केंद्रीय जल आयोग (CWC) की 27 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रमुख जलाशयों में कुल लाइव स्टोरेज घटकर 125.299 BCM रह गया है, जो कुल क्षमता का 67.83 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 153.083 BCM (लगभग 82% से अधिक) था, यानी एक साल में करीब 27.8 BCM की कमी आई है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। देशभर के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति इस वर्ष चिंता बढ़ाने लगी है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की 27 अगस्त 2026 की जलाशय भंडारण बुलेटिन रिपोर्ट के अनुसार, निगरानी में शामिल जलाशयों में उपलब्ध कुल लाइव स्टोरेज 125.299 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) रह गया है।
यह इन जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का 67.83 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में इन जलाशयों में 153.083 BCM लाइव स्टोरेज उपलब्ध था। इस तरह एक वर्ष में उपलब्ध जल भंडारण में करीब 27.8 BCM की कमी दर्ज की गई है।
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो दक्षिण भारत में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक दिखाई देती है, जहां पिछले वर्ष की तुलना में भंडारण में भारी गिरावट आई है।
दक्षिणी क्षेत्र के जलाशयों में इस समय कुल 32.039 BCM लाइव स्टोरेज उपलब्ध है, जो उनकी कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का केवल 57.34 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 85.58 प्रतिशत था। यानी दक्षिणी क्षेत्र के जलाशयों में भंडारण स्तर में 28 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
दक्षिण भारत में जलाशयों का स्तर कृषि, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में मौजूदा गिरावट का असर आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों की जल उपलब्धता पर पड़ सकता है, खासकर यदि जलाशयों में पर्याप्त आवक नहीं होती है। उत्तरी क्षेत्र के जलाशयों में कुल 11.933 BCM पानी उपलब्ध है, जो उनकी कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का 60.16 प्रतिशत है।
पिछले वर्ष इसी अवधि में इन जलाशयों में भंडारण क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत पानी मौजूद था। इस लिहाज से उत्तर भारत में भी जल भंडारण की स्थिति पिछले साल के मुकाबले काफी कमजोर हुई है। आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल की मांग को देखते हुए जलाशयों में पानी की उपलब्धता पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
पूर्वी क्षेत्र के जलाशयों में कुल 13.519 BCM लाइव स्टोरेज दर्ज किया गया है। यह इन जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का 61.86 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह स्तर 66.79 प्रतिशत था। हालांकि पूर्वी क्षेत्र में गिरावट दक्षिण और उत्तर की तुलना में अपेक्षाकृत कम है, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले यहां भी जल भंडारण में कमी स्पष्ट है। पश्चिमी क्षेत्र में जलाशयों की स्थिति अन्य कई क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है।
यहां कुल 30.997 BCM लाइव स्टोरेज उपलब्ध है, जो कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का 80.39 प्रतिशत है। हालांकि पिछले वर्ष इसी अवधि में पश्चिमी क्षेत्र के जलाशयों में भंडारण 86.72 प्रतिशत था। यानी इस क्षेत्र में भी सालाना आधार पर जल भंडारण में कमी दर्ज हुई है, हालांकि मौजूदा स्तर अभी भी 80 प्रतिशत से अधिक है।
मध्य क्षेत्र के जलाशयों में कुल 36.811 BCM लाइव स्टोरेज उपलब्ध है, जो कुल क्षमता का 75.76 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह स्तर 80.75 प्रतिशत था। मध्य क्षेत्र में गिरावट दक्षिण भारत की तुलना में कम है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि यहां भी पिछले वर्ष की तुलना में जल भंडारण कमजोर हुआ है। देश के प्रमुख जलाशय सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं।
जलाशयों में भंडारण कम होने का सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है, विशेषकर उन इलाकों में जहां सिंचाई के लिए सतही जल स्रोतों पर अधिक निर्भरता है। कम जल भंडारण बिजली उत्पादन के लिए भी चुनौती बन सकता है। जलविद्युत परियोजनाओं में उपलब्ध पानी की मात्रा बिजली उत्पादन की क्षमता को प्रभावित करती है।
इसके अलावा शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की मांग पूरी करने के लिए भी जलाशयों का पर्याप्त स्तर महत्वपूर्ण है। CWC के ताजा आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसूनी बारिश और जल उपलब्धता की स्थिति में क्षेत्रीय अंतर देखने को मिल रहा है। दक्षिणी क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में जलाशयों के भंडारण में तेज गिरावट विशेष चिंता का विषय है।
कुल मिलाकर, 27 अगस्त तक के आंकड़े बताते हैं कि देश के प्रमुख जलाशयों में पानी की स्थिति पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कमजोर है। अब आने वाले हफ्तों में बारिश, जलाशयों में पानी की आवक और क्षेत्रीय मांग यह तय करेगी कि मौजूदा कमी कितनी गंभीर चुनौती में बदलती है।

