धान की कटाई का मौसम शुरू होने के साथ ही पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं से दिल्ली के वायु प्रदूषण में 13 प्रतिशत से अधिक योगदान की आशंका जताई गई है। मौसम की अनुकूल परिस्थितियों और हवा की दिशा के चलते यह धुआं राष्ट्रीय राजधानी की हवा को और अधिक जहरीला बना सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और अन्य एजेंसियों ने उपग्रह आधारित अलर्ट, ड्रोन और मैदानी टीमों के जरिए निगरानी तेज कर दी है। प्रशासन किसानों से पराली जलाने के बजाय फसल अवशेषों के प्रबंधन और वैकल्पिक उपायों को अपनाने की अपील कर रहा है, साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : धान की कटाई का मौसम शुरू होने के साथ ही पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अनुमान है कि खेतों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं दिल्ली के वायु प्रदूषण में 13 प्रतिशत से अधिक योगदान दे सकता है। अगली फसल की बुवाई के लिए खेतों को तैयार करने के उद्देश्य से किसान फसल अवशेष हटाते हैं।
इस दौरान पराली जलाने से निकलने वाला धुआं राष्ट्रीय राजधानी की हवा को और जहरीला बना सकता है। उपयुक्त हवा की दिशा और मौसम की परिस्थितियों में इसका असर दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर अधिक पड़ने की आशंका है।
स्थिति पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और संबंधित एजेंसियों ने निगरानी तेज कर दी है। इसके तहत उपग्रह आधारित फायर अलर्ट, ड्रोन, कम लागत वाले सेंसर और मैदानी निगरानी दलों की मदद ली जा रही है।
अधिकारियों का जोर फसल अवशेषों के खेत में ही प्रबंधन, उन्हें खेतों से बाहर निकालकर उपयोग में लाने वाली तकनीकों और कृषि अवशेषों से बायोमास तैयार करने पर है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन ने किसानों से पराली जलाने के बजाय उपलब्ध वैकल्पिक उपाय अपनाने की अपील की है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि कटाई का दौर जारी रहने के साथ आने वाले दिनों में प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।
Also Read: अति भीषण चक्रवाती तूफान ‘अरनब’ से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर खतरा, बुधवार को टकराने की आशंका

