अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में कोयला टर्मिनलों से उड़ने वाली धूल और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित वायु गुणवत्ता अध्ययन अब शुरू होने जा रहा है। वर्जीनिया डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरनमेंटल क्वालिटी (DEQ) ने इसके लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में कोयला टर्मिनलों से निकलने वाली धूल के आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर संभावित असर का पता लगाने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित वायु गुणवत्ता अध्ययन अब शुरू होने की दिशा में बढ़ गया है। वर्जीनिया डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरनमेंटल क्वालिटी (DEQ) ने इस अध्ययन के लिए ठेकेदारों से निविदाएं आमंत्रित की हैं।
यह अध्ययन नॉरफॉक के लैम्बर्ट्स प्वाइंट और न्यू पोर्ट न्यूज के साउथईस्ट कम्युनिटी इलाके में स्थित कोयला टर्मिनलों से संबंधित वायु प्रदूषण और उसमें मौजूद संभावित विषैले तत्वों की जांच करेगा। स्थानीय समुदायों के लोग लंबे समय से कोयला ढोने वाली ट्रेनों और टर्मिनलों से उड़ने वाली धूल को लेकर चिंता जताते रहे हैं।
अध्ययन के तहत नॉरफॉक में तीन अस्थायी निगरानी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए नॉरफॉक सिटी काउंसिल ने मंगलवार को सर्वसम्मति से राज्य एजेंसी को प्रवेश की अनुमति देने संबंधी समझौते को मंजूरी दी। इन केंद्रों पर करीब 16 महीने तक वायु गुणवत्ता से संबंधित आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।
प्रस्तावित निगरानी स्थलों में वेस्ट 25वीं स्ट्रीट का अंतिम हिस्सा, 43वीं स्ट्रीट और हैम्पटन बुलेवार्ड स्थित फायर स्टेशन के पास का भूखंड तथा वेस्ट 26वीं स्ट्रीट और बोडेन्स फेरी रोड के चौराहे के निकट स्थित खुला भूखंड शामिल हैं। न्यू पोर्ट न्यूज में दो निगरानी केंद्र बनाए जाने की योजना है। इनमें एक एन अचीवेबल ड्रीम टेनिस सेंटर में और दूसरा 31वीं स्ट्रीट तथा विकहम एवेन्यू के चौराहे पर स्थापित किया जाएगा।
वर्जीनिया डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरनमेंटल क्वालिटी की प्रवक्ता इरिना कैलोस के अनुसार, निगरानी केंद्र हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर के नमूने एकत्र करेंगे। इन नमूनों में मौजूद संभावित विषैले पदार्थों की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी। अध्ययन में आर्सेनिक, बेरिलियम, कैडमियम, क्रोमियम, सीसा, मैंगनीज और निकल जैसे तत्वों की मौजूदगी का पता लगाया जाएगा। इसके अलावा, हवा में मौजूद बारीक कणों यानी फाइन पार्टिकुलेट्स के स्तर की भी जांच की जाएगी।
वैज्ञानिक नमूनों का अतिरिक्त माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण भी करेंगे, ताकि यह समझने में मदद मिल सके कि इलाके में मौजूद कणों की प्रकृति क्या है और वे किन स्रोतों से जुड़े हो सकते हैं। नॉरफॉक और न्यू पोर्ट न्यूज के प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग दशकों से कोयले की धूल को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कोयला ले जाने वाली ट्रेनों और टर्मिनलों के आसपास अक्सर धूल जमा होती है और इसका असर घरों तथा वाहनों पर भी दिखाई देता है। स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। स्थानीय समुदाय की एक महिला ने पहले बताया था कि साउथईस्ट कम्युनिटी में स्थानांतरित होने के बाद उसके बेटे को अस्थमा की समस्या विकसित हुई। हालांकि किसी एक व्यक्ति की बीमारी को सीधे कोयला धूल से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से अलग अध्ययन का विषय है, लेकिन समुदाय लंबे समय से व्यापक स्वास्थ्य प्रभावों की व्यवस्थित जांच की मांग करता रहा है।
इससे पहले किए गए अध्ययनों के परिणाम पूरी तरह एक समान नहीं रहे हैं। 2017 में नॉरफॉक में किए गए एक अध्ययन में हवा में पार्टिकुलेट मैटर का स्तर संघीय मानकों के भीतर पाया गया था और उस आधार पर तत्काल सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम की पुष्टि नहीं हुई थी। दूसरी ओर, 2005 में पेनिनसुला क्षेत्र में किए गए एक अध्ययन में कोयले की धूल और स्वास्थ्य समस्याओं के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं किया गया था, लेकिन साउथईस्ट कम्युनिटी में अस्थमा की दर शहर और राज्य के औसत की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक पाई गई थी।
यही वजह है कि नए और अधिक विस्तृत अध्ययन को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अध्ययन के लिए अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) से 5.26 लाख डॉलर का अनुदान मिला है।
अध्ययन की योजना वर्ष 2021 में शुरू हुई थी, लेकिन इसे कई चरणों में देरी का सामना करना पड़ा। DEQ के अनुसार, निगरानी केंद्रों के लिए जरूरी मंजूरियों, निर्माण और ठेका प्रक्रिया तथा बजट में वृद्धि से संबंधित EPA की समीक्षा के कारण परियोजना की समयसीमा आगे बढ़ती रही। पहले अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि वायु निगरानी उपकरण वर्ष 2024 में स्थापित कर दिए जाएंगे और अध्ययन मौजूदा वर्ष तक पूरा हो जाएगा। इससे पहले DEQ ने इलाके में छोटे स्तर के दो ‘पर्पल एयर’ मॉनिटर भी लगाए थे। हालांकि नया अध्ययन इन प्रारंभिक निगरानी प्रयासों की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत होगा और इसमें वायु कणों के रासायनिक तथा सूक्ष्म विश्लेषण पर विशेष जोर दिया जाएगा।
DEQ के अनुसार, ठेका दिए जाने के करीब 60 दिन बाद अध्ययन से संबंधित निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। निगरानी केंद्र स्थापित होने के बाद लगभग 16 महीने तक लगातार नमूने और अन्य आंकड़े जुटाए जाएंगे। लंबी अवधि तक डेटा एकत्र करने का उद्देश्य यह समझना है कि अलग-अलग समय और परिस्थितियों में हवा में मौजूद कणों का स्तर कैसे बदलता है।
इससे शोधकर्ताओं को यह आकलन करने में मदद मिल सकती है कि स्थानीय वायु गुणवत्ता में कोयला टर्मिनलों की संभावित भूमिका कितनी है। नॉरफॉक स्थित लैम्बर्ट्स प्वाइंट टर्मिनल का संचालन वर्ष 1885 से हो रहा है।
साउथईस्ट कम्युनिटी क्षेत्र में स्थित कोयला टर्मिनलों का इतिहास भी 1880 के दशक तक जाता है। दोनों स्थानों पर रेल के जरिए पहुंचने वाले कोयले को जहाजों में लादकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जाता है और ये टर्मिनल हर साल लाखों टन कोयले को संभालने की क्षमता रखते हैं।
नया अध्ययन स्थानीय समुदायों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहली बार लंबे समय से चली आ रही चिंताओं की अधिक व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से जांच हो सकेगी। हालांकि अध्ययन के नतीजे आने तक यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि कोयला टर्मिनलों की धूल स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं का कारण है।
अध्ययन से प्राप्त आंकड़े यह स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं कि हवा में मौजूद प्रदूषक कणों का स्तर कितना है, उनमें कौन-कौन से विषैले तत्व मौजूद हैं और क्या इनका संबंध आसपास संचालित कोयला परिवहन एवं टर्मिनल गतिविधियों से स्थापित किया जा सकता है। आने वाले महीनों में निगरानी प्रक्रिया शुरू होने के साथ स्थानीय निवासियों और पर्यावरण विशेषज्ञों की नजर इसके निष्कर्षों पर रहेगी।
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