सूडान में तीन वर्षों से अधिक समय से जारी गृहयुद्ध और अल नीनो से जुड़े भीषण सूखे की दोहरी मार के कारण खाद्य संकट गंभीर हो गया है, जिससे देश में अकाल का खतरा बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र समर्थित ‘एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण’ (IPC) के अनुसार, ग्रेटर दारफुर और ग्रेटर कोर्डोफान जैसे क्षेत्रों में तीन दशकों से सबसे कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे फसल उत्पादन पिछले साल की तुलना में घटकर एक चौथाई रहने और 40 से 70 प्रतिशत कृषि भूमि पर दबाव पड़ने की आशंका है। विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, सूडान में पहले से ही 2.9 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं, और यदि तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो 2026 के अंत तक 3.5 लाख तथा अगस्त 2027 तक 12 लाख अतिरिक्त लोग गंभीर भूख के शिकार हो सकते हैं, जबकि मानवीय सहायता और राहत राशि की कमी से हालात और भी चिंताजनक बने हुए हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : सूडान में तीन वर्षों से अधिक समय से जारी गृहयुद्ध के बीच अल नीनो से जुड़ी भीषण सूखे की स्थिति ने खाद्य संकट को और गंभीर कर दिया है।
देश के कई हिस्सों में फसलें बर्बाद होने से लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र समर्थित खाद्य सुरक्षा निगरानी व्यवस्था ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में अकाल का जोखिम बढ़ने की चेतावनी दी है।
एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) के अनुसार, ग्रेटर दारफुर और ग्रेटर कोर्डोफान जैसे क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। देश के कई हिस्सों में जुलाई से सितंबर के महत्वपूर्ण वर्षा काल के दौरान तीन दशकों से अधिक समय में सबसे कम बारिश दर्ज की गई।
उत्तरी दारफुर में वर्षा का स्तर 1984 के विनाशकारी अकाल वाले वर्ष के बाद सबसे कम बताया गया है। किसानों के अनुसार, इस वर्ष फसल उत्पादन पिछले साल के मुकाबले घटकर लगभग एक चौथाई रह सकता है। कुछ इलाकों में 40 से 70 प्रतिशत तक कृषि भूमि गंभीर दबाव में है। संघर्ष और विस्थापन के कारण पहले से ऊंचे खाद्यान्न मूल्य और बढ़ने की आशंका है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुमान के मुताबिक, 2026 के अंत तक अतिरिक्त 3.5 लाख लोगों को गंभीर भूख का सामना करना पड़ सकता है। यदि हालात बिगड़ते हैं, तो अगस्त 2027 तक यह संख्या बढ़कर 12 लाख अतिरिक्त लोगों तक पहुंच सकती है। सूडान में पहले से ही लगभग 2.9 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं। कई क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाना मुश्किल बना हुआ है और आपात राहत के लिए जरूरी धनराशि का आधे से भी कम जुटाया जा सका है।
युद्ध के कारण लोगों का विस्थापन, बुनियादी ढांचे का विनाश और कृषि संसाधनों की कमी अब जलवायु संकट के साथ मिलकर हालात और खराब कर रही है। राहत एजेंसियों ने शेष फसल को सुरक्षित रखने और प्रभावित क्षेत्रों तक मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो 2027 में गंभीर और विनाशकारी भूख का सामना करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। सूडान का संकट दिखाता है कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष और जलवायु संबंधी आपदाएं मिलकर खाद्य प्रणालियों को किस तरह कमजोर कर सकती हैं।
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