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Environment Pulse > ऊर्जा > पानी में तैरते हुए सोलर पैनल बदलेंगे सौर ऊर्जा के उत्पादन का परिदृश्य
(फोटो-एआई)
ऊर्जासस्टेनिबिलिटी

पानी में तैरते हुए सोलर पैनल बदलेंगे सौर ऊर्जा के उत्पादन का परिदृश्य

Environment Pulse
Last updated: August 4, 2026 8:38 pm
Environment Pulse
Published: August 4, 2026
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(फोटो-एआई)
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प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना की मंजूरी इस दिशा में मील का पत्थर

केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद पांच वर्षों के लिए लागू हुई है यह योजना

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

देश में फ्लोटिंग सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास हो रहे हैं। फ्लोटिंग सौर ऊर्जा (पानी में तैरते हुए सोलर पैनल) एक ऐसा सेगमेंट है, जिसका तेजी से विस्तार करने का लक्ष्य है। इस दिशा में पिछले दिनों केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना की मंजूरी इस दिशा में मील का पत्थर है। इस योजना के तहत 5,000 मेगावाट की फ्लोटिंग सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जाएगी। इसे फिलहाल पांच वर्षों के लिए लागू किया गया है।

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्टोरेज के साथ 5 GW क्षमता के लिए 5,070 करोड़ रुपये की मंज़ूरी दी गई।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सौर ऊर्जा के अनुसार देश की फ्लोटिंग सौर ऊर्जा क्षमता 102 GWp है। नई योजना में इस क्षमता का उपयोग केवल 5% है। ये स्पष्ट कर दिया गया है कि जो भी प्रोजेक्ट चालू होगा उसमे  कम से कम दो घंटे की स्टोरेज अति आवश्यक है। अनुमान लगाया जा रहा है की ऐसा करने से लाभ मिलेगा। जानकार बताते हैं की अगर सब सही रहा तो 10,000 मेगावाट की स्टोरेज क्षमता मिलेगी। इस योजना से सौर योजना का लाभ सुचारू रूप से लोगों को मिलेगा।  इससे देश में  जो सौर ऊर्जा  मुहिम छेड़ी गई है, उसको मजबूत बल मिलेगा।

बताते चलें सरकार ने 1 मेगावाट पर  ₹1 करोड़ की वित्तीय सहायता और प्रति परियोजना ₹50 लाख की फिजिबिलिटी अध्ययन के लिए मदद का प्रावधान रखा है। इन अध्ययनों में बाथिमेट्री, हाइड्रॉलॉजी और पर्यावरण माप शामिल हैं। माना जा रहा है कि अगर ये योजना सही से लागू हो गई तो 10 मिलियन टन CO2 ऊर्जा कम होगी।

फ्लोटिंग सोलर जिसका चलन इधर बढ़ा है उससे भूमि अधिग्रहण की देरी से बचा जा सकता है। इसके अलावा उपकरण से पानी के वैरिएबलाइजेशन में कमी आती है और उपकरण की क्षमता भी बढ़ जाती है। आंकड़ों की मानें तो भारत में सौर ऊर्जा क्षमता केवल 700 मेगावाट है, जबकि ज़मीन और छत पर सौर ऊर्जा की क्षमता 100 गीगावॉट से अधिक है। एक और जहां सौर ऊर्जा पर काम युद्ध स्तर पर चल रहा है वहीं, DCR भर्ती में कमी के कारण योजना की शुरुआत धीमी पढ़ती है। फ्लोटिंग सोलर ईपीसी क्षमता, स्टोरेज इंटीग्रेशन और टेक्सटाइल्स इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स की सीमित विशेषज्ञता है।

Also Read: पर्यावरण मंजूरी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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