केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुजरात के भुज (कच्छ) में मैंग्रोव संरक्षण और बहाली की निगरानी को मजबूत करने के लिए Mangrove GIS (MGIS) पोर्टल लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य मैंग्रोव क्षेत्रों की वैज्ञानिक निगरानी और डेटा-आधारित फैसलों को प्रभावी बनाना है। इस दौरान ‘मिष्टी’ (MISHTI) योजना के तहत अब तक 27,652 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव बहाली के कार्यों की समीक्षा की गई, जिसका लक्ष्य 2023-27 के बीच 29,250 हेक्टेयर का है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुजरात में मैंग्रोव संरक्षण और बहाली की निगरानी को मजबूत करने के लिए Mangrove GIS (MGIS) Portal लॉन्च किया। पोर्टल का उद्देश्य राज्य में मैंग्रोव क्षेत्रों की वैज्ञानिक निगरानी, डेटा आधारित आकलन और संरक्षण से जुड़े फैसलों को अधिक प्रभावी बनाना है।
भुज, कच्छ में आयोजित मैंग्रोव संरक्षण, बहाली और सतत प्रबंधन कार्यशाला के दौरान पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर यादव ने गुजरात में Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes (MISHTI) के तहत चल रहे संरक्षण कार्यों की भी समीक्षा की। मंत्री के अनुसार, गुजरात ने 2023-27 के लिए निर्धारित 29,250 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 27,652 हेक्टेयर क्षेत्र मंर मैंग्रोव बहाली का काम पूरा किया है।
इसमें पारिस्थितिक रूप से चुनौतीपूर्ण कोरी क्रीक क्षेत्र के 12,450 हेक्टेयर इलाके भी शामिल हैं। MGIS पोर्टल के जरिए मैंग्रोव आवासों से संबंधित सूचनाओं और स्थान आधारित आंकड़ों का उपयोग संरक्षण योजना और निगरानी में किया जा सकेगा। इससे विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संरक्षण रणनीति तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। यादव ने कहा कि मैंग्रोव केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि तटीय जैव विविधता, मत्स्य संसाधनों, तटरेखा संरक्षण, जलवायु लचीलापन और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र हैं। उन्होंने कच्छ की परिस्थितियों के अनुरूप साइट-विशिष्ट बहाली तकनीकों, जैव विविधता संवर्धन, समुद्री शैवाल की खेती और टिकाऊ आजीविका के अवसरों पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कच्छ मैंग्रोव्स पर कॉफी टेबल बुक और मैंग्रोव्स एटलस ऑफ गुजरात भी जारी किए गए। इन पहलों को मैंग्रोव संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
इस अवसर पर गुजरात के पहले बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट के रूप में जनवरी 2025 में घोषित गुनेरी इनलैंड मैंग्रोव क्षेत्र के संरक्षण में योगदान के लिए गुनेरी इनलैंड मैंग्रोव विलेज बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी को सम्मानित किया गया।
कार्यशाला में मैंग्रोव बहाली, वैज्ञानिक प्रबंधन, तकनीक आधारित निगरानी, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर चर्चा हुई।
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