अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) और इंटरनेशनल कोरल रीफ इनिशिएटिव (ICRI) के अनुसार, 2023 की शुरुआत से 2025 के मध्य तक चले चौथे वैश्विक प्रवाल विरंजन घटनाक्रम के दौरान दुनिया की करीब 84 प्रतिशत प्रवाल भित्तियां समुद्री गर्मी के तनाव की चपेट में आ गईं। यह अब तक का सबसे व्यापक प्रवाल विरंजन है, जिसने प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर के कम से कम 83 देशों को प्रभावित किया है, जो 2014-2017 के पिछले रिकॉर्ड (68%) से काफी अधिक है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड में दर्ज अब तक के सबसे व्यापक वैश्विक प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) की पुष्टि की है। वर्ष 2023 की शुरुआत से 2025 के मध्य तक चले चौथे वैश्विक प्रवाल विरंजन घटनाक्रम के दौरान दुनिया की करीब 84 प्रतिशत प्रवाल भित्तियां विरंजन स्तर के समुद्री गर्मी तनाव की चपेट में आईं।
अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) और इंटरनेशनल कोरल रीफ इनिशिएटिव (ICRI) के अनुसार, वैश्विक प्रवाल भित्ति क्षेत्र के लगभग 83.7 से 84 प्रतिशत हिस्से में इतना अधिक तापीय तनाव दर्ज किया गया, जो प्रवाल विरंजन का कारण बन सकता है।
प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर क्षेत्रों के कम से कम 83 देशों और क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रवाल विरंजन दर्ज किया गया। यह आंकड़ा 2014 से 2017 के बीच दर्ज तीसरे वैश्विक प्रवाल विरंजन घटनाक्रम से कहीं अधिक है।
उस दौरान लगभग 68 प्रतिशत प्रवाल भित्तियां प्रभावित हुई थीं। NOAA ने अप्रैल 2024 में मौजूदा घटनाक्रम को आधिकारिक तौर पर वैश्विक प्रवाल विरंजन घटना घोषित किया था।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस अभूतपूर्व घटनाक्रम की मुख्य वजह जलवायु परिवर्तन से जुड़ा समुद्र का रिकॉर्ड स्तर तक गर्म होना रही। मजबूत अल नीनो परिस्थितियों ने भी समुद्री तापमान में वृद्धि को और तेज किया। प्रवाल विरंजन तब होता है जब समुद्र का तापमान सामान्य से काफी बढ़ जाता है और प्रवाल अपने ऊतकों में रहने वाले सहजीवी शैवाल, जिन्हें जूजैंथेली कहा जाता है, को बाहर निकाल देते हैं।
ये शैवाल प्रवाल को भोजन उपलब्ध कराने के साथ उसे उसका विशिष्ट रंग भी देते हैं। शैवाल के निकल जाने पर प्रवाल सफेद दिखाई देने लगते हैं और लंबे समय तक तापीय तनाव रहने पर उनकी मृत्यु हो सकती है।
कई क्षेत्रों में प्रवालों की मृत्यु बेहद गंभीर स्तर तक पहुंच गई। मेक्सिको के प्रशांत तट के कुछ हिस्सों में मृत्यु दर 93 प्रतिशत तक दर्ज की गई, जबकि चागोस द्वीपसमूह के कुछ क्षेत्रों में यह 95 प्रतिशत से अधिक रही। ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ में भी बड़े पैमाने पर नुकसान दर्ज हुआ और इसके उत्तरी हिस्सों में करीब चार दशकों की निगरानी के दौरान सबसे बड़ी वार्षिक गिरावटों में से कुछ देखी गईं।
इस घटना की असाधारण तीव्रता को देखते हुए NOAA के कोरल रीफ वॉच कार्यक्रम ने अपने चेतावनी पैमाने का विस्तार किया। कुछ क्षेत्रों में समुद्री तापीय परिस्थितियां ऐसी थीं, जिनमें प्रवालों की लगभग पूरी आबादी के नष्ट होने की आशंका पैदा हो गई थी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रवाल विरंजन की घटनाएं अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से हो रही हैं। 1980 के दशक में जहां बड़े पैमाने पर ऐसी घटनाओं के बीच करीब 25 से 30 वर्षों का अंतर होता था, वहीं कई क्षेत्रों में अब लगभग हर वर्ष गंभीर तापीय तनाव की स्थिति बन रही है।
इससे प्रवाल भित्तियों को एक घटना से उबरने के लिए मिलने वाला समय लगातार कम हो रहा है। उपग्रह आंकड़ों और मैदानी अवलोकनों से संकेत मिलता है कि व्यापक समुद्री तापीय तनाव में कमी आने के बाद चौथा वैश्विक प्रवाल विरंजन घटनाक्रम संभवतः 2025 के मध्य में समाप्त हो गया। हालांकि, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि समुद्रों का लगातार बढ़ता औसत तापमान भविष्य में ऐसे घटनाक्रमों का खतरा बनाए रखेगा। प्रवाल भित्तियां समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
वे दुनिया की करीब एक-चौथाई समुद्री प्रजातियों को आवास प्रदान करती हैं, तटरेखाओं को समुद्री लहरों से बचाने में मदद करती हैं और करोड़ों लोगों की मत्स्य आजीविका तथा पर्यटन पर निर्भरता को सहारा देती हैं। इनके लगातार क्षरण से जैव विविधता, खाद्य सुरक्षा और तटीय क्षेत्रों की जलवायु-लचीलापन क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बचे हुए प्रवाल भित्ति तंत्रों को बचाने के लिए प्रवाल पुनर्स्थापन, प्रवालों की अनुकूलन क्षमता बढ़ाने से जुड़े अनुसंधान और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तत्काल वैश्विक कटौती जैसे उपायों को तेज करना जरूरी है। तेजी से गर्म हो रहे महासागरों में प्रवाल भित्तियों के अस्तित्व के लिए जलवायु कार्रवाई अब निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
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