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यूरोप की नदियां समुद्र तक पहुंचाने से कहीं ज्यादा प्लास्टिक कचरा अपने भीतर जमा कर रहीं: अध्ययन

Environment Pulse
Last updated: October 31, 2026 8:01 pm
Environment Pulse
Published: October 31, 2026
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वागेनिंगन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च (WUR) के वैज्ञानिकों द्वारा यूरोप के 8,600 से अधिक नदी बेसिनों पर किए गए एक नए अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि यूरोप की नदियां केवल समुद्र तक प्लास्टिक पहुँचाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अपने भीतर भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जमा कर रही हैं। ‘एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार, वर्ष 2015 में पर्यावरण में पहुँचे कुल प्लास्टिक का केवल 0.6 प्रतिशत (करीब 20,000 टन) ही समुद्र तक पहुँच पाया, जबकि 93 प्रतिशत से अधिक जमीन पर रहा और लगभग छह प्रतिशत हिस्सा नदियों के तल, किनारों, बाढ़ के मैदानों व तलछट में फँस गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि जर्मनी की राइन नदी माइक्रोप्लास्टिक जमा करने के मामले में यूरोप में पहले स्थान पर रही है, जिसके मद्देनजर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की रणनीतियाँ केवल समुद्र तटों तक सीमित न रहकर ज़मीन और नदियों के भीतर कचरे के संचय को नियंत्रित करने पर भी केंद्रित होनी चाहिए।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : यूरोप की नदियां समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण पहुंचाने का माध्यम मात्र नहीं हैं, बल्कि बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरे को अपने भीतर भी जमा कर रही हैं। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि नदियों के तल, किनारों, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और तलछट में जमा प्लास्टिक की मात्रा समुद्र तक पहुंचने वाले कचरे से कहीं अधिक है।

इससे नदियों को समुद्र तक प्रदूषण पहुंचाने वाली केवल एक परिवहन प्रणाली मानने की धारणा पर सवाल खड़े हुए हैं। नीदरलैंड की वागेनिंगन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च (WUR) के वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ यूरोप के 8,600 से अधिक नदी बेसिनों में प्लास्टिक के प्रवाह का मॉडल तैयार किया।

वर्ष 2015 को आधार बनाकर किए गए इस अध्ययन के अनुसार, उस वर्ष यूरोपीय पर्यावरण में लगभग 35.5 लाख टन प्लास्टिक पहुंचा था। इसमें से 93 प्रतिशत से अधिक प्लास्टिक जमीन पर ही रह गया और नदियों तक नहीं पहुंचा। लगभग छह प्रतिशत प्लास्टिक नदी प्रणालियों में जमा हो गया, जबकि केवल 0.6 प्रतिशत यानी करीब 20 हजार टन प्लास्टिक ही नदियों के मुहानों से समुद्र तक पहुंचा।

एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में माइक्रोप्लास्टिक और बड़े प्लास्टिक कचरे का अलग-अलग आकलन किया गया है। माइक्रोप्लास्टिक पांच मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक कणों को कहा जाता है। मॉडल के अनुसार, एक वर्ष में नदी प्रणालियों के भीतर लगभग 1.59 लाख टन माइक्रोप्लास्टिक और 67,400 टन बड़े आकार का प्लास्टिक जमा हुआ।

प्लास्टिक को रोककर रखने वाली नदियों की सूची में तुर्किये की कुर्बागाली डेरे और पोलैंड की विस्तुला नदी के बाद जर्मनी की राइन नदी तीसरे स्थान पर रही। हालांकि, माइक्रोप्लास्टिक जमा करने के मामले में राइन नदी यूरोप में पहले स्थान पर रही।

शोधकर्ताओं के अनुसार, पर्यावरण में पहुंचने वाला प्लास्टिक जरूरी नहीं कि नदियों के रास्ते समुद्र तक पहुंचे। इसका बड़ा हिस्सा जमीन पर या नदी प्रणालियों के भीतर ही जमा रहता है। बांधों के पीछे, नदी किनारे उगी वनस्पतियों, तटों, बाढ़ के मैदानों और नदी तल की तलछट में प्लास्टिक वर्षों या दशकों तक फंसा रह सकता है। नीदरलैंड की नदियों पर किए गए अन्य अध्ययनों से भी इस निष्कर्ष को समर्थन मिला है।

कुछ नदी क्षेत्रों में बाढ़ के मैदानों ने कुल प्लास्टिक का 98 प्रतिशत तक अपने भीतर जमा कर रखा है। बाढ़ के दौरान नया प्लास्टिक इन क्षेत्रों में पहुंचता है, जबकि पहले से जमा कचरा दोबारा नदी के प्रवाह में शामिल होकर आगे बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2015 के आंकड़ों पर आधारित मॉडल में कई वर्षों तक जमा होने वाले प्लास्टिक, अत्यधिक बाढ़ और ज्वार-भाटा के प्रभावों का पूरा आकलन नहीं किया गया है।

इसलिए वास्तविक परिस्थितियों को समझने के लिए लगातार निगरानी और नए आंकड़ों की आवश्यकता है। अध्ययन का महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की रणनीति केवल समुद्र तटों और समुद्री क्षेत्रों की सफाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जमीन पर प्लास्टिक कचरे के स्रोतों को नियंत्रित करने के साथ-साथ नदियों के उन क्षेत्रों की पहचान भी जरूरी है, जहां बड़ी मात्रा में प्रदूषण जमा हो रहा है।

शोधकर्ताओं ने अध्ययन के आंकड़ों और मॉडल को सार्वजनिक किया है, ताकि अन्य वैज्ञानिक भी नए आंकड़ों के आधार पर प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभावों का विश्लेषण कर सकें। यह शोध स्पष्ट करता है कि नदियां समुद्र तक प्रदूषण पहुंचाने के साथ-साथ लंबे समय तक प्लास्टिक कचरे का भंडार भी बन सकती हैं।

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