By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: संगीत से हरियाली का संदेश: कैसे भारतीय संगीतकार बन रहे हैं धरती के सिपाही
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ओपिनियन > स्टोरी > संगीत से हरियाली का संदेश: कैसे भारतीय संगीतकार बन रहे हैं धरती के सिपाही
AI Image
स्टोरी

संगीत से हरियाली का संदेश: कैसे भारतीय संगीतकार बन रहे हैं धरती के सिपाही

Environment Pulse
Last updated: October 7, 2026 4:54 pm
Environment Pulse
Published: October 7, 2026
Share
AI Image
SHARE

भारत में संगीत अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक सशक्त माध्यम बन गया है। ग्रैमी विजेता रिकी केज, ‘इंडियन ओशन’ बैंड, हिप-हॉप रैपर्स, बॉलीवुड कलाकारों (शंकर महादेवन, जुबिन नौटियाल, सोना मोहपात्रा) और लोक कलाकारों द्वारा गाए जाने वाले पर्यावरण-केंद्रित गीत पेड़, पहाड़, नदियाँ और ग्लोबल वार्मिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर जनता को जागरूक कर रहे हैं। भाषणों के मुकाबले संगीत लोगों के दिलों पर सीधा असर डालता है, जिससे यह आम किसानों से लेकर युवाओं तक जलवायु संकट को समझाने और एक हरित भविष्य की उम्मीद जगाने का सबसे प्रभावी हथियार बन गया है।

Contents
ग्रैमी से लेकर गांव के मेले तक – ग्रीन म्यूजिक की लहरवैश्विक मंच से संदेश – रिकी केजइंडियन ओशन बैंड – रॉक से क्रांतिहिप-हॉप से गांव की कहानी – क्लाइमेट इमरजेंसी मिक्सटेपबॉलीवुड भी पीछे नहींलोकगीत में छुपा विज्ञानक्यों असरदार है संगीत?

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : जब मंच पर गिटार बजता है तो अब सिर्फ प्यार की बात नहीं होती, बल्कि पेड़, पहाड़, नदी और गर्म होती धरती की भी बात होती है। भारत के युवा और दिग्गज संगीतकार अपने गीतों के जरिए पर्यावरण बचाने का अलख जगा रहे हैं।

ग्रैमी से लेकर गांव के मेले तक – ग्रीन म्यूजिक की लहर

वैश्विक मंच से संदेश – रिकी केज

तीन बार ग्रैमी जीत चुके बेंगलुरु के रिकी केज पर्यावरण संगीत के सबसे बड़े चेहरे हैं। हाल ही में ऑक्सफोर्ड में हुए Skoll World Forum में उनका शो “One With Earth Song” चर्चा में रहा। मंच पर फर्न के पत्ते, आदिवासी गायक और उनके बोल – “हम धरती पर नहीं, धरती के साथ हैं”।

इंडियन ओशन बैंड – रॉक से क्रांति

पर्यावरण विज्ञान में पीएचडी कर चुके राहुल राम का बैंड इंडियन ओशन 20 साल से यही कर रहा है। उनका नया गाना ‘तू है’ क्लाइमेट रिफ्यूजी, पिघलते ग्लेशियर और पॉल्यूशन पर है। बेंगलुरु के Nature inFocus फेस्टिवल में राहुल ने कहा, “गाना साझा संदेश देता है, इसीलिए हम इसे एंथम कहते हैं।”

हिप-हॉप से गांव की कहानी – क्लाइमेट इमरजेंसी मिक्सटेप

सबसे नया प्रयोग है Youth Ki Awaaz का ‘क्लाइमेट इमरजेंसी मिक्सटेप’। 6 राज्यों के 6 रैपर्स:

– देवांशी का ‘निसर्गाचा कायदा’ (मराठी रैप): महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश, सूखा और आदिवासी विस्थापन की कहानी।

– गमक सिन्हा का ‘मिट्टी’: मिट्टी खुद बोलती है – “केमिकल ने मुझे बंजर कर दिया, किसान दुखी है।”

– माही जी और ग्रीनपीस का ‘हीटवेव राइजिंग’: ऑटो वाले, सफाईकर्मी, ठेले वालों की कहानी जो लू में सबसे ज्यादा झुलसते हैं।

बॉलीवुड भी पीछे नहीं

शंकर महादेवन, सुनिधी चौहान, शान और आयुष्मान खुराना ने UN के साथ ‘टिक टिक प्लास्टिक’ गाना बनाया। बोल हैं – “हर तरफ बिखरा पॉलिथीन, बोतल, स्ट्रॉ।”

जुबिन नौटियाल का नया गाना ‘बर्बाद’ (2026) हिमालय के उजड़ते जंगलों पर है – “हमने पेड़ काटे और अब सोचते हैं घर जैसा सुकून क्यों नहीं।”

अर्थ डे 2026 पर सोना मोहपात्रा ने ओडिशा के सिजिमाली पहाड़ों को बॉक्साइट खनन से बचाने वाली आदिवासी महिलाओं को अपना गाना समर्पित किया।

लोकगीत में छुपा विज्ञान

छत्तीसगढ़ के चक्रधर समारोह में ‘जल-जंगल-जमीन’ के गीत गूंजते हैं, तो बुंदेलखंड में हरिशंकर आचार्य बुंदेली में गाते हैं – “स्वच्छ पर्यावरण सबहि को प्यारो, खेती जैविक करो यही विनती हमारी।”

क्यों असरदार है संगीत?

विशेषज्ञ मानते हैं कि भाषण से ज्यादा गाना दिल में उतरता है। जब रैपर अपनी भाषा में कहता है कि “तनपुरे का तूंबा गर्मी से सूख गया”, तो गांव का किसान भी समझ जाता है कि जलवायु परिवर्तन किताब की बात नहीं, उसकी रोजी-रोटी की बात है।

संगीत अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, चेतावनी भी है – और उम्मीद भी।

Also Read: COP31 के लिए भारत की तैयारी तेज, दुनिया में बना ‘अपरिहार्य आवाज’

You Might Also Like

Assam Floods are a problem that teaches us a lot about dealing with climate change
जलवायु परिवर्तन की मार: कोलोराडो के ग्लेशियर एक साल में तेजी से पिघले, सेंट मैरी ग्लेशियर का अस्तित्व खत्म
किफायती एएसएफ टीकों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन सकता है भारत
समुद्री कछुओं के संरक्षणकर्ता सतीश भास्कर की विरासत को सलाम, जोया अख्तर समर्थित डॉक्यूमेंट्री ‘टर्टल वॉकर’ का आगाज
कश्मीर इकोटूरिज्म एसोसिएशन और टूरिज्म इंडिया एलायंस के बीच ऐतिहासिक समझौता, सतत पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
TAGGED:Climate changeClimate EmergencyEco-MusicEnvironmental SongsGreen MusicIndian Ocean BandRicky KejSustainable Future
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
2 Comments
  • Pingback: पर्यावरण सिर्फ जलवायु परिवर्तन नहीं है, उससे कहीं ज्यादा है – Environment Pulse
  • Pingback: क्या वाकई बदला बाढ़ प्रबंधन का मिजाज? ISRO की सेटेलाइट चेतावनी से लेकर ‘नदी के साथ जीने’ के नए मॉड

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
जैव-विविधता

पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण के लिए आर्मेनिया और UNEP की वैश्विक पहल, एक अरब से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

Environment Pulse
Environment Pulse
October 30, 2026
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर कर्नाटक में सियासी घमासान, पश्चिमी घाट को लेकर विधानसभा के विशेष सत्र में चर्चा
दक्षिण-पूर्व एशिया के देसी ओक पेड़ों पर विलुप्ति का गंभीर खतरा
गैर-वाणिज्यिक और वाणिज्यिक कोयला खदानों के प्रोडक्शन में 9.6% की बढ़ोतरी
बेंगलुरु की सुरंग परियोजना से भूजल पर गंभीर खतरे की आशंका

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?