महाराष्ट्र सरकार ने कमजोर मानसून और अल नीनो के प्रभाव के चलते राज्य के 358 में से 265 तालुकों (करीब 74%) को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है। मराठवाड़ा और विदर्भ में बारिश की कमी क्रमशः 38% और 27% दर्ज की गई है। स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने भूमि राजस्व में छूट, ऋण वसूली स्थगित करने और पेयजल व चारे की व्यवस्था जैसे उपायों वाला 12 सूत्रीय राहत पैकेज लागू किया है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह राज्य के करीब 74 प्रतिशत तालुकों को प्रभावित करता है। सरकार ने 26 सितंबर को जारी शासनादेश के माध्यम से सूखा प्रबंधन संहिता के तहत ‘ट्रिगर-1’ लागू किया।
यह निर्णय कृषि आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया, जिसमें 2026 के खरीफ मौसम के दौरान कम बारिश और लंबे समय तक चले शुष्क दौर का उल्लेख किया गया था। सूखा घोषित किए गए क्षेत्र 32 से अधिक जिलों में फैले हैं और इनमें मराठवाड़ा तथा विदर्भ के बड़े हिस्से शामिल हैं। मराठवाड़ा और विदर्भ मिलकर प्रभावित तालुकों का करीब 64 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
राज्य में जून से सितंबर के बीच बारिश में लगभग 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि मराठवाड़ा मंड कमी करीब 38 प्रतिशत और विदर्भ में लगभग 27 प्रतिशत रही। अल नीनो से बढ़ी चिंता कम बारिश और लंबे शुष्क दौर के बीच अल नीनो की स्थिति ने चिंता बढ़ाई है। मौसम संबंधी परिस्थितियों में बदलाव का असर महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश पर पड़ा है। कम वर्षा के कारण मिट्टी में नमी और जलस्रोतों पर दबाव बढ़ा है, जिससे आगामी रबी फसल के लिए भी परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
12 सूत्रीय राहत पैकेज सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए 12 सूत्रीय राहत पैकेज लागू किया है। इसके तहत भूमि राजस्व में छूट, फसल ऋण के पुनर्गठन और कृषि संबंधी ऋणों की वसूली स्थगित करने जैसे उपाय शामिल हैं। कृषि पंपों के बिजली बिल में रियायत, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस में छूट, जरूरत वाले क्षेत्रों में पेयजल टैंकरों की व्यवस्था तथा चारे और खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रावधान भी किए गए हैं।
ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के नियमों में भी आवश्यक राहत दी जाएगी। जिला कलेक्टरों को प्रभावित तालुकों में तत्काल फसल नुकसान के पंचनामे शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सर्वेक्षण के दौरान फसलों की स्थिति की तस्वीरें और GPS निर्देशांक भी दर्ज किए जाएंगे। फसल नुकसान के आधार पर वित्तीय सहायता की घोषणा अलग से निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद की जाएगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने और प्रभावित क्षेत्रों में समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। सरकार के सामने अब खरीफ फसल नुकसान के आकलन के साथ-साथ पेयजल, चारा और आगामी रबी मौसम के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की चुनौती है।
इस बीच, विपक्ष ने अतिरिक्त तालुकों को भी सूखा प्रभावित सूची में शामिल करने और किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता देने की मांग की है। कम बारिश के कारण जल उपलब्धता और रबी फसलों की संभावनाओं को लेकर आने वाले महीनों में स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत बताई जा रही है।
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