कर्नाटक के उडुपी जिले स्थित मुकांबिका वन्यजीव अभयारण्य में मीठे पानी के केकड़े की एक नई प्रजाति खोजी गई है, जिसका नाम Ghatiana karnatakana रखा गया है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के वैज्ञानिकों और वन विभाग के सहयोग से सामने आई इस प्रजाति की सबसे बड़ी खासियत इसका अनूठा रंग है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। कर्नाटक के उडुपी जिले स्थित मुकांबिका वन्यजीव अभयारण्य में मीठे पानी के केकड़े की एक नई प्रजाति की खोज हुई है।
वैज्ञानिकों ने इसका नाम Ghatiana karnatakana रखा है। यह खोज पश्चिमी घाट की समृद्ध लेकिन अब भी काफी हद तक अनदेखी जैव विविधता को सामने लाती है।
इस नई प्रजाति को मुकांबिका वन्यजीव अभयारण्य के बीट फॉरेस्टर अजमीर के. ने नियमित गश्त के दौरान कोल्लूर रेंज के घने जंगलों में देखा था।
बाद में उन्होंने भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI), कोलकाता के वैज्ञानिक संतनु मित्रा के साथ मिलकर इसकी वैज्ञानिक पहचान और औपचारिक विवरण तैयार किया।
खोज से जुड़ा अध्ययन अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका Species में प्रकाशित हुआ है।
Ghatiana karnatakana, Ghatiana वंश की 15वीं ज्ञात प्रजाति है। यह वंश पश्चिमी घाट के लिए स्थानिक माना जाता है। इसकी आठ प्रजातियां, जिनमें नई खोजी गई प्रजाति भी शामिल है, केवल कर्नाटक में पाई जाती हैं। नई प्रजाति की सबसे खास पहचान इसका अनोखा रंग है।
नर के शरीर का रंग मुख्य रूप से गहरा बैंगनी होता है और उसके कवच के आगे के हिस्से पर हल्के गुलाबी से माउव रंग का विशिष्ट V आकार का निशान दिखाई देता है।
मादा का अगला हिस्सा धूसर-बैंगनी और पिछला हिस्सा गहरे धूसर-भूरे रंग का होता है।
इसके हल्के गुलाबी पंजे भी इसे कर्नाटक में पाई जाने वाली अन्य Ghatiana प्रजातियों से अलग करते हैं।
इस केकड़े की एक और खासियत इसका सालभर दिखाई देना है। कई संबंधित प्रजातियां शुष्क मौसम में कम नजर आती हैं, लेकिन G. karnatakana पूरे वर्ष दर्ज की गई है।
यह सदाबहार और अर्ध-सदाबहार जंगलों में बारहमासी जलधाराओं के आसपास नम वातावरण में रहती है। मानसून के दौरान यह लेटराइट चट्टानों पर देखी जाती है, जबकि अन्य मौसमों में नम पेड़ों के खोखलों में आश्रय लेती है।
इसकी टाइप लोकैलिटी कोल्लूर के पास माविनाकरू है। क्षेत्रीय अवलोकनों के आधार पर यह प्रजाति अभयारण्य के करीब 35 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में पाई जाती है, जिसमें मेगिनी वैली, मडिबारे और मुर्कोडिहोला जैसे इलाके शामिल हैं। पश्चिमी घाट में नई मीठे पानी की केकड़ा प्रजातियों की खोज में कर्नाटक के वनकर्मियों और नागरिक वैज्ञानिकों की भूमिका लगातार सामने आ रही है।
इनमें से कई प्रजातियां पेड़ों के खोखलों, चट्टानों की दरारों और लेटराइट पत्थरों की छोटी-छोटी दरारों जैसे बेहद विशिष्ट सूक्ष्म आवासों में रहती हैं, जिन्हें लंबे समय तक पर्याप्त सर्वेक्षण नहीं मिल पाया। मीठे पानी के केकड़ों को उनके आवास की पारिस्थितिक सेहत के महत्वपूर्ण संकेतकों में गिना जाता है।
Ghatiana karnatakana का नाम कर्नाटक के नाम पर रखा जाना न केवल राज्य की असाधारण जैव विविधता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जंगलों में नियमित मैदानी अवलोकन वैज्ञानिक खोजों के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
पश्चिमी घाट के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में आगे होने वाले सर्वेक्षणों से ऐसी कई और अनदेखी प्रजातियों के सामने आने की उम्मीद है।
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