इंडोनेशिया के अत्यधिक सक्रिय अनक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के पास हाल ही में हुई लंबी ज्वालामुखीय गतिविधि के कारण समुद्र से दो नई भू-आकृतियां उभरी हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के उपग्रह चित्रों से पता चला है कि ये दोनों संरचनाएं ज्वालामुखी के क्रेटर की सीध में उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित हैं। इस विस्फोट के दौरान निकले तरल मैग्मा और लावा प्रवाह से मुख्य द्वीप के क्षेत्रफल में भी लगभग 32.8 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। हालांकि सोशल मीडिया पर इन्हें नया ज्वालामुखी या “क्राकाटोआ की अगली पीढ़ी” कहा जा रहा है, लेकिन अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ये केवल राख, चट्टान और लावा के हालिया जमाव से बनी संरचनाएं हैं, जिन्हें समुद्री लहरें भविष्य में नष्ट भी कर सकती हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : इंडोनेशिया के अत्यधिक सक्रिय अनक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के आसपास दो नई भू-आकृतियां सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में हुई लंबे समय तक चली ज्वालामुखीय गतिविधि के बाद ये संरचनाएं समुद्र में उभरी हैं।
इसी गतिविधि के दौरान ज्वालामुखी के मुख्य द्वीप का क्षेत्रफल भी करीब 32.8 हेक्टेयर बढ़ गया। इंडोनेशिया की भू-विज्ञान एजेंसी (Badan Geologi) ने बताया कि यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के Sentinel उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों की तुलना में इन नई संरचनाओं का पता चला।
8 अगस्त तथा 15 से 23 सितंबर के बीच ली गई तस्वीरों के विश्लेषण से सामने आया कि एक संरचना अनक क्राकाटोआ के तट से करीब 760 मीटर उत्तर-पश्चिम में, जबकि दूसरी करीब 495 मीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। दोनों संरचनाएं ज्वालामुखी के क्रेटर से गुजरने वाली उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा वाली एक सीध में दिखाई देती हैं। एजेंसी के मुताबिक यह बदलाव 4 सितंबर की देर रात शुरू हुए और करीब 25 घंटे तक चले विस्फोट से जुड़ा है, जो 6 सितंबर की शुरुआत में समाप्त हुआ।
इस दौरान अपेक्षाकृत तरल मैग्मा से लावा प्रवाह और पाइरोक्लास्टिक पदार्थ निकले, जो मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैले। इससे अनक क्राकाटोआ के भू-क्षेत्र में 32.8 हेक्टेयर की वृद्धि हुई। प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, कम चिपचिपाहट वाला मैग्मा उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में फैली किसी दरार या उद्घाटन के जरिए सतह तक पहुंचा होगा।
इसके बाद ज्वालामुखीय पदार्थ समुद्र के भीतर जमा होकर टीले जैसी संरचनाओं में बदल गए। हालांकि अधिकारियों ने कहा है कि यह तय करने के लिए और अधिक क्षेत्रीय जांच तथा नई उपग्रह तस्वीरों की आवश्यकता है कि ये वास्तव में नए विस्फोट केंद्र हैं या हालिया ज्वालामुखीय जमाव। अनक क्राकाटोआ, जिसका अर्थ है ‘क्राकाटोआ का बच्चा’, 1883 के विनाशकारी क्राकाटोआ विस्फोट से बने कैल्डेरा क्षेत्र से समुद्र के ऊपर उभरा था।
वर्तमान द्वीप का निर्माण लगभग 1930 के आसपास हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार नई संरचनाएं करीब एक सदी में पहली बार इस कैल्डेरा क्षेत्र में इस तरह की नई भू-आकृतियों के रूप में दर्ज की गई हैं। हालांकि समुद्री लहरें और ज्वार इन्हें दोबारा नष्ट भी कर सकते हैं। सितंबर की ज्वालामुखीय गतिविधि के दौरान राख के गुबार जावा की ओर बढ़े थे।
इसके चलते कई हवाई अड्डों पर अस्थायी रूप से परिचालन प्रभावित हुआ और 3.4 लाख से अधिक यात्रियों को परेशानी हुई। करीब 3,000 उड़ानें रद्द, विलंबित या डायवर्ट की गईं। इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है और यहां करीब 130 सक्रिय ज्वालामुखी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्वालामुखी के आकार और भू-आकृति में इस तरह के बदलाव उसके प्राकृतिक विकास चक्र का हिस्सा हो सकते हैं।
सोशल मीडिया पर नई संरचनाओं को ‘क्राकाटोआ की अगली पीढ़ी’ या ‘ग्रैंडचाइल्ड ऑफ क्राकाटोआ’ कहे जाने की अटकलें लगाई गई हैं, लेकिन अधिकारियों और स्वतंत्र विशेषज्ञों ने किसी नए स्वतंत्र ज्वालामुखी के बनने की बात को खारिज किया है। उनके अनुसार फिलहाल ये संरचनाएं राख, चट्टान और लावा के हालिया जमाव से बनी प्रतीत होती हैं।
ज्वालामुखी क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने लोगों और समुद्री यात्रियों से प्रतिबंधित क्षेत्र से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। वैज्ञानिक नई भू-आकृतियों की स्थिरता और भविष्य के विकास का आकलन करने के लिए अतिरिक्त आंकड़े जुटा रहे हैं।
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