By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: पेरू में एल नीनो का खतरा, 10 लाख से अधिक लोगों पर मंडरा रहा संकट
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > पेरू में एल नीनो का खतरा, 10 लाख से अधिक लोगों पर मंडरा रहा संकट
AI Image
ईको सिस्टम

पेरू में एल नीनो का खतरा, 10 लाख से अधिक लोगों पर मंडरा रहा संकट

Environment Pulse
Last updated: August 29, 2026 9:21 pm
Environment Pulse
Published: August 29, 2026
Share
AI Image
SHARE

पेरू में सक्रिय एल नीनो मौसम प्रणाली के कारण देश के जलवायु-संवेदनशील इलाकों में 10 लाख से अधिक (लगभग 12 लाख) लोगों पर बाढ़, भूस्खलन और सूखे का गंभीर संकट मंडरा रहा है। नवंबर 2026 से इसके और अधिक तीव्र होने की आशंका है, जो 2027 की शुरुआत तक रह सकता है। पिउरा, लाम्बायेक, लीमा और अरेक्विपा सहित 10 क्षेत्रों को सबसे संवेदनशील माना गया है, जहां तटीय इलाकों में भारी बारिश व बाढ़ और दक्षिणी एंडीज में सूखे की दोहरी चुनौती पैदा हो सकती है। सरकार ने खतरे से निपटने के लिए सैकड़ों जिलों में आपात स्थिति घोषित कर दी है और नदी चैनलों की सफाई, राहत सामग्री भंडारण और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को मजबूत किया जा रहा है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। पेरू में सक्रिय एल नीनो मौसम प्रणाली के चलते देश के जलवायु-संवेदनशील इलाकों में 10 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।

अप्रत्याशित बारिश और तापमान में तेजी से हो रही वृद्धि के बीच राष्ट्रीय अधिकारियों ने संभावित बाढ़, भूस्खलन और जल संकट को लेकर चेतावनी जारी की है।

पेरू के राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा संस्थान (INDECI) के प्रमुख लुइस वास्केज के अनुसार, ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर यदि एल नीनो की तीव्रता मजबूत से असाधारण स्तर तक पहुंचती है तो करीब 12 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं।

इसके नवंबर 2026 से और अधिक तेज होने की आशंका है, जबकि इसका असर 2027 की शुरुआत तक बना रह सकता है।

INDECI ने कम से कम 10 क्षेत्रों को सबसे अधिक संवेदनशील माना है। इनमें पिउरा, लाम्बायेक, ला लिबेर्ताद, तुम्बेस, आन्काश, लीमा, उकायाली, हुआनुको, काजामार्का और अरेक्विपा शामिल हैं।

देश के उत्तरी तटीय प्रांतों में जोखिम सबसे ज्यादा माना जा रहा है। इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था कृषि और कृषि निर्यात पर काफी निर्भर है। आम, ब्लूबेरी, एवोकाडो, केला और चावल जैसी फसलों के उत्पादन वाले इलाकों में भारी बारिश से बाढ़, नदियों के उफान और हुआइकोस यानी कीचड़ व मलबे के तेज बहाव का खतरा बढ़ सकता है।

अनुमानित 12 लाख प्रभावित लोगों में से करीब 10.36 लाख लोगों के बाढ़ की चपेट में आने की आशंका है, जबकि लगभग 2.12 लाख लोगों पर भूस्खलन और मलबे के बहाव का खतरा है।

एल नीनो का प्रभाव केवल अत्यधिक बारिश तक सीमित नहीं रहने वाला है। दक्षिणी एंडीज के पहाड़ी क्षेत्रों में इसके कारण सूखे और पानी की कमी की स्थिति पैदा होने की आशंका भी जताई गई है। इस तरह पेरू को एक साथ दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है—तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ तथा ऊंचाई वाले इलाकों में जल संकट।

संभावित आपदा से निपटने के लिए पेरू सरकार ने पहले ही 796 जिलों में भारी बारिश और बाढ़ के खतरे के कारण तथा 607 जिलों में जल संकट के चलते आपात स्थिति घोषित की है। प्रशासन नदी चैनलों की सफाई, खाद्य और जरूरी सामान सहित मानवीय सहायता का भंडारण तथा शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने जैसे कदम उठा रहा है।

वास्केज के मुताबिक मौजूदा आकलन अतीत में आए शक्तिशाली एल नीनो की सबसे गंभीर परिस्थितियों को आधार बनाकर तैयार किया गया है। 1980 और 1990 के दशक में आए मजबूत एल नीनो घटनाक्रमों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए संभावित नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

कुछ क्षेत्रों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य औसत से 3.5 से 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया है, जो गंभीर मौसम की आशंकाओं को बढ़ाता है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम आकलन, रोकथाम और न्यूनीकरण केंद्र (CENEPRED) की कुछ रिपोर्टों में इससे भी बड़ी आबादी के अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने की बात कही गई है। हालांकि, INDECI का करीब 12 लाख लोगों का आंकड़ा मुख्य रूप से उन आबादी समूहों पर केंद्रित है जिनके सीधे प्रभावित होने या विस्थापित होने की आशंका सबसे अधिक है।

अधिकारियों ने विशेष रूप से उन बस्तियों में तत्काल एहतियाती कदम उठाने की जरूरत बताई है जो सूखी नदी की धाराओं के आसपास या अस्थिर ढलानों पर बसी हैं। भारी बारिश की स्थिति में ऐसे इलाके अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और भूस्खलन की चपेट में आ सकते हैं।

पेरू में एल नीनो को लेकर जारी चेतावनी यह दिखाती है कि जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति देश की संवेदनशीलता कितनी अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते नदी क्षेत्रों की सफाई, आपदा चेतावनी तंत्र, राहत सामग्री और स्थानीय समुदायों की तैयारी मजबूत करना संभावित मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Also Read: प्रदूषण के जुर्माने से बनेगा राष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण कोष, केंद्र ने 2026 के नियम किए अधिसूचित

You Might Also Like

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में वर्षा का पानी जमा करने की अनूठी पहल
11 से 13 अगस्त तक ग्रेटर नोएडा में होगा इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो-2026
UNCCD COP17 की मेजबानी से पहले मंगोलिया का बड़ा कदम, ज़मीन के खराब होने की समस्या से निपटने के लिए शुरू किया ग्लोबल प्रोजेक्ट
When Rivers Are Linked, Who Gets Left Behind?
रोजमर्रा की छोटी आदतों से घटाएं अपना कार्बन फुटप्रिंट
TAGGED:Emergency response and preparednessExtreme weather impact on agricultureFloods and landslides in PeruINDECI disaster warningPeru El Nino threat 2026
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
ईको सिस्टमजमीनजैव-विविधताहवा

रोजमर्रा की छोटी आदतों से घटाएं अपना कार्बन फुटप्रिंट

Environment Pulse
Environment Pulse
August 17, 2026
How Music Has Given the Climate Crisis a Voice
सभी विभाग अपनी छतों पर शीघ्र लगवाएं सोलर पैनल : मुख्य सचिव
मौसम की भविष्यवाणी को और सटीक बनाएगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता
महादेव की नगरी में स्वच्छता का नया अध्याय

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?