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Environment Pulse > ईको सिस्टम > उत्तराखंड में बढ़ेंगी गर्म रातें, पहाड़ों की ठंडी जलवायु पर मंडरा रहा खतरा
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ईको सिस्टम

उत्तराखंड में बढ़ेंगी गर्म रातें, पहाड़ों की ठंडी जलवायु पर मंडरा रहा खतरा

Environment Pulse
Last updated: September 18, 2026 8:11 pm
Environment Pulse
Published: September 18, 2026
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काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) और NDMA के जलवायु आकलन के अनुसार, 2025 से 2050 के बीच उत्तराखंड के नौ जिलों में सामान्य से अधिक गर्म रातों की संख्या में भारी वृद्धि होने का अनुमान है, जहाँ चमोली में ऐसी रातें सालाना 18 से बढ़कर औसतन 52 तक हो सकती हैं। ऐतिहासिक रूप से 18-19 वार्षिक गर्म रातों वाले इस पहाड़ी राज्य में बढ़ते तापमान और बढ़ती नमी (16% तक) से पारिस्थितिकी तंत्र, स्वास्थ्य और पर्यटन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है, जिसके चलते एनडीएमए ने राज्यों को व्यापक हीट एक्शन प्लान और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क: उत्तराखंड की पहाड़ियां आने वाले वर्षों में अपनी पारंपरिक ठंडी रातों के लिए कम जानी जा सकती हैं। एक जलवायु आकलन के अनुसार, 2025 से 2050 के बीच राज्य के कई जिलों में सामान्य से अधिक गर्म रातों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है। इसका असर पहाड़ी क्षेत्रों के पारिस्थितिक संतुलन, पर्यटन और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ मिलकर यह आकलन तैयार किया है। हाल में हुई एक बैठक में इसके निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए। अध्ययन में उत्तराखंड के नौ जिलों में रात के तापमान में संभावित बदलाव का आकलन किया गया है। आकलन के अनुसार, चमोली में हर साल औसतन 52 गर्म रातें दर्ज होने का अनुमान है।

1982 से 2024 के बीच यहां ऐसी रातों की औसत संख्या करीब 18 थी। टिहरी गढ़वाल में सालाना 51, चंपावत में 50, अल्मोड़ा और देहरादून में 49-49, पौड़ी गढ़वाल में 47, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में 46-46 तथा हरिद्वार में करीब 40 गर्म रातें होने का अनुमान है। ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, 1982-2024 के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में सामान्य से अधिक गर्म रातों की औसत संख्या करीब 18 से 19 प्रतिवर्ष रही।

इसके मुकाबले 2025-2050 के दौरान सभी आकलन किए गए जिलों में इसमें बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। चमोली जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में मार्च और अप्रैल के दौरान रात का सामान्य तापमान आमतौर पर करीब 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। ऐसे क्षेत्रों में रात के तापमान में लगातार बढ़ोतरी स्थानीय पारिस्थितिकी और मानव स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म रातें स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय हैं, क्योंकि शरीर दिनभर की गर्मी से उबरने के लिए रात में अपेक्षाकृत ठंडे वातावरण पर निर्भर करता है। रात का तापमान अधिक रहने से शरीर को पर्याप्त राहत नहीं मिल पाती और गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

आकलन में यह भी सामने आया कि राज्य के अधिकांश हिस्सों में अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या में कमी आने का अनुमान है। हालांकि चमोली इसका अपवाद हो सकता है। यहां सालाना अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या वर्तमान के करीब 19 से बढ़कर 26 तक पहुंचने का अनुमान है। देहरादून में ऐसे दिनों की संख्या लगभग 19 पर स्थिर रहने का अनुमान है।

तापमान में बदलाव के साथ उत्तराखंड में गर्मियों के दौरान नमी भी बढ़ी है। एक अलग विश्लेषण के मुताबिक, 2012 से 2022 के बीच गर्मियों में सापेक्ष आर्द्रता 1982-2011 के आधार वर्ष की तुलना में कुछ क्षेत्रों में 16 प्रतिशत तक बढ़ी। देहरादून, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में मार्च और अप्रैल के दौरान यह बदलाव अधिक स्पष्ट रहा।

बढ़ते तापमान और नमी को देखते हुए NDMA ने राज्यों को व्यापक हीट एक्शन प्लान तैयार करने और गर्मी से निपटने के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली तथा स्वास्थ्य संबंधी तैयारियों को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, इस संबंध में NDMA के साथ बैठक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजे जाएंगे ताकि गर्मी की स्थिति से निपटने के लिए योजनाएं जल्द तैयार की जा सकें।

इन योजनाओं की राज्य स्तर पर समीक्षा के बाद उन्हें लागू किया जाएगा। बदलती जलवायु परिस्थितियां उत्तराखंड के लिए केवल तापमान का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि पर्यटन, स्वास्थ्य, जल संसाधनों और पहाड़ी पारिस्थितिकी से जुड़ी व्यापक चुनौती भी बन रही हैं। आने वाले वर्षों में गर्म रातों की बढ़ती संख्या राज्य की जलवायु अनुकूलन रणनीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक साबित हो सकती है।

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