By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: ब्राजील में मेंढकों की सामूहिक मौत का 50 साल पुराना रहस्य सुलझा, फंगस बना बड़ी वजह
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > ब्राजील में मेंढकों की सामूहिक मौत का 50 साल पुराना रहस्य सुलझा, फंगस बना बड़ी वजह
AI Image
जैव-विविधता

ब्राजील में मेंढकों की सामूहिक मौत का 50 साल पुराना रहस्य सुलझा, फंगस बना बड़ी वजह

Environment Pulse
Last updated: November 5, 2026 8:18 pm
Environment Pulse
Published: November 5, 2026
Share
AI Image
SHARE

वैज्ञानिकों ने ब्राजील में पिछले पाँच दशकों से मेंढकों की आबादी में हो रही भारी गिरावट और उनकी सामूहिक मौत के रहस्य को सुलझा लिया है। नए शोध के अनुसार, ‘काइट्रिड फंगस’ (Batrachochytrium dendrobatidis) इस संकट की मुख्य वजह है, जो उभयचरों की त्वचा को संक्रमित कर उनके शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगाड़ देता है और संवेदनशील प्रजातियों में मृत्यु दर 90% तक पहुंचा देता है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : वैज्ञानिकों ने काइट्रिड फंगस को उभयचर प्रजातियों के विनाश से जोड़ा, जैव विविधता संरक्षण को लेकर बढ़ी चिंता साओ पाउलो। ब्राजील में पिछले पांच दशकों से मेंढकों की आबादी में हो रही भारी गिरावट के पीछे का रहस्य वैज्ञानिकों ने सुलझा लिया है। नए शोध में काइट्रिड फंगस (Batrachochytrium dendrobatidis) को इस संकट की प्रमुख वजह बताया गया है। यह फंगस उभयचरों की त्वचा को संक्रमित कर उनके शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे कई मामलों में उनकी मृत्यु हो जाती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 1970 के दशक से ब्राजील के जंगलों और आर्द्रभूमि क्षेत्रों में मेंढकों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही थी। कई प्रजातियां अपने पारंपरिक प्राकृतिक आवासों से गायब हो गईं।

लंबे समय तक शोधकर्ता इसके लिए जंगलों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और बीमारियों को संभावित कारण मानते रहे। नए अध्ययन में पुराने मैदानी सर्वेक्षणों, संग्रहालयों में सुरक्षित रखे गए नमूनों और आधुनिक आनुवंशिक विश्लेषण का सहारा लिया गया। इन साक्ष्यों से पता चला कि फंगस संवेदनशील प्रजातियों में तेजी से फैला और बड़े पैमाने पर मौतों का कारण बना। कुछ अत्यधिक संवेदनशील प्रजातियों में इससे मृत्यु दर 90 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच सकती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, ब्राजील की समृद्ध उभयचर जैव विविधता के लिहाज से यह नुकसान बेहद गंभीर है। अटलांटिक वन और अमेजन के आसपास पाए जाने वाले कई स्थानीय मेंढक या तो विलुप्त हो गए या गंभीर रूप से संकटग्रस्त हो गए। हालांकि, कुछ आबादी में हाल के वर्षों में आंशिक सुधार के संकेत भी मिले हैं। संरक्षण संगठनों ने उभयचर प्रजातियों के व्यापार की निगरानी, जैव सुरक्षा उपायों और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण को मजबूत करने की मांग की है। कुछ संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए नियंत्रित प्रजनन कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि फंगस के अलावा वनों की कटाई, कृषि रसायन और जलवायु परिवर्तन भी इन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा बने हुए हैं।

Also Read: विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त और तकनीक हस्तांतरण की मांग तेज

You Might Also Like

हरे कछुए की वापसी: संकटग्रस्त से ‘कम चिंताजनक’ श्रेणी में पहुंची प्रजाति
‘वाइल्ड विज्डम ग्लोबल चैलेंज-2026’ से जोड़ा जाएगा नई पीढ़ी को
जब चरागाह खतरे में पड़ा तो 700 किमी चल पड़ा थार का ऊंटपालक
पूर्वी अंटार्कटिका में बर्फ के भंडार में हुई अस्थायी बढ़ोतरी, दूरस्थ उष्णकटिबंधीय समुद्री गर्मी का असर
बाघ और तेंदुओं की गंध से होगी गैर-आक्रामक निगरानी, वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक
TAGGED:Amphibian DeclineBatrachochytrium dendrobatidisBiodiversity ConservationBrazil WildlifeChytrid Fungus
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: दिल्ली की नई ईवी नीति में पेट्रोल दोपहिया वाहनों पर शिकंजे की तैयारी इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरस

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
(फोटो सौजन्य-एआई)
ऊर्जाफ्यूचर ग्रीनसस्टेनिबिलिटी

सौर स्वरोजगार योजना से उत्तराखंड में हरित ऊर्जा और रोजगार को मिल रही रफ्तार

Environment Pulse
Environment Pulse
August 12, 2026
हिमालयी इलाकों में हाई-रिस्क मेगा प्रोजेक्ट्स पर रोक की मांग
Wayanad Is Getting Warmer, and Its Crops Are Noticing
शहरों की बढ़ती सीमाओं पर जलवायु संकट, विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शहरीकरण नीति की उठाई मांग
Lucknow’s Kukrail Night Safari: Setting a New Standard for Urban Eco-Tourism

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?