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दिल्ली में ‘अर्बन हीट पेनल्टी’ का असर: घनी आबादी वाले इलाकों में हरियाली से भरपूर क्षेत्रों के मुकाबले 7 डिग्री तक अधिक गर्मी

Environment Pulse
Last updated: October 12, 2026 7:48 pm
Environment Pulse
Published: October 12, 2026
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उपग्रह आंकड़ों (लैंडसैट-8 और 9) के विश्लेषण से पता चला है कि दिल्ली के घनी आबादी वाले व कम आय वाले इलाकों में जमीन की सतह का तापमान (LST) आसपास के हरित और संपन्न क्षेत्रों की तुलना में 7°C तक अधिक दर्ज किया गया है, जिसे विशेषज्ञों ने ‘अर्बन हीट पेनल्टी’ नाम दिया है। 1 अप्रैल से 16 मई 2026 के बीच के आंकड़ों के अनुसार, सरिता विहार (39°C), वसंत कुंज (37°C) और ग्रेटर कैलाश-1 (38°C) जैसे हरित व सुनियोजित क्षेत्रों में तापमान कम रहा, जबकि मदनपुर, शाहीन बाग और महिपालपुर जैसे कंक्रीट से ढके और सघन आबादी वाले इलाकों में यह 46°C तक पहुँच गया। अर्था ग्लोबल के अध्ययन के अनुसार, पेड़ों की छाया वाले क्षेत्र को 3% से बढ़ाकर 11% करने से औसत तापमान में 1°C तक की कमी लाई जा सकती है। विशेषज्ञों ने सामाजिक असमानता और स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए लक्षित शहरी नियोजन, हरित क्षेत्र बढ़ाने और मोहल्ला-स्तरीय हीट एक्शन प्लान तैयार करने पर बल दिया है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : राजधानी दिल्ली में गर्मी का असर सभी इलाकों में एक समान नहीं है। उपग्रह आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि घनी आबादी वाले और कम आय वाले मोहल्लों में जमीन की सतह का तापमान आसपास के हरियाली से भरपूर और संपन्न इलाकों की तुलना में सात डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया। विशेषज्ञों ने इसे ‘अर्बन हीट पेनल्टी’ यानी शहरी गर्मी का असमान बोझ बताया है।

इंडिया टुडे के ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) विश्लेषण में नासा और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के लैंडसैट-8 और लैंडसैट-9 उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया।

एक अप्रैल से 16 मई 2026 के बीच जमीन की सतह के तापमान (एलएसटी) के आधार पर तैयार मानचित्रों में दिल्ली के विभिन्न इलाकों के बीच स्पष्ट अंतर सामने आया। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में अपेक्षाकृत हरियाली और सुनियोजित विकास वाले सरिता विहार का औसत सतही तापमान करीब 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि इससे कुछ ही दूरी पर स्थित मदनपुर और शाहीन बाग के घनी आबादी वाले हिस्सों में यह लगभग 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

इसी तरह वसंत कुंज का औसत सतही तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि पास के घनी आबादी वाले महिपालपुर में तापमान काफी अधिक दर्ज किया गया। ग्रेटर कैलाश-1 का तापमान लगभग 38 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि आसपास के अधिक घने निर्माण वाले क्षेत्र अपेक्षाकृत गर्म पाए गए।

विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि शहरी क्षेत्रों में हरियाली, निर्माण की सघनता, आवासीय नियोजन और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां गर्मी के प्रभाव को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जहां पेड़-पौधों की संख्या अधिक और बस्तियों का नियोजन बेहतर है, वहां तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।

इसके विपरीत, कंक्रीट से ढके और घनी आबादी वाले इलाकों में गर्मी के हॉटस्पॉट विकसित हो रहे हैं। यमुना के बाढ़ क्षेत्र और दक्षिण तथा पूर्वी दिल्ली के कुछ हरित हिस्सों में तुलनात्मक रूप से कम तापमान दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, शहर के भीतर तापमान का यह अंतर सामाजिक असमानता को और बढ़ा सकता है। कम आय वाले घनी आबादी के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अधिक गर्मी, सीमित शीतलन सुविधाओं और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

दूसरी ओर, हरियाली से भरपूर इलाकों के निवासियों को पेड़-पौधों और बेहतर शहरी नियोजन से प्राकृतिक राहत मिलती है। अर्था ग्लोबल के एक अन्य अध्ययन में उपग्रह आंकड़ों और परिवारों के सर्वेक्षण को मिलाकर गर्मी के प्रभाव का आकलन किया गया। अध्ययन के अनुसार, पेड़ों की छाया वाले क्षेत्र को तीन प्रतिशत से बढ़ाकर 11 प्रतिशत करने पर लोगों द्वारा अनुभव की जाने वाली गर्मी में लगभग एक डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है।

यह लाभ निर्मित क्षेत्रों के विस्तार से होने वाली गर्मी में वृद्धि के प्रभाव से भी अधिक हो सकता है। इन निष्कर्षों के मद्देनजर विशेषज्ञों ने दिल्ली में लक्षित शहरी नियोजन की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके तहत हरित क्षेत्र बढ़ाने, आवासीय भवनों के डिजाइन में सुधार करने और प्रत्येक मोहल्ले की जरूरतों के अनुरूप हीट एक्शन प्लान तैयार करने जैसे उपाय शामिल हैं। उनका मानना है कि इन कदमों से राजधानी में बढ़ती गर्मी के असमान प्रभाव को कम करने और संवेदनशील आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

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