By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: 24 घंटे स्वच्छ बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन से भारत के स्टील क्षेत्र को किया जा सकता है डीकार्बोनाइज
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > ऊर्जा > 24 घंटे स्वच्छ बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन से भारत के स्टील क्षेत्र को किया जा सकता है डीकार्बोनाइज
green hydrogen
ऊर्जाफ्यूचर ग्रीनसस्टेनिबिलिटी

24 घंटे स्वच्छ बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन से भारत के स्टील क्षेत्र को किया जा सकता है डीकार्बोनाइज

Environment Pulse
Last updated: August 18, 2026 8:34 pm
Environment Pulse
Published: August 18, 2026
Share
green hydrogen.
SHARE

TransitionZero की रिपोर्ट के अनुसार, चौबीसों घंटे कार्बन-मुक्त बिजली (CFE) और 20% ग्रीन हाइड्रोजन के मिश्रण से भारतीय स्टील क्षेत्र को प्रभावी ढंग से डीकार्बोनाइज (कम कार्बन उत्सर्जन वाला) किया जा सकता है। इस मॉडल को अपनाने से कच्चे स्टील के उत्पादन की लागत में केवल 3% (लगभग $13 प्रति टन) की बढ़ोतरी होगी, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क।भारत के स्टील उद्योग को कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कटौती की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए चौबीसों घंटे कार्बन-मुक्त बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन का संयोजन प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है।

TransitionZero की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस मॉडल को अपनाने से स्टील उत्पादन की लागत में करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ क्षेत्र के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इससे उद्योग की आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता भी घट सकती है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है और वैश्विक स्टील उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत का स्टील उत्पादन बढ़कर करीब 30 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, देश का स्टील उद्योग अभी भी बड़े पैमाने पर कोयले पर निर्भर है। भारतीय स्टील उद्योग से प्रति टन कच्चे स्टील के उत्पादन पर औसतन 2.54 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जो वैश्विक औसत से करीब 35 प्रतिशत अधिक है।

देश के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में स्टील क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है। ऐसे में इस क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करना भारत के जलवायु लक्ष्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुराने कोयला आधारित ब्लास्ट फर्नेस को पूरी तरह बदलना लंबी अवधि की चुनौती है।

हालांकि, सेकेंडरी स्टील उत्पादन में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की काफी गुंजाइश है। इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF), इंडक्शन फर्नेस (IF) और प्राकृतिक गैस आधारित डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (NG-DRI) संयंत्रों के इस्तेमाल के जरिए उत्सर्जन घटाया जा सकता है। TransitionZero ने डीकार्बोनाइजेशन के लिए दो उपायों को एक साथ लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन किया। इनमें पहला उपाय 70 प्रतिशत प्रति घंटे मिलान वाली कार्बन-मुक्त बिजली (CFE) का इस्तेमाल है।

इसका मतलब है कि स्टील संयंत्रों की बिजली की जरूरत को सालाना औसत के बजाय हर घंटे उपलब्ध स्वच्छ बिजली उत्पादन के साथ मिलाया जाए। दूसरा उपाय NG-DRI संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाली गैस में 20 प्रतिशत ग्रीन हाइड्रोजन का मिश्रण करना है। इससे जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल में कमी लाई जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों उपायों को अलग-अलग लागू करने पर सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज जैसी नवीकरणीय ऊर्जा परिसंपत्तियों के बड़े पैमाने पर विस्तार की जरूरत होगी।

इससे ऐसे समय में बिजली का उत्पादन हो सकता है जब उसकी तत्काल जरूरत न हो और बड़ी मात्रा में स्वच्छ बिजली बर्बाद यानी कर्टेल हो सकती है। हालांकि, यदि स्टील संयंत्र और ग्रीन हाइड्रोजन बनाने वाले इलेक्ट्रोलाइजर एक साझा स्वच्छ बिजली खरीद रणनीति के तहत काम करें, तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

भारत के विभिन्न ग्रिड क्षेत्रों के लिए 2030 की स्थिति को ध्यान में रखकर किए गए प्रति घंटे के बिजली मॉडलिंग अध्ययन में पाया गया कि इस तरह की सह-ऑप्टिमाइजेशन रणनीति से बिजली कर्टेलमेंट में 90 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। बची हुई अतिरिक्त स्वच्छ बिजली का इस्तेमाल ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में करने से प्रणाली की दक्षता बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, इससे ग्रीन हाइड्रोजन की लेवलाइज्ड लागत लगभग 290 रुपये प्रति किलोग्राम तक लाई जा सकती है। संयंत्र स्तर पर 70 प्रतिशत प्रति घंटे मिलान वाली कार्बन-मुक्त बिजली और 20 प्रतिशत ग्रीन हाइड्रोजन मिश्रण को अपनाने पर कच्चे स्टील के उत्पादन की लागत में लगभग 13 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी हो सकती है। 450 से 510 डॉलर प्रति टन के मौजूदा उत्पादन लागत आधार की तुलना में यह करीब 3 प्रतिशत की अतिरिक्त लागत है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि अपेक्षाकृत मामूली लागत बढ़ोतरी के बदले स्टील निर्माता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष उत्सर्जन का बड़ा हिस्सा खत्म कर सकते हैं। साथ ही, महंगी आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करने और भविष्य में अधिक स्वच्छ एवं टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने में भी मदद मिल सकती है।

TransitionZero की हेवी इंडस्ट्री लीड वेरिटी क्रेन के मुताबिक, भारत के स्टील क्षेत्र के लिए 43 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य उसकी वास्तविक क्षमता को पूरी तरह नहीं दर्शाता। चौबीसों घंटे कार्बन-मुक्त बिजली अपनाने से घरेलू कोयले की जगह स्वच्छ बिजली लाई जा सकती है, जबकि ग्रीन हाइड्रोजन का मिश्रण महंगी आयातित गैस पर निर्भरता घटा सकता है।

उनके अनुसार, कई प्रमुख स्टील कंपनियां इन दोनों विकल्पों का अलग-अलग स्तर पर परीक्षण कर रही हैं, लेकिन इन्हें एकीकृत तरीके से लागू करने की योजना बनाना ही ग्रीन स्टील की आर्थिक क्षमता को पूरी तरह हासिल करने की कुंजी हो सकती है।

Also Read: आर्थिक संवाद से आगे बढ़कर पर्यावरणीय शासन पर फोकस बढ़ा रहा BRICS: भारत

You Might Also Like

इंडिया एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026: स्वच्छ और तकनीक आधारित ऊर्जा भविष्य का रोडमैप सामने आया
How Music Has Given the Climate Crisis a Voice
यूरोप की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना को मिला अंतिम परमिट
महादेव की नगरी में स्वच्छता का नया अध्याय
Green Careers Are Booming: Here’s How to Get In
TAGGED:24/7 Carbon Free Electricity Green Hydrogen SteelElectric Arc Furnace NG-DRI Green Steel IndiaIndia Steel Decarbonization TransitionZero ReportIndian Steel Industry Carbon Emissions Reduction
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
हवा

दिल्ली परमानेंट विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान घोषित

Environment Pulse
Environment Pulse
July 3, 2026
ऑर्गेनिक अंडों का कार्बन फुटप्रिंट अधिक, पिंजरे में पाली गई मुर्गियों के अंडों से जलवायु पर पड़ता है कम असर: अध्ययन
हरित वित्त और डिजिटल नवाचार से टिकाऊ आर्थिक भविष्य की ओर बढ़ता देश
आईआईटी-गुवाहाटी ने पानी से हाइड्रोजन बनाने के लिए सस्ता कैटेलिस्ट विकसित किया
African Nations Step Up Investment in the Circular Economy

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?