भारत में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून का मौसम 12.6 प्रतिशत बारिश की कमी के साथ समाप्त हुआ, जो एक दशक से अधिक समय में देश का सबसे कमजोर मानसून है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 30 सितंबर के बीच कुल 759.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 87 प्रतिशत है। प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियों के कारण मानसूनी बारिश प्रभावित हुई, हालांकि 77 दिन सक्रिय रहीं निम्न दबाव प्रणालियों ने कमी को और बढ़ने से रोका। क्षेत्रीय स्तर पर पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भारी कमी दर्ज की गई, जबकि मध्य भारत में स्थिति लगभग सामान्य रही। जून में कम बारिश से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई, और अब कम बारिश व मिट्टी में नमी की कमी के कारण आगामी रबी फसलों की बुआई और खाद्य कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। IMD ने आगे भी अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: भारत में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून का मौसम 12.6 प्रतिशत बारिश की कमी के साथ समाप्त हुआ, जो एक दशक से अधिक समय में देश का सबसे कमजोर मानसून रहा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह 2001 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा। 1 जून से 30 सितंबर के बीच देश में कुल 759.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि 1971-2020 के दीर्घकालिक औसत (LPA) 868.6 मिमी के मुकाबले यह सामान्य का केवल 87 प्रतिशत है।
यह 2015 के बाद सबसे बड़ी कमी है, जब मानसून में 12.7 प्रतिशत बारिश कम हुई थी। वर्ष 1901 के बाद यह 13वां सबसे कम बारिश वाला मानसून भी रहा। IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, प्रशांत महासागर में अल नीनो परिस्थितियों ने मानसूनी बारिश को प्रभावित किया। हालांकि, मौसम के दौरान 77 दिन निम्न दबाव प्रणालियां सक्रिय रहीं, जबकि सामान्य औसत 57 दिन है।
इन प्रणालियों ने बारिश की कमी को और बढ़ने से रोकने में मदद की। क्षेत्रीय स्तर पर बारिश में बड़ा अंतर देखा गया। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 25-26 प्रतिशत की कमी रही, जो 1901 के बाद इस क्षेत्र का सबसे कम बारिश वाला मानसून है।
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 24 प्रतिशत कमी दर्ज की गई, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश 6 प्रतिशत कम रही। मध्य भारत में केवल 2 प्रतिशत की कमी के साथ स्थिति लगभग सामान्य रही। देश के 36 मौसम विज्ञान उपखंडों में 17 में कम, 18 में सामान्य और एक में अधिक बारिश हुई। करीब 282 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। जून में बारिश 35-36 प्रतिशत कम रही, जिससे खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई। जुलाई में कुछ सुधार के बाद अगस्त और सितंबर में फिर कमी दर्ज की गई।
सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई अच्छी बारिश से कुल कमी कुछ कम हुई। कम बारिश से मिट्टी में नमी और जलाशयों के स्तर पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे आगामी रबी फसल की बुआई, खासकर वर्षा आधारित क्षेत्रों में, प्रभावित हो सकती है। प्रमुख फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की स्थिति में खाद्य कीमतों को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। IMD ने अक्टूबर और अक्टूबर-दिसंबर अवधि में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है।
मानसून भारत की वार्षिक बारिश में 70 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है और कृषि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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