इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन (IRF) की ‘स्टेट ऑफ द राइनोज 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान भारत, नेपाल और इंडोनेशिया में गैंडों के शिकार की एक भी घटना दर्ज नहीं की गई है, जो एशियाई गैंडों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और नेपाल में पाए जाने वाले ‘ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो’ की वैश्विक आबादी बढ़कर लगभग 4,075 हो गई है, जिसमें अकेले भारत में इनकी संख्या 3,223 से 3,323 के बीच है और इसका लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा असम (विशेषकर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) में मौजूद है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: भारत, नेपाल और इंडोनेशिया में वर्ष 2025 के दौरान गैंडों के शिकार की कोई ज्ञात घटना दर्ज नहीं हुई। इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन (IRF) की ‘स्टेट ऑफ द राइनोज 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई गैंडों के संरक्षण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया है कि गैंडों के प्राकृतिक आवास में गिरावट अब भी उनके दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत और नेपाल में पाए जाने वाले ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो की वैश्विक आबादी करीब 4,075 हो गई है, जो 2022 में लगभग 4,014 थी।
भारत में इस प्रजाति के करीब 3,223 से 3,323 गैंडे हैं। इनमें लगभग 80 प्रतिशत आबादी असम में पाई जाती है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान इस प्रजाति का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां 2,600 से अधिक गैंडे मौजूद हैं। असम में 2025 में गैंडों के शिकार की कोई ज्ञात घटना सामने नहीं आई।
1970 के दशक के बाद यह राज्य में दूसरी ऐसी घटना-रहित अवधि है। इससे पहले 2022 में भी शिकार की कोई घटना दर्ज नहीं हुई थी। मानस राष्ट्रीय उद्यान में भी लगातार तीन वर्षों से गैंडे और बाघ के शिकार की कोई घटना सामने नहीं आई है। नेपाल में ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो की अनुमानित आबादी 752 है, जिसमें अधिकांश गैंडे चितवन राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं।
वर्ष 2021 से 2024 के बीच चार शिकार घटनाओं के बाद 2025 में नेपाल में भी कोई गैंडा शिकार दर्ज नहीं हुआ। 2011 के बाद नेपाल दस बार गैंडों के शून्य शिकार का वर्ष दर्ज कर चुका है। इंडोनेशिया में भी 2025 में बचे हुए सुमात्रन और जावन गैंडों के शिकार की कोई ज्ञात घटना दर्ज नहीं हुई। देश में सुमात्रन गैंडों की संख्या करीब 50 और जावन गैंडों की संख्या 34 से 47 के बीच अनुमानित है। संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, इस उपलब्धि के पीछे बेहतर खुफिया तंत्र, समन्वित कार्रवाई, निगरानी व्यवस्था, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सक्रिय रोकथाम जैसे उपायों की अहम भूमिका रही है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने विश्व गैंडा दिवस 2026 के अवसर पर राज्य को ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो का वैश्विक गढ़ बताया। हालांकि, शिकार पर नियंत्रण के बावजूद गैंडों के आवास से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आक्रामक वनस्पतियों का प्रसार, घास के मैदानों का सिकुड़ना, आवासों का क्षरण और पर्याप्त घासभूमि एवं आर्द्रभूमि की उपलब्धता की जरूरत प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं।
ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो अभी भी IUCN की रेड लिस्ट में Vulnerable (असुरक्षित) श्रेणी में है। संरक्षण विशेषज्ञों के मुताबिक शून्य शिकार की उपलब्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन गैंडों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए आवास प्रबंधन, लगातार निगरानी, शिकार-रोधी कार्रवाई और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को जारी रखना जरूरी होगा।

