By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: पर्यावरण मंजूरी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > सस्टेनिबिलिटी > पर्यावरण मंजूरी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सस्टेनिबिलिटी

पर्यावरण मंजूरी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Environment Pulse
Last updated: August 3, 2026 8:34 pm
Environment Pulse
Published: August 3, 2026
Share
SHARE

शीर्ष अदालत ने कहा-पिछली तारीख से मंजूरी सिर्फ ज्ञापन के हवाले से नहीं दी जा सकती

राहत : 2021 के ज्ञापन के तहत जिन्हें पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, उन पर कार्रवाई नहीं

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पिछली तारीख से पर्यावरण मंजूरी सिर्फ़ ज्ञापन के हवाले से नहीं दी जा सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्वप्रभावी मंजूरी का 2021 का जापन सिरे से ख़ारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली तारीख से पर्यावरण मंजूरी देने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ एक दफ्तर ज्ञापन के भरोसे पुराने प्रोजेक्ट्स को पिछली तारीख से मंजूरी नहीं दे सकती।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने 2021 में जारी उस कार्यालय ज्ञापन को पूरी तरह से खत्म कर दिया। इस मेमोरेंडम के मुताबिक, बिना पहले मंजूरी लिए शुरू हो चुके प्रोजेक्ट्स को बाद में भी रेट्रोस्पेक्टिव मंजूरी देने की छूट मिल जाती थी। अब कोर्ट ने ये व्यवस्था दी है कि ये फैसला आगे से सभी मामलों पर लागू होगा।

हालांकि कोर्ट ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है लेकिन कुछ रहत की खबर भी है।  जिन प्रोजेक्ट्स को 2021 के ज्ञापन के तहत पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, उन पर अब कोई बुलडोज़र नहीं चलेगा, न ही कोई और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फैसला सुनते हुए यह भी याद दिलाया गया है की सिर्फ दफ्तर का ज्ञापन काफी नहीं है। पीठ ने कहा है कि अगर कोई बड़ी छूट देनी ही है तो उसे सही वैधानिक प्रक्रिया के तहत, जरूरी पब्लिक नोटिफिकेशन जारी करके ही दिया जा सकता है। कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया अगर कोई अपवाद वाली स्थिति हो या  जनहित की बात हो, यह तभी दी जानी चाहिए।

गौरतलब है की अब कोई भी नया आवेदन रेट्रोस्पेक्टिव मंजूरी के लिए स्वीकार नहीं होगा। फैसले में जस्टिस बागची ने लिखा, केवल एक मेमोरेंडम जारी करके 2006 के नियम नहीं बदले जा सकते। असल में, ये ज्ञापन स्थायी माफी की तरह था-जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है। यह आदेश वनशक्ति केस में आई पुनर्विचार याचिका पर आया है।

Also Read: नितिन गडकरी ने विदर्भ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण अभियान चलाने का किया आह्वान

You Might Also Like

सिंधु जल संधि: छह दशक पुराना समझौता, अब सवालों के घेरे में
20 हजार अमृत सरोवरों का निर्माण एवं उद्धार करके यूपी आया देश में प्रथम
कश्मीर इकोटूरिज्म एसोसिएशन और टूरिज्म इंडिया एलायंस के बीच ऐतिहासिक समझौता, सतत पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
24 घंटे स्वच्छ बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन से भारत के स्टील क्षेत्र को किया जा सकता है डीकार्बोनाइज
रिकी केज ग्रैमी अवार्ड्स: 3,500 जिंगल्स बनाने वाले रिकी केज ने क्यों छोड़ा कमर्शियल संगीत? पीएम मोदी की सलाह ने बदला जीवन
TAGGED:environmentEnvironmental clearanceEnvironmental issuesEnvironmental lawSupreme courtSustainability
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
ईको सिस्टमजल

मौसम का बड़ा अलार्म: ‘लिविंग मेमोरी’ का सबसे ताकतवर अल नीनो दे सकता है दस्तक

Environment Pulse
Environment Pulse
August 25, 2026
11 से 13 अगस्त तक ग्रेटर नोएडा में होगा इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो-2026
Domestic Greenery adds to the environment
एआई से भारी पर्यावरणीय नुकसान : जल, जमीन, जलवायु सभी को खतरा
सिंधु जल संधि: छह दशक पुराना समझौता, अब सवालों के घेरे में

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?