

Environment Pulse
Environment Pulse
September 19, 2026
लद्दाख की जैव-विविधता को बचाने की अनोखी पहल, एक खास फोर्स बनी
3.30 करोड़ बच्चों को आज से पिलाई जाएगी पोलियारोधी दवा
क्या वाकई बदला बाढ़ प्रबंधन का मिजाज? ISRO की सेटेलाइट चेतावनी से लेकर ‘नदी के साथ जीने’ के नए मॉडल का सच
वर्जिनिया में एक नयी तरह की हरित क्रांति

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?