वर्ष 2026 के मानसून सीजन में भारी बारिश की कमी के कारण गुजरात (4 जिले) और राजस्थान (14 जिलों की 80 तहसीलों) के कुल 18 जिले गंभीर सूखे से प्रभावित हुए हैं, जिससे किसानों और पशुपालकों की आजीविका पर संकट गहरा गया है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने फसल बर्बादी पर 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा (अधिकतम दो हेक्टेयर), 2 रुपये प्रति किलो रियायती चारा, पशु शिविरों के लिए 80 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु सहायता और 1 नवंबर से ‘विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन’ के तहत 150 दिनों के रोजगार का प्रावधान किया है। वहीं, राजस्थान सरकार ने बाजरा, ज्वार और मूंग जैसी फसलों के नुकसान को देखते हुए पशु शिविर, चारा डिपो और कृषि ऋणों की वसूली छह महीने के लिए स्थगित करने जैसे कदम उठाए हैं, ताकि किसानों को राहत मिल सके और पलायन को रोका जा सके।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : वर्ष 2026 के मानसून सीजन में बारिश की भारी कमी के चलते गुजरात और राजस्थान के कई जिलों में सूखे की स्थिति घोषित की गई है। दोनों राज्यों में कुल 18 जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
इससे हजारों किसानों और पशुपालकों की आजीविका पर संकट गहरा गया है। गुजरात सरकार ने देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ को सूखा प्रभावित जिले घोषित किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रभावित किसानों और पशुपालकों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की है।
फसल बर्बाद होने पर किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा दो हेक्टेयर प्रति किसान तय की गई है। पशुपालकों को राहत देने के लिए चारा दो रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा, पशु शिविरों में प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता दी जाएगी।
एक नवंबर से ‘विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के तहत 150 दिनों के रोजगार का भी प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन चार जिलों में 30 वर्षों के औसत की तुलना में बारिश की कमी 42 प्रतिशत से लेकर 83 प्रतिशत से अधिक तक दर्ज की गई है। राजस्थान में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य सरकार ने जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, पाली, जैसलमेर और बीकानेर समेत 14 जिलों की 80 तहसीलों में सूखा घोषित किया है।
बाजरा, ज्वार, मूंग, मोठ और तिल जैसी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। कई क्षेत्रों में जलाशयों का स्तर बेहद नीचे पहुंच गया है और पशुओं के लिए चारे की कमी भी सामने आने लगी है। राजस्थान सरकार ने पशु शिविर शुरू करने, चारा डिपो खोलने और कृषि ऋणों की वसूली छह महीने के लिए स्थगित करने जैसे कदम उठाए हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, जून से सितंबर के मानसून सीजन में राजस्थान में सामान्य 435.6 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले केवल 340.2 मिलीमीटर वर्षा हुई। वहीं, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर के सूखा निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर के मध्य तक देश के लगभग 47 प्रतिशत भूभाग में सूखे की स्थिति थी। दोनों राज्य सरकारों के अनुसार, सूखे की घोषणा केंद्र सरकार के सूखा प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत की गई है।
राहत उपायों का उद्देश्य किसानों की परेशानी कम करना, आजीविका की रक्षा करना और मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकना है। कृषि विशेषज्ञों ने आगामी रबी सीजन में कम पानी की जरूरत वाली फसलों को अपनाने और पश्चिमी भारत के शुष्क क्षेत्रों में दीर्घकालिक जल संरक्षण उपाय मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।
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