नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में गोमती, यमुना और हिंडन नदियों के पुनर्जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू की गई हैं। लखनऊ में गोमती नदी के लिए 241 करोड़ रुपये की लागत से 39 एमएलडी का एसटीपी बनाया गया है और ड्रोन सर्वे से 45 नालों की पहचान की गई है। इसके अलावा, शामली (कैराना) में यमुना के लिए 15 एमएलडी का एसटीपी और विश्व बैंक के सहयोग से सहारनपुर में हिंडन की सहायक नदियों के संरक्षण के लिए 344 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में नदियों के पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की गई हैं। गोमती, यमुना और हिंडन नदी तंत्र में सीवेज का प्रवाह रोकने, उपचार क्षमता बढ़ाने और जल गुणवत्ता में सुधार के लिए बड़े पैमाने पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और ड्रेन इंटरसेप्शन परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
लखनऊ में गोमती नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए 39 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण 241 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है।
नमामि गंगे मिशन के तहत निर्मित यह संयंत्र नवंबर 2024 में संचालन में आया था। इसमें आधुनिक सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर (एसबीआर) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
संयंत्र का उद्देश्य शहर के प्रमुख नालों से निकलने वाले सीवेज को रोककर उसका उपचार करना है, ताकि बिना उपचारित अपशिष्ट को गोमती में जाने से रोका जा सके।
यह परियोजना गोमती नदी प्रदूषण नियंत्रण की व्यापक योजना का हिस्सा है। वर्ष 2026 में नदी में गिरने वाले नालों की पहचान और निगरानी को भी तेज किया गया है। ड्रोन सर्वेक्षण के दौरान गोमती में गिरने वाले 45 नालों की पहचान की गई है।
इनके सीवेज को उपचार संयंत्रों तक पहुंचाने के लिए एकीकृत कार्ययोजना तैयार की गई है। बसंत कुंज, वजीरगंज, जियामऊ और नीलमथा में नए एसटीपी प्रस्तावित किए गए हैं, जबकि मौजूदा संयंत्रों की क्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए भी कार्य चल रहे हैं। यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए शामली जिले के कैराना में 78 करोड़ रुपये की लागत से 15 एमएलडी क्षमता का एसटीपी तैयार किया गया है।
डिजाइन-बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीओटी) मॉडल के तहत विकसित इस परियोजना में सीवेज के इंटरसेप्शन और डायवर्जन का काम भी शामिल है। संयंत्र के संचालन से स्थानीय सीवेज को यमुना में जाने से रोकने में मदद मिल रही है।
यमुना गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है, इसलिए इसमें प्रदूषण भार कम करने का प्रभाव आगे नदी तंत्र पर भी पड़ता है। सहारनपुर में हिंडन नदी की प्रमुख सहायक नदियों पांवधोई और ढमोला के संरक्षण के लिए भी व्यापक पहल शुरू की गई है।
विश्व बैंक के सहयोग से करीब 344 करोड़ रुपये के संरक्षण ढांचे के तहत प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और नदी बेसिन स्तर पर संरक्षण उपायों को लागू किया जाएगा।
नमामि गंगे के दूसरे चरण के तहत इस संबंध में त्रिपक्षीय समझौता भी किया गया है। उत्तर प्रदेश की इन पहलों का उद्देश्य केवल नए एसटीपी स्थापित करना नहीं, बल्कि नालों की पहचान कर उन्हें उपचार संयंत्रों से जोड़ना, सीवेज को स्रोत पर उपचारित करना और मौजूदा सीवर नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना है।
इससे गोमती, यमुना और हिंडन नदी तंत्र में प्रदूषण भार कम करने और जलीय पारिस्थितिकी को बहाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, परियोजनाओं के निर्माण के साथ-साथ उनका नियमित संचालन और रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शेष नालों को टैप करने, उपचार संयंत्रों की निरंतर निगरानी और
स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाने पर लगातार ध्यान देना होगा। इन प्रयासों से नदी जल की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार, जैव विविधता के संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
ये परियोजनाएं स्वच्छ गंगा और उसकी सहायक नदियों के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ उत्तर प्रदेश में टिकाऊ जल प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हैं।
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