By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: RAS और बायोफ्लॉक तकनीक से आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के ब्लू इकोनॉमी विजन को मिलेगी रफ्तार
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > RAS और बायोफ्लॉक तकनीक से आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के ब्लू इकोनॉमी विजन को मिलेगी रफ्तार
AI Image
जलजैव-विविधता

RAS और बायोफ्लॉक तकनीक से आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के ब्लू इकोनॉमी विजन को मिलेगी रफ्तार

Environment Pulse
Last updated: September 10, 2026 1:50 pm
Environment Pulse
Published: September 10, 2026
Share
AI Image
SHARE

भारत का मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बन चुका है, जो करीब 3 करोड़ लोगों को आजीविका देता है। सरकार के निरंतर निवेश (39,272 करोड़ रुपये से अधिक) और आधुनिक तकनीकों के चलते देश का वार्षिक मछली उत्पादन 2013-14 के 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 198 लाख टन हो गया है। ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) के तहत RAS (रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम) और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कम पानी में सालभर उच्च गुणवत्ता वाली मछलियों का उत्पादन, ठंडे पानी में ट्राउट पालन और निर्यात-केंद्रित झींगा उत्पादन को नई रफ्तार मिल रही है। यह तकनीक ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ की ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। भारत का मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है। यह क्षेत्र करीब तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका का सहारा है और उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला में बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराता है।

भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत का योगदान देता है।

भारत जलीय कृषि का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, झींगा उत्पादन एवं निर्यात में दुनिया का सबसे बड़ा देश और कैप्चर फिशरीज में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। मत्स्य क्षेत्र में यह बदलाव केंद्र सरकार की निरंतर नीतिगत पहल और बड़े सार्वजनिक निवेश से संभव हुआ है।

वर्ष 2015 से अब तक सरकार ने मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न प्रमुख योजनाओं और पहलों के तहत 39,272 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को मंजूरी दी या घोषित किया है। इन प्रयासों से उत्पादन प्रणालियों को मजबूत करने, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, नई तकनीकों को अपनाने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और भारतीय मत्स्य उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में मदद मिली है।

इन पहलों का असर उत्पादन में तेज वृद्धि के रूप में सामने आया है। देश का वार्षिक मछली उत्पादन वर्ष 2013-14 के 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 198 लाख टन हो गया। इसी अवधि में अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि का उत्पादन 147 प्रतिशत बढ़कर 61.36 लाख टन से 151.60 लाख टन तक पहुंच गया।

समुद्री खाद्य निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका मूल्य 2013-14 के 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 73,890 करोड़ रुपये हो गया। जलीय कृषि में आधुनिक तकनीकों का समावेश इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। रिकर्सुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक के इस्तेमाल से मछली पालन अधिक नियंत्रित, संसाधन-कुशल और व्यावसायिक रूप से आकर्षक बन रहा है।

RAS में पानी को उपचारित कर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, जबकि बायोफ्लॉक तकनीक लाभकारी सूक्ष्मजीवों की मदद से पानी की गुणवत्ता बनाए रखने और मछलियों की वृद्धि में सहायता करती है। इन तकनीकों की मदद से ऐसे क्षेत्रों में भी मछली पालन संभव हो रहा है, जहां पारंपरिक जलीय कृषि के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं।

RAS प्रणाली में पानी का 90-95 प्रतिशत तक पुनर्चक्रण किया जा सकता है। इससे पानी की खपत कम होती है और शहरी उपभोक्ता केंद्रों तथा निर्यात हब के नजदीक भी मछली पालन इकाइयां स्थापित की जा सकती हैं। इससे जलीय कृषि को अधिक टिकाऊ और सर्कुलर अर्थव्यवस्था आधारित बनाने में मदद मिलती है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत देश में 9,467 RAS इकाइयों और 4,573 बायोफ्लॉक इकाइयों को मंजूरी दी गई है।

इन आधुनिक प्रणालियों से सालभर मछली उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है और पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से आगे जलीय कृषि के विस्तार का मार्ग खुल रहा है। PMMSY के तहत इन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए 4,120 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। यह निवेश देश में आधुनिक, गहन और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य मत्स्य उत्पादन प्रणालियों को विकसित करने की सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।

RAS और बायोफ्लॉक जैसी नियंत्रित उत्पादन प्रणालियां घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उच्च मूल्य वाले समुद्री खाद्य निर्यात को भी मजबूती दे सकती हैं। नियंत्रित वातावरण में उत्पादन से गुणवत्ता में एकरूपता, ट्रेसेबिलिटी और जैव-सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में इन मानकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

मूल्यवर्धित और निर्यात-केंद्रित उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ते हुए आधुनिक तकनीक आधारित जलीय कृषि भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। RAS और बायोफ्लॉक तकनीकों की बहुमुखी उपयोगिता के कारण देश में विशेषीकृत जलीय कृषि क्षेत्रों का भी विस्तार हो रहा है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ठंडे पानी वाले मत्स्य क्लस्टरों में इन तकनीकों का उपयोग प्रीमियम प्रजाति ट्राउट के पालन के लिए किया जा रहा है। वहीं, खारे और अर्ध-खारे पानी वाले क्षेत्रों में निर्यात-केंद्रित झींगा उत्पादन को भी आधुनिक तकनीकों से बढ़ावा मिल रहा है। सजावटी मछली पालन इकाइयों में इनके इस्तेमाल से नए उद्यम और विशिष्ट बाजार विकसित होने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

भारत के मत्स्य क्षेत्र का भविष्य तकनीक, नवाचार और स्थिरता के एकीकरण से तय होगा। RAS और बायोफ्लॉक प्रणालियों को डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन आधारित सेवाओं और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों से जोड़ने से संचालन क्षमता बढ़ाने और उत्पादन लागत घटाने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही झींगा, ट्राउट, सीबास, तिलापिया, मुर्रेल और पंगासियस जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों की ओर जलीय कृषि को विविधीकृत करने से किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मजबूत हो सकती है। कौशल विकास, उद्योग भागीदारी और मजबूत नीतिगत समर्थन के साथ तकनीक आधारित जलीय कृषि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार, समुद्री खाद्य निर्यात और सतत ब्लू इकोनॉमी को नई गति दे सकती है।

RAS और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकें आत्मनिर्भर भारत के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र की भूमिका को और मजबूत करने की क्षमता रखती हैं।

You Might Also Like

गोमती, यमुना और हिंडन के पुनर्जीवन की दिशा में यूपी ने बढ़ाया कदम
सूखा प्रबंधन में राहत नहीं, लचीलापन हो वैश्विक रणनीति का लक्ष्य
India Pushes Fishermen Further Out to Sea in Bid to Tap High-Value Catch
बन्नी के मालधारियों का सदियों पुराना जल ज्ञान, खारे रेगिस्तान में खोज लेते हैं मीठे पानी का स्रोत
3 डिग्री सेल्सियस वैश्विक तापमान वृद्धि पर भारत के 80% से अधिक बुजुर्गों को खतरनाक गर्मी का खतरा: लैंसेट
TAGGED:AquacultureBioflocBlue EconomyFishery SectorPMMSYRAS TechnologySeafood Export
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
जलहवा

COP31 से पहले तुर्की का बड़ा ऐलान: BRIDGE और SURF से बदलेगी जलवायु फंडिंग की तस्वीर

Environment Pulse
Environment Pulse
September 16, 2026
भीषण सूखे से रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा डेन्यूब नदी का जलस्तर, पानी में डूबे द्वितीय विश्व युद्ध के नाज़ी युद्धपोत आए बाहर
भारत में EV क्रांति से 2030 तक पैदा होंगी 40 मिलियन तक नौकरियां
सतकोसिया टाइगर रिजर्व से गांवों के विस्थापन की जांच के लिए ओडिशा सरकार ने बनाई विशेष समिति
भारत का ईवी अभियान खोल सकता है करोड़ों रोजगार के द्वार, बैटरी विनिर्माण होगी अहम कड़ी

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?