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जल

अंटार्कटिका का ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ पुराने जलवायु अनुमानों से दोगुनी तेजी से पिघल सकता है

Environment Pulse
Last updated: November 4, 2026 8:37 pm
Environment Pulse
Published: November 4, 2026
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कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, अंटार्कटिका का थ्वाइट्स ग्लेशियर (जिसे ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ भी कहा जाता है) वर्ष 2100 तक वैश्विक समुद्र स्तर में पहले के अनुमानों से दोगुनी तेजी से यानी लगभग 30 मिलीमीटर (1.2 इंच) की वृद्धि कर सकता है। यह स्थिति बिना किसी अतिरिक्त तापमान वृद्धि के भी पैदा हो सकती है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : नए वैज्ञानिक मॉडलिंग अध्ययन में सामने आया है कि अंटार्कटिका का थ्वाइट्स ग्लेशियर, जिसे ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ भी कहा जाता है, वर्ष 2100 तक वैश्विक समुद्र स्तर में पहले के अनुमानों से दोगुना योगदान दे सकता है। यह स्थिति अतिरिक्त वैश्विक तापमान वृद्धि के बिना भी पैदा हो सकती है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन और नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्म समुद्री पानी पहले के अनुमानों की तुलना में बर्फ के नीचे अधिक दूर तक पहुंच रहा है।

इससे ग्लेशियर के नीचे पिघलाव का दायरा बढ़ रहा है। पुराने मॉडल में बर्फ और समुद्र के संपर्क वाले सीमित क्षेत्र को ध्यान में रखा गया था, जबकि नए अध्ययन में इस क्षेत्र को अधिक व्यापक माना गया है। इससे ग्लेशियर के पिघलने की प्रक्रिया का बेहतर आकलन संभव हुआ है। नए मॉडल के अनुसार, यदि मौजूदा जलवायु परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तब भी थ्वाइट्स ग्लेशियर 2100 के अंत तक वैश्विक समुद्र स्तर में 30 मिलीमीटर यानी लगभग 1.2 इंच की वृद्धि कर सकता है।

यह पहले के अनुमानों से लगभग दोगुना है। शोधकर्ताओं ने बर्फ के नीचे समुद्र और ग्लेशियर के संपर्क वाले क्षेत्र को कई किलोमीटर तक विस्तृत मानकर मॉडल तैयार किया। इस मॉडल ने 1990 के दशक से ग्लेशियर में दर्ज तेजी से हो रही बर्फ की कमी को सफलतापूर्वक समझाया। पुराने मॉडल इस ऐतिहासिक बर्फ क्षरण को वास्तविकता से लगभग चार गुना कम आंक रहे थे। थ्वाइट्स ग्लेशियर पहले से ही समुद्र के स्तर में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है। यह पश्चिम अंटार्कटिक बर्फ की चादर को स्थिर बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सदी के दौरान ग्लेशियर के समुद्र के नीचे स्थित एक महत्वपूर्ण चट्टानी अवरोध से अपना संपर्क खोने की पर्याप्त आशंका है। ऐसा होने पर इसके पीछे हटने और पिघलने की गति और तेज हो सकती है। यदि थ्वाइट्स ग्लेशियर पूरी तरह ढह जाता है, तो इसमें मौजूद बर्फ समुद्र के वैश्विक स्तर को दो फीट से अधिक बढ़ा सकती है।

इसके अस्थिर होने से आसपास की अन्य बर्फ की चादरों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नए निष्कर्ष आने वाले दशकों में तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के खतरे के आकलन को और गंभीर बनाते हैं। समुद्र और बर्फ के बीच होने वाली पिघलने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक मॉडलों में अधिक सटीक तरीके से शामिल करना जरूरी है। यह शोध अंटार्कटिका की बर्फ की चादरों पर समुद्र के बढ़ते तापमान के प्रभाव और उनके तेजी से बदलते स्वरूप को रेखांकित करता है।

दुनिया भर के तटीय समुदायों के लिए भविष्य की अनुकूलन योजनाएं तैयार करने के लिहाज से ग्लेशियरों की निरंतर निगरानी और अधिक सटीक वैज्ञानिक मॉडलिंग बेहद आवश्यक होगी।

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