स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती माँग के बीच भारत सरकार ने लिथियम और निकेल की सुरक्षित आपूर्ति और घरेलू प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए एक नई रणनीतिक योजना शुरू की है। खान मंत्रालय ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ (NCMM) के तहत एक प्रोत्साहन योजना लाने जा रहा है, जिसके लिए सरकार ने 16,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है और सार्वजनिक कंपनियों से 18,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की उम्मीद है। वर्तमान में भारत अपनी 95 प्रतिशत महत्वपूर्ण खनिज ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। इस निर्भरता को कम करने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चार समर्पित ‘क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क’ बनाए जाएंगे (महाराष्ट्र में लिथियम और ओडिशा में निकेल पर विशेष जोर होगा)। इसके अलावा 2030-31 तक 1,200 अन्वेषण परियोजनाएं, रीसाइक्लिंग और शून्य आयात शुल्क जैसे कदम उठाकर बैटरी-ग्रेड सामग्री के घरेलू उत्पादन को मजबूत किया जाएगा।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की बढ़ती जरूरतों के बीच भारत ने लिथियम और निकेल की भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नई रणनीतिक पहल शुरू की है।
खनन मंत्रालय जल्द ही लिथियम और निकेल की घरेलू प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन योजना शुरू करेगा। खान सचिव केशव चंद्र ने फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज की 60वीं वार्षिक आम बैठक में कहा कि लिथियम और निकेल के लिए योजना जल्द शुरू की जाएगी।
इसका उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण खनिजों की पूरी वैल्यू चेन विकसित करना और आयातित प्रोसेस्ड सामग्री पर निर्भरता कम करना है। यह पहल नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के तहत की जा रही है।
मिशन के लिए सरकार ने ₹16,300 करोड़ का प्रावधान किया है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से करीब ₹18,000 करोड़ के अतिरिक्त निवेश की उम्मीद है। लिथियम और निकेल इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
निकेल-समृद्ध बैटरी तकनीक कोबाल्ट पर निर्भरता कम करने में भी मदद करती है। सरकार ने गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चार समर्पित क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। महाराष्ट्र में लिथियम और ओडिशा में निकेल प्रोसेसिंग पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। भारत वर्तमान में अपनी लगभग 95 प्रतिशत महत्वपूर्ण खनिज जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।
रणनीति में 2030-31 तक 1,200 अन्वेषण परियोजनाएं, विदेशों में खनिज परिसंपत्तियों का अधिग्रहण, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, बैटरी स्क्रैप रीसाइक्लिंग और चुनिंदा महत्वपूर्ण खनिजों पर शून्य आयात शुल्क जैसे कदम शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रयासों से स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी तथा भारत में बैटरी-ग्रेड सामग्री के घरेलू उत्पादन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
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