भारतीय वन सर्वेक्षण की ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) 2023’ के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच उत्तर प्रदेश के हरित क्षेत्र में 559.19 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है, जिससे राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा (छत्तीसगढ़ पहले स्थान पर)। इस दौरान यूपी का कुल हरित क्षेत्र 23,996.72 वर्ग किलोमीटर (9.96%) हो गया है, जिसमें वनों के साथ-साथ वृक्ष आवरण का भी बड़ा योगदान है। सरकार के व्यापक पौधरोपण अभियानों के चलते झांसी और अमरोहा जैसे जिलों में बेहतरीन वृद्धि दर्ज की गई है, और राज्य का लक्ष्य 2030 तक हरित क्षेत्र को 15 प्रतिशत तक पहुँचाना है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: उत्तर प्रदेश ने देश में वन एवं वृक्ष आवरण बढ़ाने के मामले में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) की ओर से जारी इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) 2023 के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच उत्तर प्रदेश के कुल हरित क्षेत्र में 559.19 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई।
इस मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा। छत्तीसगढ़ 683.62 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि ओडिशा 558.57 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वन और वृक्ष आवरण को मिलाकर कुल हरित क्षेत्र 2021 में 23,437.53 वर्ग किलोमीटर था, जो 2023 में बढ़कर 23,996.72 वर्ग किलोमीटर हो गया। यह राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 9.73 प्रतिशत से बढ़कर 9.96 प्रतिशत हो गया है।
केवल वन आवरण की बात करें तो इसमें 118.43 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। वन आवरण 14,927.37 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 15,045.80 वर्ग किलोमीटर हो गया, जबकि भौगोलिक क्षेत्र में इसकी हिस्सेदारी 6.20 प्रतिशत से बढ़कर 6.24 प्रतिशत हुई।
वन क्षेत्रों के बाहर मौजूद वृक्ष आवरण में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। 2021 में 8,510.16 वर्ग किलोमीटर के मुकाबले 2023 में यह बढ़कर 8,950.92 वर्ग किलोमीटर हो गया। यानी वृक्ष आवरण में करीब 440.76 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई और इसकी हिस्सेदारी 3.53 प्रतिशत से बढ़कर 3.72 प्रतिशत हो गई।
559.19 वर्ग किलोमीटर की कुल वृद्धि करीब 1.38 लाख एकड़ क्षेत्र के बराबर है। जिलों की बात करें तो झांसी में हरित क्षेत्र में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो करीब 8,597 एकड़ रही। इसके बाद अमरोहा में लगभग 7,769 एकड़ की वृद्धि हुई।
राज्य के आकांक्षी जिलों में सोनभद्र कुल हरित क्षेत्र के मामले में आगे बना हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर 2021 से 2023 के बीच भारत के वन एवं वृक्ष आवरण में कुल 1,445.81 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई। इसके साथ देश का कुल वन एवं वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किलोमीटर हो गया, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 प्रतिशत है।
इस अवधि में केवल वन आवरण में 156.41 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। राज्य सरकार और वन विभाग ने उत्तर प्रदेश में हरित क्षेत्र में हुई वृद्धि का श्रेय बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियानों, कृषि वानिकी को बढ़ावा देने, शहरी हरित क्षेत्रों के विस्तार और सामुदायिक भागीदारी को दिया है।
वर्ष 2017 से राज्य में विभिन्न अभियानों के तहत 240 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाने का दावा किया गया है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान से प्रेरित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान भी शामिल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश तेजी से ‘ग्रीन उत्तर प्रदेश’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने भी कहा कि विभिन्न विभागों और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से हरित क्षेत्र में ठोस सुधार दिखाई दे रहा है। राज्य का लक्ष्य आने वाले आकलनों में देश में शीर्ष स्थान हासिल करना है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार हरित क्षेत्र में वृद्धि को टिकाऊ बनाने के लिए केवल पौधरोपण की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है।
लगाए गए पौधों की जीवित रहने की दर बढ़ाना, मौजूदा प्राकृतिक वनों की सुरक्षा करना और वन क्षेत्रों के बाहर पेड़ों की संख्या बढ़ाने पर लगातार ध्यान देना जरूरी होगा। कृषि भूमि के बड़े हिस्से वाले उत्तर प्रदेश के लिए खेतों, सड़कों, नहरों और शहरी क्षेत्रों में वृक्ष आवरण बढ़ाना विशेष महत्व रखता है। राज्य ने वर्ष 2030 तक अपने कुल हरित क्षेत्र को भौगोलिक क्षेत्रफल के 15 प्रतिशत तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
ISFR 2023 के आंकड़े संकेत देते हैं कि निरंतर नीतिगत समर्थन, बड़े पैमाने पर जनभागीदारी और वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से घनी आबादी और व्यापक कृषि क्षेत्र वाले उत्तर प्रदेश में भी हरित आवरण में उल्लेखनीय सुधार हासिल किया जा सकता है।
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