पेरू में सक्रिय एल नीनो मौसम प्रणाली के कारण देश के जलवायु-संवेदनशील इलाकों में 10 लाख से अधिक (लगभग 12 लाख) लोगों पर बाढ़, भूस्खलन और सूखे का गंभीर संकट मंडरा रहा है। नवंबर 2026 से इसके और अधिक तीव्र होने की आशंका है, जो 2027 की शुरुआत तक रह सकता है। पिउरा, लाम्बायेक, लीमा और अरेक्विपा सहित 10 क्षेत्रों को सबसे संवेदनशील माना गया है, जहां तटीय इलाकों में भारी बारिश व बाढ़ और दक्षिणी एंडीज में सूखे की दोहरी चुनौती पैदा हो सकती है। सरकार ने खतरे से निपटने के लिए सैकड़ों जिलों में आपात स्थिति घोषित कर दी है और नदी चैनलों की सफाई, राहत सामग्री भंडारण और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को मजबूत किया जा रहा है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। पेरू में सक्रिय एल नीनो मौसम प्रणाली के चलते देश के जलवायु-संवेदनशील इलाकों में 10 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
अप्रत्याशित बारिश और तापमान में तेजी से हो रही वृद्धि के बीच राष्ट्रीय अधिकारियों ने संभावित बाढ़, भूस्खलन और जल संकट को लेकर चेतावनी जारी की है।
पेरू के राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा संस्थान (INDECI) के प्रमुख लुइस वास्केज के अनुसार, ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर यदि एल नीनो की तीव्रता मजबूत से असाधारण स्तर तक पहुंचती है तो करीब 12 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं।
इसके नवंबर 2026 से और अधिक तेज होने की आशंका है, जबकि इसका असर 2027 की शुरुआत तक बना रह सकता है।
INDECI ने कम से कम 10 क्षेत्रों को सबसे अधिक संवेदनशील माना है। इनमें पिउरा, लाम्बायेक, ला लिबेर्ताद, तुम्बेस, आन्काश, लीमा, उकायाली, हुआनुको, काजामार्का और अरेक्विपा शामिल हैं।
देश के उत्तरी तटीय प्रांतों में जोखिम सबसे ज्यादा माना जा रहा है। इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था कृषि और कृषि निर्यात पर काफी निर्भर है। आम, ब्लूबेरी, एवोकाडो, केला और चावल जैसी फसलों के उत्पादन वाले इलाकों में भारी बारिश से बाढ़, नदियों के उफान और हुआइकोस यानी कीचड़ व मलबे के तेज बहाव का खतरा बढ़ सकता है।
अनुमानित 12 लाख प्रभावित लोगों में से करीब 10.36 लाख लोगों के बाढ़ की चपेट में आने की आशंका है, जबकि लगभग 2.12 लाख लोगों पर भूस्खलन और मलबे के बहाव का खतरा है।
एल नीनो का प्रभाव केवल अत्यधिक बारिश तक सीमित नहीं रहने वाला है। दक्षिणी एंडीज के पहाड़ी क्षेत्रों में इसके कारण सूखे और पानी की कमी की स्थिति पैदा होने की आशंका भी जताई गई है। इस तरह पेरू को एक साथ दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है—तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ तथा ऊंचाई वाले इलाकों में जल संकट।
संभावित आपदा से निपटने के लिए पेरू सरकार ने पहले ही 796 जिलों में भारी बारिश और बाढ़ के खतरे के कारण तथा 607 जिलों में जल संकट के चलते आपात स्थिति घोषित की है। प्रशासन नदी चैनलों की सफाई, खाद्य और जरूरी सामान सहित मानवीय सहायता का भंडारण तथा शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने जैसे कदम उठा रहा है।
वास्केज के मुताबिक मौजूदा आकलन अतीत में आए शक्तिशाली एल नीनो की सबसे गंभीर परिस्थितियों को आधार बनाकर तैयार किया गया है। 1980 और 1990 के दशक में आए मजबूत एल नीनो घटनाक्रमों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए संभावित नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
कुछ क्षेत्रों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य औसत से 3.5 से 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया है, जो गंभीर मौसम की आशंकाओं को बढ़ाता है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम आकलन, रोकथाम और न्यूनीकरण केंद्र (CENEPRED) की कुछ रिपोर्टों में इससे भी बड़ी आबादी के अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने की बात कही गई है। हालांकि, INDECI का करीब 12 लाख लोगों का आंकड़ा मुख्य रूप से उन आबादी समूहों पर केंद्रित है जिनके सीधे प्रभावित होने या विस्थापित होने की आशंका सबसे अधिक है।
अधिकारियों ने विशेष रूप से उन बस्तियों में तत्काल एहतियाती कदम उठाने की जरूरत बताई है जो सूखी नदी की धाराओं के आसपास या अस्थिर ढलानों पर बसी हैं। भारी बारिश की स्थिति में ऐसे इलाके अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और भूस्खलन की चपेट में आ सकते हैं।
पेरू में एल नीनो को लेकर जारी चेतावनी यह दिखाती है कि जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति देश की संवेदनशीलता कितनी अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते नदी क्षेत्रों की सफाई, आपदा चेतावनी तंत्र, राहत सामग्री और स्थानीय समुदायों की तैयारी मजबूत करना संभावित मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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