ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल में मिले पांच शिशु ओरंगुटान को उनके मूल देश इंडोनेशिया वापस भेजने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी के इन ओरंगुटान को फिलहाल भुवनेश्वर के नंदनकानन प्राणी उद्यान में क्वारंटीन में रखा गया है। वन्यजीव तस्करी की आशंका के चलते वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और ओडिशा पुलिस इसकी जांच कर रहे हैं, जबकि इनकी प्रजाति की पुष्टि डीएनए जांच के बाद ही हो सकेगी।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल में मिले पांच शिशु ओरंगुटान को उनके संभावित मूल देश इंडोनेशिया वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत चल रही है। हालांकि, उनकी प्रजाति और भौगोलिक उत्पत्ति की पुष्टि डीएनए जांच के बाद ही हो सकेगी।
अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल इन पांच ओरंगुटान में तीन नर और दो मादा हैं। इनकी उम्र लगभग छह महीने से डेढ़ वर्ष के बीच बताई गई है। स्थानीय निवासियों और वन अधिकारियों ने 8 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल सीमा के निकट जलेश्वर क्षेत्र के बिचित्रपुर (भोगराई) जंगल में इन्हें पेड़ों की शाखाओं से लटकते हुए देखा था। ओरंगुटान का प्राकृतिक आवास भारत में नहीं है, जिससे वन्यजीव तस्करी की आशंका बढ़ गई है।
बचाए गए सभी पांचों ओरंगुटान को भुवनेश्वर के नंदनकानन प्राणी उद्यान में रखा गया है। यहां उन्हें नियंत्रित तापमान वाले परिसर में क्वारंटीन कर विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की देखरेख में उपचार दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती घबराहट के बाद अब उनकी स्थिति बेहतर है और वे वातावरण के अनुकूल हो रहे हैं। इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने भारतीय अधिकारियों और सीआईटीईएस प्रबंधन प्राधिकरण के साथ संपर्क किया है।
इंडोनेशियाई अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, ये सुमात्रा ओरंगुटान (Pongo abelii) हो सकते हैं। हालांकि, इसकी निर्णायक पुष्टि के लिए अधिकृत वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा आनुवंशिक जांच जरूरी है। इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय में जनसंपर्क एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग के निदेशक रिस्तियान्तो प्रिबादी ने कहा कि उनका देश भारत की न्यायिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा सम्मान करता है।
उन्होंने बताया कि संभावित प्रत्यावर्तन के लिए स्वास्थ्य परीक्षण, क्वारंटीन, आनुवंशिक पहचान, सुरक्षित परिवहन, पशु कल्याण और इंडोनेशिया पहुंचने के बाद पुनर्वास की तैयारियां की जा रही हैं। भारत में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) और ओडिशा की विशेष कार्यबल टीम मामले में तस्करी के संभावित नेटवर्क की जांच कर रही हैं।
ओडिशा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) पी.के. झा के अनुसार, फिलहाल इन जानवरों का जीवन बचाना और उन्हें नए वातावरण के अनुकूल बनाना प्राथमिकता है। डीएनए जांच, स्वास्थ्य आकलन और सीआईटीईएस सहित संबंधित वन्यजीव कानूनों के तहत आवश्यक मंजूरियां पूरी होने के बाद ही तय होगा कि उन्हें इंडोनेशिया वापस भेजा जाएगा या भारत में स्थायी रूप से रखा जाएगा।
यह मामला अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी पर अंकुश लगाने की चुनौतियों और संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस भेजने से जुड़ी वैज्ञानिक, कानूनी और राजनयिक जटिलताओं को उजागर करता है।

