एंटी-वेनम निर्माण में आत्मनिर्भर बनेगा उत्तर प्रदेश, स्थानीय सांपों के जहर पर शोध कर तैयार होगी दवा।
गुजरात मॉडल का अध्ययन करेगी विशेषज्ञों की टीम, बलसाड केंद्र की तर्ज पर कुकरैल रेंज में खड़ा किया जाएगा विश्वस्तरीय रिसर्च सेंटर।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
लखनऊ की कुकरैल रेंज में जल्द ही प्रदेश का पहला सरकारी स्नेक वेनम एक्सट्रैक्शन सेंटर बनने जा रहा है, जहां सांपों का जहर निकालकर उस पर शोध किया जाएगा। वन एवं वन्यजीव विभाग की शुरुआती स्टडी के बाद इस प्रोजेक्ट को उच्च स्तर पर हरी झंडी मिल चुकी है। खास बात यह है कि सरकारी क्षेत्र में इस तरह का यह पहला केंद्र होगा, जिससे उत्तर प्रदेश सर्पदंश की दवा यानी एंटी-वेनम बनाने के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा और दूसरे राज्यों पर उसकी निर्भरता घटेगी।
यह केंद्र राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वन एवं वन्यजीव प्रभाग की देखरेख में तैयार होगा। अभी हाल यह है कि यूपी में सांप का जहर निकालने के लिए सिर्फ बाराबंकी में एक निजी सेंटर काम कर रहा है, सरकारी स्तर पर कोई सुविधा नहीं है। विभाग की योजना है कि इस नए केंद्र में बड़े पैमाने पर रिसर्च के लिए देश-दुनिया के विशेषज्ञों को भी बुलाया जाए, चाहे वे स्थायी रूप से जुड़ें या गेस्ट के तौर पर आएं। अभी प्रदेश के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में जो एंटीवेनम इस्तेमाल होता है, वह तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र से मंगवाया जाता है।
इसी बाहरी निर्भरता को खत्म करने और यूपी के अपने सांपों की प्रजातियों के जहर पर शोध करके स्थानीय स्तर पर ही एंटीवेनम तैयार करने के मकसद से यह केंद्र स्थापित किया जा रहा है।
क्या है मकसद?
इस सेंटर के पीछे सोच यह है कि राज्य में एंटीवेनम का उत्पादन बढ़े, सांप के जहर की विषाक्तता को समझने के लिए रिसर्च हो, और सर्पदंश के मामलों में स्थानीय स्तर पर ही दवा उपलब्ध हो सके।
दरअसल विशेषज्ञ लंबे समय से यह कहते आए हैं कि किसी इलाके में सर्पदंश का इलाज तभी सबसे कारगर होता है जब एंटीवेनम उसी क्षेत्र के सांपों का जहर निकालकर बनाया गया हो। ऐसे में इस केंद्र के बनने से आसपास के इलाकों को खासा फायदा मिलने की उम्मीद है।
गुजरात मॉडल से सीखेगी टीम
कुकरैल में यह सेंटर कैसा हो, इसे लेकर अधिकारियों की एक टीम गुजरात के बलसाड भेजी जा रही है, जहां पहले से एक स्नेक वेनम सेंटर चल रहा है।
टीम वहां के कामकाज और अनुभवों को समझेगी, ताकि उसी आधार पर यहां भी एक विश्वस्तरीय केंद्र खड़ा किया जा सके।प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी के मुताबिक, यह पूरी कवायद यूपी को सर्पदंश के इलाज के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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