ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में तीन दिवसीय ‘इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो 2026’ का उद्घाटन ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने किया। इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में बायो-एनर्जी और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन और ग्रामीण रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार कृषि अपशिष्ट को स्वच्छ ईंधन में बदलकर पर्यावरण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। देश-विदेश के निवेशक और विशेषज्ञ जैव ऊर्जा तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए मंथन कर रहे हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। स्वच्छ ऊर्जा, बायोएनर्जी और निवेश को नई रफ्तार देने के मकसद से ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो (IBET Expo) 2026 का आगाज़ हुआ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने इस मौके पर देश-विदेश से जुटे उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों और विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए प्रदेश को बायोएनर्जी के मामले में देश का सबसे आगे बढ़ता राज्य बताया।
कई मोर्चों पर नंबर वन का दावा
मंत्री शर्मा ने अपने भाषण में बताया कि पीएम सूर्य घर योजना, सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) उत्पादन और रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति — इन तीनों क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश आज देश में पहले पायदान पर है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रदेश शांतिपूर्ण राज्यों की सूची में और कारोबार के लिहाज़ से सबसे अनुकूल राज्यों में भी शीर्ष पर पहुंच चुका है।निवेशकों को खुला न्योतानिवेशकों को आकर्षित करने के लिए मंत्री ने सीधा संदेश दिया — प्रदेश में कहीं भी प्लांट लगाने का न्योता देते हुए उन्होंने कहा कि यहां किसी से कोई अवैध वसूली नहीं होती।
बायोएनर्जी के लिए उपजाऊ ज़मीन है
मंत्री शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की खेती-बाड़ी पर टिकी अर्थव्यवस्था, गन्ने की खेती, फसलों का बचा हुआ अवशेष, जैविक कचरा और शहरी ठोस कचरा — ये सब मिलकर प्रदेश को बायोएनर्जी उत्पादन के लिए भरपूर संसाधन मुहैया कराते हैं। इनका सही तकनीकी उपयोग हो तो प्रदेश न सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा हासिल कर सकता है, बल्कि किसानों, युवाओं और उद्योगों के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं।
कचरा अब समस्या नहीं, अवसर
अपने संबोधन का एक अहम हिस्सा मंत्री ने इस बात पर केंद्रित किया कि कचरे को अब बोझ नहीं, बल्कि ऊर्जा और रोज़गार पैदा करने के मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सीबीजी, बायोगैस, बायोमास और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसी तकनीकें स्वच्छ ऊर्जा देने के साथ-साथ कचरा प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी को भी मज़बूत बना सकती हैं। उनके मुताबिक इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, किसानों के फसल अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल होगा और इससे किसानों को अतिरिक्त कमाई के साथ स्थानीय स्तर पर रोज़गार भी मिलेगा। वैश्विक मंच पर यूपी की तस्वीरमंत्री ने IBET Expo जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को प्रदेश के लिए अपनी क्षमताएं दुनिया के सामने रखने का बड़ा मौका बताया।
शर्मा ने कहा कि सरकार लगातार निवेश, तकनीक और नवाचार के अनुकूल माहौल बनाने में जुटी है, और प्रदेश का लक्ष्य सिर्फ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि नई तकनीक व निवेश के मामले में भी देश में अग्रणी बनना है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी और अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) आशीष गोयल ने भी प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए स्टेकहोल्डर्स से बायोएनर्जी क्षेत्र में आगे आने की अपील की।
13 अगस्त तक चलेगा एक्सपो
यह एक्सपो 13 अगस्त 2026 तक चलेगा और इसमें देश-विदेश के निवेशक, विशेषज्ञ, तकनीकी संस्थान व उद्योग जगत एक साथ मंच साझा कर रहे हैं।150 से ज़्यादा कंपनियों की भागीदारी हो रही है।
वेबसाइट भी लॉन्च
कार्यक्रम में मंत्री शर्मा ने फीता काटकर 150 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के प्रदर्शनी स्टॉल्स का उद्घाटन किया और वहां प्रदर्शित बायोएनर्जी व स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी ली। इसी मौके पर उन्होंने ‘भारत बायो एनर्जी कंपास’ नाम की एक नई वेबसाइट भी लॉन्च की, जो बायोएनर्जी क्षेत्र से जुड़े निवेशकों, कंपनियों और विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर जानकारी व अवसर मुहैया कराएगी।
इस आयोजन को उत्तर प्रदेश की कृषि क्षमता, जैविक संसाधनों और ऊर्जा संभावनाओं को आधुनिक तकनीक व निवेश से जोड़ने वाला एक अहम मंच माना जा रहा है, जिससे प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा के साथ-साथ किसानों की आय, ग्रामीण रोज़गार और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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