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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > जल प्रदूषण से भारत के मत्स्य क्षेत्र को हर साल 2.2 अरब डॉलर का नुकसान
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जल

जल प्रदूषण से भारत के मत्स्य क्षेत्र को हर साल 2.2 अरब डॉलर का नुकसान

Environment Pulse
Last updated: September 30, 2026 9:33 pm
Environment Pulse
Published: September 30, 2026
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बिना उपचारित सीवेज और जल प्रदूषण के कारण भारत के मत्स्य क्षेत्र को सालाना 2.2 अरब डॉलर से अधिक का भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, जो देश के मत्स्य क्षेत्र के कुल मूल्य का लगभग 5.4 प्रतिशत है। ‘बैक टू ब्लू’ और ‘ओशन सीवेज एलायंस’ की रिपोर्ट के अनुसार, ब्राजील, भारत, केन्या, फिलीपींस और ब्रिटेन में से भारत को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पानी में प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी से जलीय जीवन को खतरा पैदा हो रहा है, जबकि दूषित पेयजल से होने वाले डायरिया के कारण 246 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त नुकसान होता है। देश में केवल 21 से 28 प्रतिशत सीवेज का ही उपचार हो पाता है, जिसे देखते हुए विशेषज्ञों ने सीवेज बुनियादी ढांचे में निवेश और जल पुनर्चक्रण पर जोर दिया है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क: बिना उपचारित सीवेज और जल प्रदूषण से भारत के मत्स्य क्षेत्र को हर साल 2.2 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान हो रहा है। Back to Blue और Ocean Sewage Alliance की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, ब्राजील, भारत, केन्या, फिलीपींस और ब्रिटेन में भारत को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

2.2 अरब डॉलर का नुकसान देश के मत्स्य क्षेत्र के आर्थिक मूल्य का करीब 5.4 प्रतिशत है। नदियों, झीलों और तटीय जल क्षेत्रों में प्रदूषण से मछलियों की संख्या घट रही है, जिससे खाद्य सुरक्षा और समुद्री उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ने का खतरा है।

रिपोर्ट के मुताबिक बिना उपचारित सीवेज से पानी में पोषक तत्वों की अधिकता ऑक्सीजन की कमी पैदा करती है और जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाती है। दूषित पेयजल से होने वाले डायरिया के कारण भारत को अतिरिक्त 246 मिलियन डॉलर का वार्षिक आर्थिक नुकसान होता है। देश में केवल 21–28 प्रतिशत सीवेज का उपचार हो पाता है।

गंगा बेसिन में रोज करीब 12,000 मिलियन लीटर सीवेज पैदा होता है, जबकि उपचार क्षमता लगभग 4,000 मिलियन लीटर है। विशेषज्ञों ने सीवेज ढांचे में निवेश और उपचारित जल के पुनर्चक्रण पर जोर दिया है।

Also Read: भारत में घटती पक्षी आबादी पर असद रहमानी की नई पुस्तक जारी

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TAGGED:Aquatic ecosystemBack to Blue reportFisheries sector economic lossUntreated sewageWater pollution
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