विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ‘State of Global Water Resources 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक जल चक्र अत्यधिक अस्थिर हो गया है, जहाँ 2025 में नदी प्रवाह पिछले 35 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और दुनिया के 19 प्रमुख ग्लेशियर क्षेत्रों में लगातार चौथे वर्ष भारी बर्फ नुकसान (408 गीगाटन) दर्ज किया गया। धरती के जल ‘बचत खाते’ यानी भूजल और स्थलीय भंडारों में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे एशिया और अफ्रीका में जल-संबंधी चरम घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। WMO ने सरकारों को चेतावनी दी है कि वे पुरानी जल प्रणालियों पर निर्भर रहने के बजाय बदलती वास्तविकताओं के अनुसार अपनी जल प्रबंधन रणनीतियों, निगरानी प्रणालियों और डेटा-साझाकरण को तुरंत मजबूत करें।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: दुनिया तेजी से ऐसी जल परिस्थितियों की ओर बढ़ रही है, जहां असामान्य जल उपलब्धता सामान्य स्थिति बनती जा रही है। नदियों के प्रवाह, भूजल और ग्लेशियरों में लगातार हो रहे बदलाव इस बात के संकेत हैं कि वैश्विक जल चक्र पहले की तुलना में अधिक अस्थिर और अप्रत्याशित हो गया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा State of Global Water Resources 2025 रिपोर्ट ने देशों को बदलती जल परिस्थितियों के अनुरूप अपनी तैयारियां मजबूत करने की जरूरत बताई है।
WMO के अनुसार 2025 में वैश्विक स्तर पर नदी प्रवाह पिछले 35 वर्षों के सबसे कम स्तरों में रहा। दुनिया के करीब 36 प्रतिशत नदी बेसिन क्षेत्र में सामान्य से कम जल प्रवाह दर्ज किया गया। लगातार सातवें वर्ष सामान्य प्रवाह वाली नदियां स्पष्ट बहुमत में नहीं रहीं।
WMO महासचिव Celeste Saulo ने कहा कि यह केवल एक खराब वर्ष का मामला नहीं है, बल्कि एक दशक से अधिक समय से उभर रहा स्थायी संकेत है। उन्होंने कहा कि जल से जुड़ी चरम घटनाएं लगातार समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रही हैं।
रिपोर्ट में भूजल, ग्लेशियर, बर्फ, मिट्टी की नमी और झीलों जैसे स्थलीय जल भंडारों को धरती का ‘बचत खाता’ बताया गया है। ये भंडार सूखे और कम बारिश के दौर में पानी की उपलब्धता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन WMO के अनुसार 2014-16 के आसपास से स्थलीय जल भंडारण में गिरावट देखी जा रही है। वर्ष 2025 में निगरानी किए गए करीब दो-तिहाई भूजल कुएं अपनी सामान्य स्थिति से बाहर रहे और कई क्षेत्रों में स्थिति सुधार के बजाय कमी की ओर बढ़ी।
हालांकि कुछ क्षेत्रों में सुधार के संकेत भी मिले। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में कई वर्षों के गंभीर जल घाटे के बाद जल भंडारण में आंशिक सुधार हुआ, जबकि मध्य और दक्षिणी अफ्रीका की कई प्रमुख झीलों में जल स्तर सामान्य से काफी अधिक रहा।
ग्लेशियरों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सभी 19 प्रमुख ग्लेशियर क्षेत्रों में लगातार चौथे वर्ष बर्फ का नुकसान दर्ज किया गया। 2025 में ग्लेशियरों से लगभग 408 गीगाटन बर्फ कम हुई, जबकि 2023 से 2025 के बीच कुल नुकसान करीब 1,400 गीगाटन रहा। यह मात्रा दुनिया द्वारा एक वर्ष में निकाले जाने वाले कुल ताजे पानी के लगभग एक-तिहाई के बराबर है।
WMO के हाइड्रोलॉजी और क्रायोस्फियर विभाग के निदेशक Wayne Jenkinson ने चेताया कि मध्य एशिया, आइसलैंड, रूसी आर्कटिक तथा पश्चिमी कनाडा और अमेरिका में ग्लेशियरों के लिए 2025 सबसे खराब वर्षों में शामिल रहा।
कुछ छोटे ग्लेशियर वाले क्षेत्रों में ‘पीक वाटर’ की स्थिति आने की आशंका है। इसका अर्थ है कि एक सीमा के बाद ग्लेशियरों से हर वर्ष मिलने वाला पिघला पानी घटने लगेगा, क्योंकि पिघलने के लिए बर्फ ही कम बची होगी। इसका सीधा असर उन निचले इलाकों पर पड़ेगा जो गर्म और शुष्क गर्मियों में ग्लेशियरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं।
WMO विशेषज्ञों के अनुसार कुछ ग्लेशियरों का नुकसान अब अपरिहार्य हो सकता है, लेकिन उनका पूरी तरह समाप्त होना अभी तय नहीं है। उत्सर्जन में कमी लाकर भविष्य में होने वाले नुकसान की मात्रा को सीमित किया जा सकता है।
WMO ने सरकारों से जल प्रबंधन की योजनाओं में ‘बदलती आधार रेखा’ को शामिल करने की अपील की है। संगठन के अनुसार तीन दशक पहले जैसी जल परिस्थितियां आज मौजूद नहीं हैं और भविष्य की योजना बनाते समय पुराने मौसम एवं जल आंकड़ों को वर्तमान वास्तविकता का सीधा प्रतिनिधि मानना जोखिम भरा हो सकता है।
पिछले पांच वर्षों में एशिया और अफ्रीका में दुनिया की कम से कम आधी दर्ज जल-संबंधी चरम घटनाएं हुईं और इनसे होने वाली मौतों में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इन दोनों क्षेत्रों का रहा। इसके बावजूद इन क्षेत्रों में जल संबंधी निगरानी और आंकड़ों की उपलब्धता में बड़ी कमियां बनी हुई हैं।
WMO की रिपोर्ट के अनुसार जल निगरानी में पिछले पांच वर्षों में सुधार हुआ है। अब 52 देश 3,100 से अधिक नदी प्रवाह निगरानी केंद्रों से आंकड़े उपलब्ध करा रहे हैं। पहली रिपोर्ट के समय केवल सात देश और 14 स्टेशन इस तरह का डेटा उपलब्ध कराते थे।
WMO ने कहा कि बदलती जल परिस्थितियों से निपटने के लिए बेहतर निगरानी, देशों के बीच आंकड़ों का साझा उपयोग और प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणालियां बेहद जरूरी होंगी। हाल में चीन-नेपाल क्षेत्र में हुई एक जटिल आपदा ने भी दिखाया कि ग्लेशियर और चट्टान से जुड़ी संयुक्त घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना कितना कठिन हो सकता है।
WMO महासचिव Celeste Saulo ने जोर दिया कि पानी सीमाओं का पालन नहीं करता। इसलिए बदलते जल संकट से निपटने के लिए देशों के बीच साझा आंकड़े, समान मानक और साझा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां विकसित करना जरूरी है।
Also Read: उत्तराखंड में बढ़ेंगी गर्म रातें, पहाड़ों की ठंडी जलवायु पर मंडरा रहा खतरा

