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Environment Pulse > ईको सिस्टम > खनिज > वैज्ञानिक खदान बंदी में SECL ने कायम की मिसाल, कोल इंडिया की 67% खदानों को बंद कर देश में बनी नंबर-1
(फोटो सौजन्य-एआई)
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वैज्ञानिक खदान बंदी में SECL ने कायम की मिसाल, कोल इंडिया की 67% खदानों को बंद कर देश में बनी नंबर-1

Environment Pulse
Last updated: August 10, 2026 9:56 pm
Environment Pulse
Published: August 10, 2026
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(फोटो सौजन्य-एआई)
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2025-26 में अकेले बंद कीं रिकॉर्ड 25 खदानें, कोयला निकालने के बाद भूमि पुनर्द्धार, सुरक्षा और पर्यावरण बहाली पर SECL का विशेष ध्यान।

Contents
चरणबद्ध योजना और जिला स्तरीय समितियांवैज्ञानिक माइन क्लोजर में शामिल कार्यपर्यावरण बहाली और पौधरोपणस्थानीय समुदायों के लिए रोज़गार और आजीविका

माइनिंग का अंत नहीं, बल्कि नया अध्याय, बंद खदानों की ज़मीन पर 55 MW सोलर प्रोजेक्ट्स, इको-पार्क, स्कूल और मछली पालन से मिल रहा रोजगार।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की प्रमुख सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने वैज्ञानिक तरीके से खदान बंद (Mine Closure) करने की प्रक्रिया में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। SECL ने अब तक 28 बंद पड़ी खदानों में वैज्ञानिक माइन क्लोजर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, जो कोल इंडिया की किसी भी अन्य सब्सिडियरी में सर्वाधिक है। यह भारत में अब तक वैज्ञानिक तरीके से बंद की गई कुल खदानों का 67% है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में SECL ने अकेले 25 खदानों को बंद कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है, जो देश में किसी भी एक संस्था द्वारा एक वर्ष में किया गया सबसे बड़ा कार्य है।

चरणबद्ध योजना और जिला स्तरीय समितियां

SECL के अनुसार, खदान बंद करने का अर्थ कामकाज का अंत नहीं, बल्कि यह माइनिंग के लाइफसाइकिल की एक निरंतर प्रक्रिया है। कंपनी कुल 54 बंद खदानों की सूची को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर रही है।

2024-25: 3 खदानें बंद की गईं।

2025-26: 25 खदानें बंद की गईं।

2026-27 (भावी योजना): 11 खदानें बंद की जाएंगी।

2027-28 (भावी योजना): शेष 15 खदानें बंद की जाएंगी।

इस पूरी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में फैले कंपनी के सभी 10 ऑपरेशनल ज़िलों में ‘डिस्ट्रिक्ट माइन क्लोज़र एडवाइज़री कमिटी’ का गठन किया गया है।

वैज्ञानिक माइन क्लोजर में शामिल कार्य

वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत भूमिगत रास्तों को स्थायी रूप से सील करना, अनावश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर को हटाना, धंसने की आशंका वाले क्षेत्रों को ठीक करना, सुरक्षा उपाय लागू करना और बड़े पैमाने पर पौधरोपण कर पर्यावरण बहाल करना शामिल है। इसके बाद ज़मीन का पुनर्मूल्यांकन कर उसे रिन्यूएबल एनर्जी, कम्युनिटी सुविधाओं और आजीविका के लिए तैयार किया जाता है। वर्तमान में SECL के 8 पुनरुद्धार प्रोजेक्ट्स गतिमान हैं।

सोलर एनर्जी और जन-सुविधाओं में परिवर्तन

पुराने माइनिंग क्षेत्रों को सोलर पार्क और जन-सुविधाओं में बदला जा रहा है। बिश्रामपुर में केनापारा इको पार्क संचालित है; विवेक नगर UG में इको-पार्क के साथ 5 MW सोलर प्रोजेक्ट प्रगति पर है; भटगांव व बिश्रामपुर में 20 MW सोलर प्लांट चालू हैं; पिनौरा UG में 40 MW सोलर प्रोजेक्ट जारी है; तथा जमुना UG और गोविंदा UG में 55 MW सोलर प्रोजेक्ट की प्लानिंग चल रही है।

कोरबा 3 और 4 UG की ज़मीन अब बाल विहार हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर का हिस्सा है। नॉर्थ झगरखंड UG में पब्लिक पार्क व वॉटर फ़िल्टर प्लांट, सुभाष इनक्लाइन में म्युनिसिपल वॉटर फ़िल्टर प्लांट, साउथ झगरखंड 5 और 6 UG में CISF पोस्ट, साउथ झगरखंड 10 और 11 UG में पब्लिक पार्क, बांकी 7 और 8 UG में हेल्थ सेंटर व साप्ताहिक बाज़ार, तथा बांकी 5 और 6 UG को कम्युनिटी सेंटर में बदला गया है।

पर्यावरण बहाली और पौधरोपण

अकेले चचाई UG में मुहाने बंद करने और पुराने स्ट्रक्चर हटाने के बाद 35,000 पौधे लगाए गए हैं। रामनगर UG, कोरिया UG और मालगा UG में भी व्यापक पौधरोपण हुआ है, जबकि राजगामर 8 और 9 UG तथा प्योर चिरमिरी UG में प्राकृतिक वनस्पतियों के संरक्षण की तकनीक अपनाई गई है।

स्थानीय समुदायों के लिए रोज़गार और आजीविका

SECL ने प्रभावित क्षेत्रों में कंप्यूटर स्किल, सिलाई, हैंडीक्राफ्ट, मशरूम खेती और अचार बनाने का प्रशिक्षण दिया है।

मछली पालन (Pisciculture): पुनरुद्धार की गई ज़मीन और खदान जलस्रोतों से वार्षिक 25 टन मछली उत्पादन, 206 लोगों को रोज़गार और संबंधित परिवारों को सालाना लगभग ₹3 लाख की आय की उम्मीद है।

भविष्य की योजनाएं: जमुना OC में इको-टूरिज़्म, पोल्ट्री व मसाला प्रोसेसिंग; बैगा OC में शहद प्रोसेसिंग, हल्दी खेती व केज कल्चर; तथा बांकी UG में ट्रेनिंग सेंटर, कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट और फलों के बाग लगाने की तैयारी है।

“खदान बंद होने का मतलब माइनिंग का अंत नहीं, बल्कि कुछ नया शुरू होना है — ज़मीन को ठीक करना, पर्यावरण की रक्षा करना और पुरानी खदानों को साफ़ ऊर्जा व आजीविका देने वाली संपत्तियों में बदलना।”

 हरीश दुहन, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, SECL

 

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TAGGED:Coal India Mine ClosureHarish Duhan SECL CMDKenapara Eco Park BishrampurMine Closure and LivelihoodMines Land ReclamationSECL Scientific Mine ClosureSECL Solar Energy ProjectsSouth Eastern Coalfields Limited
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